श्रम कानून में मोदी सरकार ने किया बदलाव, अब पूंजीपतियों का गुलाम होगा श्रमिक

श्रम कानून में मोदी सरकार ने किया बदलाव, अब पूंजीपतियों का गुलाम होगा श्रमिक


29 श्रम कानूनों को ख़त्म कर जो नए चार लेबर कोड या श्रम संहिताएं बनाई गई हैं, उसके तहत भारत में 

1- बाल श्रम कानूनी हो गया है।

2-ठेकेदारी प्रथा अब ग़ैरकानूनी नहीं रहा।

3- बोनस एक्ट खत्म होने के साथ ही मालिकों की मज़बूरी भी ख़त्म हो गई है।

4-सबसे अहम कि आठ घंटे के काम के अधिकार को ख़त्म कर मालिकों को ओवर टाइम लगाने की अनिवार्यता की इजाज़त दे दी गई है।

5-अब महिलाएं रात्री पाली में असुरक्षित स्थिति में काम करेंगे।

6-05 प्रवासी मजदूर कहीं एक राज्य से दूसरे राज्य में रोजगार के लिए जाएंगे तो, उनका पंजीकरण आवश्यक नहीं।

7- फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट को बढ़ावा के चलते, नौकरी हुआ असुरक्षित

8- एक टर्म पूरी होने पर मालिक चाहेगा तो रखेगा, अन्यथा नहीं।

9-निजी कंपनी मालिक अपना लोगों को लगाकर यूनियन चलाएगा एबं कामगारों का शोषण करने के लिए रास्ता हुआ उन्मुक्त।10- जहाँ 100 था अब हुआ 300।

जहाँ 300 से कम लोग काम करेंगे वहाँ प्रबंधन कभी भी सरकार को बिना बताए लोगों का छटनी कर सकती है, रास्ता हुआ साफ। 11- श्रम संघों को मजदूरों के हित के लिए हड़ताल करना नहीं रहा आसान।

भले ही लोग अधिकार से बंचित रहे या मर भी जाए।

 12-किसी भी समय किसी की भी नौकरी जा सकती है, परफॉर्मेंस के आड़ में, नियम हुआ आसान।

13- जहाँ 20 से कम लोग काम करेंगे, वहाँ बोनस डिमांड नहीं किया जा सकता है। 

14- जहाँ 300 से कम कामगार काम कर रहे हैं, वहाँ स्टैंडिंग ऑर्डर की आवश्यकता खत्म, अत्यंत खतरनाक है।

 15- सार्वजनिक क्षेत्र उद्योग को छोड़कर एबं कुछ गिने चुने निजी उद्योग को छोड़ देने के बाद बाकी 98% उद्योग/ कारखाने  स्टैंडिंग ऑर्डर प्रतिबंध से मुक्त हो गए।

 16- बर्तमान में ESI, EPF जैसे 06 कल्याणकारी योजनाएं अच्छी तरह काम कर रहे,  सरकार उसमे भी बदलाव लाकर उसको कमज़ोर करने जा रही है।

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