जमाअत इस्लामी हिन्द, महिला विंग ने 19 फरवरी से 28 फरवरी तक ‘‘सशक्त परिवार, सश क्त समाज’’ राष्ट्रव्यापी अभियान लॉंच किया

 

नई दिल्ली:  जमाअत इस्लामी हिन्द, महिला विंग 19 फरवरी से 28 फरवरी तक एक राष्ट्रव्यापी अभियान ‘सशक्त परिवार, सशक्त समाज का संचालन कर रही है। अभियान की प्रभारी और महिला विंग की सह-सचिव रहमतुन्निसा ने प्रेस कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि परिवार समाज का बुनियादी निर्माणकारी ब्लॉक् और सभ्यता की नींव है।

वर्तमान सामाजिक परिदृष्य से ज़ाहिर होता है कि प्रत्येक समुदाय की यह बुनियादी सामाजिक इकाई कमज़ोर और विघटन की ओर अग्रसर है। इसी पृष्ठभूमि में जमाअत इस्लामी हिन्द की महिला विंग ने परिवार और घर को मज़बूत करने के लिए जागरुकता लाने, लोगों को वैवाहिक संस्था के बाहर खुशी तलाशने जैसे ख़तरों से सावधान करने, बुज़ुगों के अधिकारों का सम्मान और रक्षा करने और सभी संस्कृति के साझा पारिवारिक मूल्यों पर प्रकाश डालने के लिए इस अभियान का संचालन कर रही है। प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में आयोजित इस कांफ्रेंस को उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान ज़मीनी स्तर पर कुछ कार्यक्रम और आत्मनिरीक्षण जैसी गतिविधयां शामिल हैं।

इनमें कार्नर मीटिंगें, परिवार गेट-टुगेदर, अंतरधार्मिक संवाद, अंतरराष्ट्रीय वेबीनार, वकीलों, परिवार परामर्शदाताओं और प्रशिक्षकों के साथ पैनल डिस्कशन, विशेषज्ञों के साथ प्रतिदिन ऑनलाइन इंटरैक्टिव सत्र, जुमा के दिन धर्मोपदेश, सामूहिक चर्चा, आदि जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय के साथ साथ तमाम लोगों के लिए देषभर में ऐसे कार्यक्रमों का अयोजन प्रस्तावित है। इस विषय की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए सामुदाय के नेताओं, मस्जिद के इमामों और विभिन्न धार्मिक विद्वानों को पत्र भेजे जाएंगे।

इस अभियान की संचालक साइस्ता रफत ने प्रेस कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग ने हाल ही में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा में इज़ाफे की रिपोर्ट पेश की है। अन्य सर्वेक्षण रिपोटों में भी कहा गया है कि घरेलू हिंसा में वृद्धि अपने 10 साल के उच्च रिकार्ड पर है। हिंसा में वृद्धि की जो संख्या बतायी जाती हैं वास्तव में इससे बहुत अधिक होती हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखा जाए कि अधिकारियां के पास केवल 7 फीसद ही मामले मदद के जिए आते हैं। तलाक की दर में वृद्धि हुई है।

पारिवारिक विवादों के जो मामले दर्ज हुए हैं वे अनगिनत हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ मौखिक, शारीरिक, यौन एवं मांसिक हिंसा और दुव्र्यवहार के मामले बेहद आम हैं। हमारे बच्चे, युवा और वरिष्ठ नागरिक भी विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों को सामना कर रहे हैं। युवा आज विवाह और पारिवारिक ज़िम्मेदारियों से बचना चाहता है। वे मातृत्व एवं पितृत्व के बंधन से मुक्ती चाहते हैं।

लिव-इन रिलेशनशिप, समलैंगिकता, अनचाहे गर्भ के गर्भपात के साथ साथ तमाम पारिवारिक और सामाजिक मूल्य प्रणालियों के खिलाफ विद्रोह वर्तमान में एक जीवंत समाज के लिए स्पष्ट खतरा बनते जा रहे हैं। परिवार की मूल स्थिति को बहाल करना और इसे उचित दिशा देना समय की ज़रूरत है।

 

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