आतंकवाद विरोधी क़ानून UAPA का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही है पुलिस, देखें आंकड़े

2019 के आंकड़ों के अनुसार एक साल में यूएपीए के 1,226 मामले दर्ज किये गये थे जिसमें 1,948 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था

नई दिल्ली : संसद के मॉनसून सत्र में गृह मंत्रालय से यूएपीए के तहत गिरफ़्तारी के ताज़ा आंकड़े प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। इस सवाल के जवाब में मंत्रालय ने जो जवाब दिया वो हैरान करने वाला है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि गृह मंत्रालय के पास 2019 के बाद के आंकड़े मौजूद नहीं हैं। बहरहाल, मंत्रालय ने 2019 तक के जो आंकड़े प्रस्तुत किये हैं वह भी बहुत भयावह हैं।

 >. 2019 के आंकड़ों के अनुसार एक साल में यूएपीए के 1,226 मामले दर्ज किये गये थे जिसमें 1,948 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था।

>. इन मामलों में से केवल 485 में चार्जशीट दाख़िल की गई थी। हैरान करने वाली बात है कि 150 से ज़्यादा मामलों में चार्जशीट एक साल (365 दिन) बाद दाख़िल की गई।

>. मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार साल 2017 में यूएपीए के 901 मामले दर्ज किये गए थे। साल 2018 में यह संख्या बढ़कर 1,182 और 2019 में 1,226 हो गई।

तआज्जुब की बात है कि प्रशासन इस क़ानून का इस्तेमाल इस धड़ल्ले से कर रहा है। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इस क़ानून का इस्तेमाल ख़ासतौर पर मुसलमानों के ख़िलाफ़ हुआ है।

संसद में एक दूसरे सवाल का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि बीते वर्ष दिल्ली पुलिस ने 34 लोगों को इस क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया था। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने गिरफ़्तार हुए लोगों के नाम बताने से इनकार कर दिया।

हालांकि 34 में से 16 लोगों के नाम सार्वजनिक तौर पर मौजूद हैं। यह नाम हैं- ताहिर हुसैन, मीरान हैदर, गुलफ़िशा फ़ातिमा, इशरत जहां, ख़ालिद सैफ़ी, उमर ख़ालिद, शादाब अहमद, फ़ैज़ान ख़ान, आसिफ़ इक़बाल तान्हा, देवांगना कलिता, नताशा नरवाल, सफ़ूरा ज़रगर, शफा उर रहमान, अतहर खान, सलीम मलिक, तस्लीम अहमद।

ज़ाहिर है कि पुलिस ने इस क़ानून का इस्तेमाल सीएए का विरोध कर रहे छात्रों की आवाज़ को दबाने के लिए किया है।

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