#Covid_19 | कोरोना के चलते 10 साल पीछे लौटा जयपुर एयरपोर्ट! विकास कार्यों की गति भी धीमी

#Covid_19 | कोरोना के चलते 10 साल पीछे लौटा जयपुर एयरपोर्ट! विकास कार्यों की गति भी धीमी

जयपुर: कोरोना महामारी के संकट ने एविएशन सेक्टर को एक दशक पीछे धकेल दिया है. जयपुर एयरपोर्ट पर यात्रीभार के मामले में बात करें तो आंकड़े बताते हैं कि यात्रीभार वर्ष 2010 में जितना था, उतना ही अब देखा जा रहा है.

यही कारण है कि फरवरी तक एयरपोर्ट विस्तार के जो प्रोजेक्ट बहुत जरूरी नजर आते थे, वे इन दिनों के हालात देखकर बेमानी से लगते हैं. कोरोना काल से यात्रीभार में गिरावट हुई है, वहीं एयरपोर्ट के विकास कार्यों की गति भी धीमी हुई है.

 

यात्रीभार के जो हालात वर्ष 2010 में दिख रहे थे, वही हालात अब:

जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट जो इस वर्ष फरवरी तक हवाई सेवाओं के लिहाज से देश के टॉप एयरपोर्ट्स में 12वें स्थान पर था. यहां से फ्लाइट्स संचालन के लिहाज से लगातार नए शहरों के लिए एयर कनेक्टिविटी जुड़ रही थी. वहीं यात्रीभार में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही थी. लेकिन मार्च से कोरोना काल शुरू होने पर हवाई सेवाओं का संचालन अत्यधिक कम हो गया है.

जयपुर एयरपोर्ट से मौजूदा समय में फ्लाइट्स की संख्या और यात्रीभार के आंकड़े बताते हैं कि जयपुर एयरपोर्ट एक दशक पीछे चला गया है. यानी यात्रीभार के जो हालात वर्ष 2010 में दिख रहे थे, वही हालात अब हैं. जबकि इसी साल फरवरी तक यात्रीभार के आंकड़े काफी अधिक थे और नए टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण एयरपोर्ट प्रशासन की पहली प्राथमिकता थी.

वर्ष 2020 अब पूरा होने जा रहा है, ऐसे में यदि इस साल की एयरपोर्ट की उपलब्धियों को देखें तो सामने आएगा कि यहां नया डिर्पाचर हॉल शुरू हो चुका है. 15 फरवरी 2020 को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन अरविन्द सिंह ने नए डिपार्चर हॉल का उद्घाटन किया था.

10 साल पहले कहां था जयपुर एयरपोर्ट, अब कहां...

- वर्ष 2010 के नवंबर में जयपुर एयरपोर्ट से यात्रीभार 155300 था

- वर्ष 2011 के नवंबर में यात्रीभार 175519 था

- वर्ष 2020 के नवंबर में यात्रीभार 158198 रहा है

- वर्ष 2019 में नवंबर में यात्रीभार 483435 रहा था

- यानी पिछले वर्ष की तुलना में यात्रीभार में गिरावट 67.28 फीसदी रही है

- वर्ष 2010 से 2019 तक यात्रीभार में उछाल 3 गुना से अधिक था

- यदि यही रफ्तार रहती तो इस वर्ष नवंबर में यात्रीभार 5 लाख से अधिक होता

यह तो बात हुई कोरोना के चलते एयरपोर्ट पर यात्रीभार में गिरावट की. अब बात करते हैं एयरपोर्ट से जुड़े विकास कार्यों की. जयपुर एयरपोर्ट पर इस वर्ष 2 कार्य प्रमुखता से किए गए हैं. पहला कार्य टर्मिनल-2 के डिपार्चर हॉल का निर्माण पूरा कर इसे आमजन के लिए खोल दिया गया.

हालांकि यात्रीभार की कमी की वजह से यह यात्रियों के उपयोग में नहीं आ पा रहा है. वहीं टर्मिनल-1 पर रिनोवेशन कार्य भी तेजी से पूरा किया जा रहा है. एयरपोर्ट प्रशासन टर्मिनल-1 को जल्द शुरू करना चाहता है. दरअसल फरवरी 2020 तक यात्रीभार में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी और ऐसे में टर्मिनल-2 यात्रियों के लिए छोटा पड़ने लगा था.

इसी को देखते हुए इंटरनेशनल फ्लाइट्स को टर्मिनल-1 से शुरू करने की योजना बनाई गई थी. इस वर्ष कोरोना महामारी की विषम परिस्थितियों के बावजूद टर्मिनल-1 के रिनोवेशन को तेज गति से पूरा किया जा रहा है. यह टर्मिनल निर्माण पूरा होने के बाद फरवरी 2021 से इसे शुरू किया जा सकता है.

कितनी है क्षमता, अब क्या विकास जरूरी ?
- जयपुर एयरपोर्ट के मौजूदा टर्मिनल-2 का निर्माण वर्ष 2009 में हुआ

- वर्ष 2014 में ही यात्री क्षमता 20 लाख से अधिक हो चुकी थी

- नई टर्मिनल बिल्डिंग की अधिकतम क्षमता 20 लाख यात्रियों की थी

- बिल्डिंग का क्षेत्रफल है करीब 18 हजार वर्गमीटर

- अगले 10 साल के लिए मौजूदा बिल्डिंग को करीब 4 गुना बढ़ाना जरूरी

- एयरपोर्ट अथॉरिटी ने वर्ष 2017 में नई टर्मिनल बिल्डिंग का प्लान तैयार किया था

- 1 लाख 25 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में 2 नए टर्मिनल निर्माण की थी योजना

- जर्मनी की कम्पनी डॉर्श कंसल्टेंट इंडिया ने प्राईमरी रिपोर्ट तैयार की थी

- लेकिन वर्ष 2019 में प्राईवेटाइजेशन होने से एयरपोर्ट का विस्तार अटक गया
- विस्तार के तहत मौजूदा बिल्डिंग से 6 गुना से भी अधिक बड़ी होगी

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