भारत में पटे पड़े हैं ‘मेड इन चाइना’ उत्पाद
आजकल भारत में “चीन का बहिष्कार” मुहिम फिर से तेज होने लगी है। ट्वीटर पर एक वीडियो वायरल हो गया है, इसमें एक पुरुष चीन निर्मित टीवी सेट को ऊपर से फेंक रहा है। नीचे कई लोगों ने उसे एकसाथ तोड़ा।
वहीं, एक टोपी पर भारतीय लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ। टोपी पर “बायकॉट चाइना” लिखा हुआ है, लेकिन उसके लेबल पर लिखा हुआ है मेड इन चाइना। चीनी उत्पादों के खिलाफ आवाज उठाने के चलते अधिकाधिक भारतीय लोगों को पता लगा कि उनके जीवन के इर्द-गिर्द जो भी वस्तुएं हैं, वे सब ‘मेड इन चाइना’ हैं।
वास्तव में आज भारत में चीनी उत्पाद न सिर्फ टीवी सेट और सेल फोन हैं, बल्कि बर्तन, फर्नीचर, पंखा, एयर कंडीशनर, पेटीएम जैसे डिजिटल वॉलेट सब मेड इन चाइना से संबंधित हैं। थिंक टैंक गेटवे हाउस के शोध के अनुसार चीनी निवेशकों ने भारत की स्टार्ट-अप कंपनियों में करीब 4 अरब अमेरिकी डॉलर की पूंजी लगाई है।
पिछले 5 सालों में भारत के 30 यूनिकॉर्न कंपनियों में 18 को चीन के निवेश मिल चुके हैं। इन कंपनियों की सेवा खान-पान, रहन-सहन आदि आवश्यकताओं और शिक्षा व मनोरंजन आदि व्यवसायों से जुड़े हैं, जिनका भारतीय लोगों के जीवन से घनिष्ठ नाता है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार ने हाल में बीएसएनएल और एमटीएनएल आदि दूरसंचार कंपनियों और इसके अधीनस्थ कंपनियों से चीनी उत्पादों का इस्तेमाल न करने का आग्रह किया। भारतीय दूरसंचार विभाग चीन द्वारा निर्मित उपकरण पर निर्भरता कम करने पर विचार कर रहा है। लेकिन भारत के दो सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियां एयरटेल और वोडाफोन अब चीन के हुआवेई और जेडटीई के उपकरणों का प्रयोग करती हैं।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर भारत चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाची है, तो भारत में 5जी तकनीक का प्रयोग देर से होगा और भारतीय उपभोक्ताओं के लिए 5जी के प्रयोग की लागत में 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। यह भारतीय लोगों के लिए लाभदायक नहीं है।
चीन और भारत का लाभ पहले से ही वैश्विकरण की प्रक्रिया में घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है। जैसा कि एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को किया गया निर्यात चीन के कुल निर्यात का केवल 2 प्रतिशत है। चाहे भारत चीन से आयातित सभी वस्तुओं पर प्रतिबंध लगा ले, चीन पर बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसलिए “चीन का बहिष्कार” से भारतीय लोगों के लिए कोई लाभ नहीं मिलेगा।

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