जनता राशन के लिए परेशान और शराबियों पर दिल्ली सरकार मेहरबान

शराब की होम डिलीवरी का आदेश जारी कर के केजरीवाल ने गरीबों के जख्मों पर नमक छिड़का है :कलीमुल हफीज़

नई दिल्ली  : दिल्ली सरकार ने आबकारी नीति में बदलाव करते हुए शराब की होम डिलीवरी सर्विस शुरू कर दी है सरकार का यह फैसला इस हाल में आया है जबकि लॉक डाउन की मार झेल रहे गरीबों को दो वक्त की रोटी नहीं मिल रही है काश केजरीवाल ने गरीबों के लिए खाना पहुंचाने की कोई होम डिलीवरी सर्विस शुरू की होती यह गरीबों के साथ मजाक नहीं तो और क्या है इन विचारों को ए आई एम आई एम के दिल्ली अध्यक्ष कलीमुल हफीज़ ने प्रेस को जारी एक बयान में व्यक्त किया उन्होंने कहा कि शराब जिसे पाप की जननी कहा जाता है और किसी भी शरीफ घराने में अच्छी नजर से नहीं देखी जाती शराब पीने वालों को कहीं भी इज्जत की नजर से नहीं देखा जाता उस पर पाबंदी लगाने के बजाय सरकार उसकी प्राप्ति के लिए आसानियां पैदा कर रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा शराब की बिक्री हो और दिल्ली सरकार के ख़ज़ाने में बढ़ोतरी हो.


स्वास्थ्य और शिक्षा में उल्लेखनीय काम करने का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार का यह कदम मुल्क के इतिहास में काले अक्षरों में लिखा जाएगा दुनिया लिखेगी कि जब दिल्ली के लोग रोटी के टुकड़ों को तरस रहे थे जब बीमार ऑक्सीजन के बगैर मर गए थे जब मजदूर भूखे रहने पर मजबूर थे उन दिनों दिल्ली की सरकार ने राशन और खाना देने मरीजों को दवाएं और ऑक्सीजन देने और मजदूरों को रोजगार देने के बजाय शराब पीने वालों को इतनी आसानी दे दी कि उन्हें बगैर किसी परेशानी के शराब प्राप्त हो सके.

शराबियों को शराब खाने जाने की परेशानी भी ना उठानी पड़े बल्कि खुद शराब खाना उनके दरवाजों पर दस्तक दे रहा था दिल्ली का मुख्यमंत्री लोगों को जिंदगी देने के बदले मौत बांट रहा था, पहले शराब पीने की उम्र कम की गई शराब की दुकानों मैं बढ़ोतरी की गई और अब शराब की होम डिलीवरी शुरू करके सरकार ने अपनी नियति और नियत साफ कर दी है कि वह जनता के किस वर्ग की हितैषी है  दिल्ली हुकूमत जनता को खास तौर पर नौजवानों को शराब के नशे में मस्त करके अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है.

मजलिस के अध्यक्ष ने कहा कि अभी वो क्षण और मंज़र नहीं भूले हैं जब दिल्ली की सड़कों पर लाशों का ढेर था  श्मशान घाट और कब्रिस्तान कम पड़ रहे थे जब हर तरफ मौत नाच रही थी और ना ही अभी कोरोना ख़त्म हुआ है अभी खतरनाक तीसरी लहर का इंतजार किया जा रहा है ऐसे में दिल्ली की सफाई करने ,दिल्ली के अस्पतालों को अपग्रेड करने और दिल्ली की जनता के जख्मों पर मरहम रखने के बजाय केजरीवाल नमक छिड़क रहे हैं कलीमुल हफीज़ ने सवाल किया कि आखिर जिन राज्यों में शराब पर पाबंदी है उनके सरकारी खर्चे कैसे पूरे हो रहे हैं केजरीवाल किस जबान से नैतिकता और सभ्यता की बात करते हैं सरकार को चाहिए कि वह देश का मजाक ना बनवाएं और अपने इस एलान को न केवल वापस लें बल्कि शराबबंदी पर भी विचार करें दिल्ली की जनता बिजली और पानी का पैसा देकर और दिल्ली  की महिलाएं बसों का किराया देकर सरकार को ख़ज़ाना देगी मगर केजरीवाल उनके परिवार को बर्बाद करने वाली शराब के खिलाफ कानून लाए.

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