लॉकडाउन से गुजरात में फंसे पिता तो गुल्लक तोड़ बेटियों ने ख़रीदा कफन, मां को दिया कंधा और मुखाग्नि

 

पटना। बिहार के सारण जिले के मांझी में उस वक्त एक अजीबोगरीब स्थिति हुई, जब मां की मौत पर गुल्लक तोड़ बेटियों ने कफन खरीदे। लॉकडाउन में पिता के बाहर रहने की स्थिति में चार बेटियों ने मां की अर्थी को कंधा दिया तो एक ने मुखाग्नि देकर समाज की परंपराओं से इतर एक नया अध्याय लिखा।

जनज्वार डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक मांझी प्रखंड के फतेहपुर सरैया में यह घटना रविवार की रात की है। पति राजबलम सिंह कुशवाहा गुजरात के सूरत में मजदूरी करते हैं। लॉकडाउन में वहीं फंस गए। चार दिन पहले उनकी पत्नी राजमुनी देवी (45 वर्ष) की कमर व पैर में अचानक तेज दर्द होने लगा। घर में मौजूद बेटियों ने डॉक्टर से दिखाया। दो दिनों बाद रविवार की रात अचानक उसकी मौत हो गई।

 

ग्रामीणों ने मृतका की शादीशुदा बड़ी पुत्री पिंकी व बलेसरा में अपनी मौसी के घर रह रही पूजा को भी इसकी सूचना दी। सुबह महिला की शव यात्रा निकली। अन्य ग्रामीणों के साथ पुत्री पूनम, काजल व नेहा समेत चारों बहनों ने अर्थी को कंधा दिया। अग्नि संस्कार को लेकर लोग अलग-अलग राय देने लगे तभी मृतक की पांचवीं पुत्री ने साहस का परिचय देते हुए स्वयं मुखाग्नि देने का निर्णय किया।



मांझी प्रखंड जीविका समूह से जुड़ी मृतका राजमुनी की पुत्रियों की मदद में अनुभव जिंदगी का सोशल मीडिया ग्रुप भी खड़ा हुआ। ग्रुप के कुछ सदस्यों राजीव कुमार सिंह व राजू कुमार गुप्ता की पहल पर जुटी जीविका दीदियों ने तत्काल 83 सौ रुपये व खाद्य सामग्री के अलावा स्थानीय मुखिया संजीत कुमार साह व पूर्व जिप सदस्य धर्मेन्द्र सिंह ने पांच पांच हजार रुपये नकद व खाद्य सामग्री उपलब्ध करायी। एक पुत्री को सीएसपी में नौकरी दिलाने का भी आश्वासन दिया गया।

मौके इधर प्रखंड परियोजना पदाधिकारी संजय कुमार ने सोशल मीडिया ग्रुप के अनुरोध पर मृतका का 25 हजार का बैंक ऋण माफ कराने के साथ साथ उसकी पुत्रियों को स्कील डेवलपमेंट के तहत मुफ्त ट्रेनिंग कराने व रोजगार उपलब्ध कराने में हर सम्भव सहयोग का आश्वासन दिया।

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