क्या कट्टरवाद के बीच कोरोना से जंग संभव है?

धर्मिक कट्टरता के कारण देश में घटी हैं कई घटनाएं

By राजदीप सिंह 

भारत देश की गिनती दुनिया के उन चुनिंदा देशों में हो रही है जो कोरोना वायरस से जंग लड़ने के साथ-साथ उससे निपटने की भी क्षमता रखता है।

इसके पूर्व हमने देखा है कि हमारे देश ने विभिन्न तरह की महामारियों एवं बीमारियों से लड़ाई लड़ी है जिसकी तारीफ पूरे विश्व में विभिन्न संगठनों द्वारा की जाती रही है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी माना है कि भारत वह देश है जो कोरोना वायरस को हराने की क्षमता रखता है लेकिन वर्तमान में हमारा देश केवल कोरोना वायरस से ही नहीं, बल्कि इसके साथ-साथ ‘कट्टरवाद’ से भी लड़ रहा है।

धर्मिक कट्टरता के कारण देश में घटी हैं कई घटनाएं

लगातार कुछ महीनों से सोशल मीडिया एवं अन्य मनोरंजन के साधनों पर धर्म के नाम पर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप जारी है।

धर्म के नाम पर देश को बांटने का काम तेज़ी से किया जा रहा है। पूर्व में हुई घटनाएं काफी निंदनीय एवं शर्मसार करने वाली हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम किसी भी धर्म पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करें।

हर धर्म के कुछ ना कुछ अपवाद होते हैं, तो क्या उनके कारण सारी कौम को कुसूरवार ठहराना उचित है? कभी जमातियों को लेकर तंज कसे जा रहे हैं, तो कभी साधुओं की निर्मम हत्या को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाए जा रहे हैं।

कट्टरता ने लोगों के दिमाग में घर कर लिया है

यह कट्टरवाद लोगों के दिमाग में इस तरह फैल गया है कि हर घटना में धर्म की बात करना, एक-दूसरे पर आरोप लगाना, धर्म को गाली देना और जब कुछ ना बचे तो देशद्रोही कह देना आम बात हो चली है।

आखिर कोई इतनी घृणा कैसे फैला सकता है? विषय या मुद्दा कोई भी हो लेकिन बिना धर्म की बात किए लोगों का मन नहीं भरता है।

कानून हाथ में लेने वाली भीड़ में क्यों बदलते जा रहे हैं लोग?

इन मामलों में जिसने गलती की है उसे सज़ा देने के लिए देश का कानून है फिर हम कौन होते हैं किसी को देशद्रोही ठहराने वाले? सज़ा देने वाले और किसी के धर्म का अपमान करने वाले हम आखिर होते कौन हैं?

इन घटनाओं के पीछे जो भी ज़िम्मेदार हैं, चाहे वे किसी भी धर्म से हों, उन्हें सज़ा मिलनी ही चाहिए लेकिन क्या इस तरह धर्म के नाम पर ज़हर घोलना सही बात है?

आखिर कौन हैं ये लोग, जो देश को तोड़ने का काम कर रहे हैं। हम सभी शिक्षित हैं, हमें अफवाहों से बचना चाहिए और जानकारी की पुष्टि होने के बाद ही किसी भी निर्णय पर पहुंचना चाहिए।

लेकिन आधी जानकारी और आधे-अधूरे ज्ञान से इस कट्टरवाद ने लोगों के दिमाग में घर कर रखा है। यह कट्टरवाद काफी खतरनाक है। इसका अंत अतिआवश्यक है, क्योंकि आज तक हमारे देश ने जितनी भी बड़ी-बड़ी महामारियों एवं बीमारियों को हराया है, इसकी वजह थी ‘हमारी एकजुटता’। उसी एकजुटता की आवश्यकता अभी देश को है।

कोरोना से जंग भारी है

अब हिन्दुस्तान ने ठानी है।

मिल-जुलकर हम सामना करेंगे,

अब हारने की बारी थारी है।

 

Courtesyhttps://www.youthkiawaaz.com/2020/05/religious-hatred-in-the-name-of-corona-virus-hindi-article/

0 comments

Leave a Reply