NIA ने कश्मीर में मीडिया, NGO कार्यालयों पर मारे छापे, महबूबा ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया
श्रीनगर| राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर में 10 अलग-अलग स्थानों पर छापा मारा जिसमें अंग्रेज़ी दैनिक ग्रेटर कश्मीर की ऑफिस भी शामिल है.
एनआईए ने मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज के घर की भी तलाशी ली है.
इंडिया टुमारो डॉट नेट की रिपोर्ट के मुताबिक़ अधिकारियों ने बताया कि, एनआईए द्वारा छापे मारे गए ठिकानों में हैदरपोरा और नवाकदल में दो एनजीओ के कार्यालयों, एक पत्रकार के घर, एक हाउसबोट के मालिक और हुर्रियत कांफ्रेंस के एक कार्यकर्ता का घर शामिल है जिसकी पहचान मुहम्मद यूसुफ सोफी के रूप में की गई है.
एनआईए अधिकारी ने कहा कि खुर्रम परवेज के आवास और कार्यालय परिसर में तलाशी ली गई, जो जम्मू-कश्मीर सिविल सोसाइटी गठबंधन के सह-संयोजक हैं. उनके सहयोगियों परवेज अहमद बुखारी, परवेज अहमद मट्टा और बेंगलुरु की रहने वाली सहयोगी स्वाति शेषाद्रि, परवीना अहंगर एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स ऑफ डिसअपीयर्ड पर्सन्स (एपीडीपीके) चेयरपर्सन और एनजीओ एथ्राउट और जीके ट्रस्ट के कार्यालयों की तलाशी ली गई.
एनआईए अधिकारी ने कहा कि राज्य में टेरर फंडिंग के स्रोतों का पता लगाना यह एनआईए के काम का हिस्सा है.
एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा है कि आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर और बांदीपोरा में 10 स्थानों पर तलाशी ली है.
तलाशी के दौरान एनआईए ने कई आपराधिक दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर लिया.
इस कार्रवाई की निंदा करते हुए पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट किया, “एनआईए ने मानवाधिकार कार्यकर्ता परवेज और श्रीनगर में ग्रेटर कश्मीर कार्यालय पर छापे मारे हैं, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भारत सरकार की कार्रवाई का एक और उदाहरण है. अफसोस की बात है कि एनआईए लोगों को डराने के लिए भाजपा की एजेंसी बन गई है.”
उन्होंने ट्वीट किया, “ऐसे समय में जब जम्मू-कश्मीर की भूमि और संसाधनों को लूटा जा रहा है, भारत सरकार चाहती है कि मीडिया योग के बारे में लिखें. बीजेपी के ‘ऑल इज वेल’ में सच्चाई सबसे बड़ी दुर्घटना है. गोदी मीडिया का हिस्सा बनने को तैयार नहीं होने वाले पत्रकार निशाने पर हैं.”
एनआईए के अनुसार कुछ गैर सरकारी संगठन और ट्रस्ट कथित चंदे के नाम पर धन एकत्रित करके जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियों के लिए इसका का उपयोग कर रहे हैं

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