गाज़ा पर इज़राइली ज़मीनी हमला: स्वास्थ्य तंत्र ध्वस्त, 8 लाख से अधिक लोग फंसे, वैश्विक समुदाय पर बढ़ा दबाव
गाज़ा शहर में इज़राइली सेना के बड़े पैमाने पर किए गए ज़मीनी हमले ने पहले से ही गंभीर मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है। 16 सितंबर को शुरू हुई इस कार्रवाई के बाद से स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हैं, भोजन और पानी की किल्लत बढ़ गई है और लाखों नागरिक लगातार गोलाबारी के बीच अपनी जान बचाने को मजबूर हैं।
भीषण ज़मीनी घुसपैठ और लगातार बमबारी
मंगलवार को इज़राइली सेना ने 98वीं और 162वीं डिवीजन की अगुवाई में गाज़ा शहर में बड़े पैमाने पर प्रवेश किया। दो रातों से उत्तर और दक्षिण-पूर्वी इलाक़ों पर लगातार भीषण हवाई बमबारी जारी है। अल-ज़ैतून, अल-सबरा, शेख़ रदवान, अल-दारज, अल-तुफ़्फ़ाह और अल-शुजाइया जैसे घनी आबादी वाले मोहल्लों पर बम गिराए जा रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आसमान ड्रोन से भरा है, जो घरों और अस्थायी टेंटों पर अंधाधुंध गोलीबारी कर रहे हैं ताकि लोग पश्चिम की ओर भागें।
8 लाख से अधिक नागरिक घिरे
गाज़ा सरकार के मीडिया कार्यालय के मुताबिक़ 8 लाख से अधिक लोग शहर में फंसे हैं। सुरक्षित रास्तों की अनुपलब्धता और आर्थिक मजबूरी ने हालात और खराब कर दिए हैं। दक्षिणी इलाक़ों तक जाने का खर्च पाँच हज़ार डॉलर से अधिक है, जो रोज़गार गंवा चुके अधिकांश परिवारों के लिए असंभव है। विस्थापित लोग पश्चिमी गाज़ा के शाती शरणार्थी कैंप, अल-रशीद स्ट्रीट और अल-रिमाल इलाक़े में अत्यंत दयनीय हालात में रह रहे हैं, जहां न पर्याप्त भोजन है और न ही शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं।
स्वास्थ्य प्रणाली का पतन
इज़राइली सेना ने कमाल अदवान, अल-आवदा और अल-अहली अरब (बैपटिस्ट) अस्पतालों को जबरन बंद करवा दिया है। अल-शिफ़ा अस्पताल मात्र 20 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रहा है और केवल प्राथमिक उपचार दे पा रहा है। सर्जरी, आंतरिक चिकित्सा, जलन और प्रसूति विभाग लगातार बमबारी के कारण ठप पड़े हैं। अल-क़ुद्स अस्पताल अब हजारों विस्थापितों का अस्थायी शरणस्थल बन चुका है। गाज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि आवश्यक दवाओं और मेडिकल सामग्री की भारी कमी के चलते पूरा स्वास्थ्य तंत्र ढहने के कगार पर है।
जारी नाकाबंदी और भुखमरी
2 मार्च से इज़राइल ने गाज़ा की सभी क्रॉसिंग बंद कर दी हैं। मानवीय राहत के ट्रक सीमा पर खड़े हैं, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं मिल रहा। इस नाकाबंदी ने पूरे क्षेत्र को गंभीर भुखमरी की ओर धकेल दिया है।नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 65,000 लोग अब तक मारे जा चुके हैं, 1.65 लाख घायल हैं और 9,000 से अधिक लापता हैं। दो मिलियन से अधिक लोग जबरन विस्थापन में जीवन बिता रहे हैं।
पत्रकार भी निशाने पर
फिलिस्तीन इंटरनेशनल फ़ोरम फ़ॉर मीडिया एंड कम्युनिकेशन ने दावा किया है कि अब तक 250 से अधिक पत्रकार अपनी जान गंवा चुके हैं। संगठन ने कहा कि यह न केवल ज़मीनी बल्कि सूचना युद्ध भी है, जिसका उद्देश्य सच्चाई को छिपाना है।
वैश्विक समुदाय से अपील
फ़ोरम ने दुनिया भर के मीडिया से ज़िम्मेदाराना और सतत कवरेज की अपील की है, ताकि अंतरराष्ट्रीय जागरूकता बढ़े और निर्णयकर्ताओं पर दबाव बनाया जा सके। बयान में कहा गया है कि गाज़ा सिर्फ़ फ़िलिस्तीनियों की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की धरोहर है—यहां हजारों साल पुरानी मस्जिदें, चर्च और ऐतिहासिक स्थल हैं जिनका विनाश पूरी सभ्यता के खिलाफ अपराध है।
अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा
फ़ोरम ने चेताया कि गाज़ा की तबाही सिर्फ़ मध्य-पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय तंत्र और कानून के लिए गंभीर खतरा है। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के आदेशों की अवहेलना से वैश्विक क़ानून और संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
निष्कर्ष
गाज़ा में जारी ज़मीनी हमले, नाकाबंदी और मानवीय संकट ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक समुदाय ने त्वरित कदम नहीं उठाए, तो यह त्रासदी न केवल मध्य-पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की शांति और सुरक्षा के लिए स्थायी खतरा बन जाएगी।निर्दोष नागरिकों की जान बचाने और अंतरराष्ट्रीय क़ानून को प्रभावी बनाने के लिए वैश्विक हस्तक्षेप अब अत्यंत आवश्यक हो गया है।

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