क्या जनसंख्या विधेयक का मुखर विरोध करना सिर्फ मुसलमानों की ही जिम्मेदारी है ?

यह मौक़ा बीजेपी की चालों को समझ कर खामोश रहकर जवाब देने का है

जनसंख्या नियंत्रण विधयक  रुपी गेंद बीजेपी देश की जनता के सामने डाले जा रही है और  सामने खड़ी जनता की भीड़ में सिर्फ मुस्लमान  ही अकेले उछल उछल कर  सभी गेंद धड़ा धड़  कैच किये जा रहे हैं

नई दिल्ली : (एशिया टाइम्स / अबू अनस की रिपोर्ट  )

कोरोना की दूसरी लहर को काबू में करने  में बुरी तरह नाकाम बीजेपी सरकार के होश उड़ गए हैं . उत्तर प्रदेश चुनाव में हार का डर अभी से  भूत बन कर परेशान कर रहा है.

इसी लिए पहले कोरोना जेहाद , फिर लव जिहाद , धर्मांतरण को रोकने की मुहिम  और अब जनसंख्या नियंत्रण विधयक  रुपी गेंद बीजेपी देश की जनता के सामने डाले जा रही है और  सामने खड़ी जनता की भीड़ में सिर्फ मुस्लमान   ही अकेले उछल उछल कर  सभी गेंद धड़ा धड़  कैच किये जा रहे हैं बाकि लोग उनके कामयाब कैच पकड़ने पर जोर दार ताली बजा रहे हैं .

अच्छी बात यह है कि इस समय मुसलमानों का युवा वर्ग अब ऐसी चालों को खूब समझने लगा है , और  मुसलमानों को इस में उलझने से दूर रहने की सलाह देते देखा जा सकता है .

बिहार के सीनियर जर्नलिस्ट  शहनवाज़ बदर कासमी कहते हैं “बीजेपी की इस चाल का जवाब मुसलमान खामोश रह कर दें तो ज्यादा बेहतर होगा , वह हमें उलझाना चाहते हैं और हम उनका निवाला बन रहे हैं , बीजेपी को इस से धुर्विकरण का पूरा मौक़ा मिल रहा है , यह मौक़ा बीजेपी की चालों को समझ कर खामोश रहकर जवाब देने का है  . आप ज़रा देर चुप रह लें फिर देखें बीजेपी का हिसाब खुद उनके अपने लोग ही कर देंगे शहनवाज़  कहते हैं अजीब बात है हमारे दरम्यान से जब जवाब देने का सिलसिला शुरू होता है तो हर व्यक्ति और संगठन अपनी ज़िम्मेदारी मान बैठता  है . जो लोग आप के खिलाफ चाल चलते हैं उनकी चालों को समझना और समय आने पर ही जवाब देना अकलमंदी है और जम्हूरियत में खामोश जवाब देने का समय हर 5 साल में आप को मिलता है “.

साफ़ ज़ाहिर है कि बीजेपी मुसलमानों को उत्तेजित करना उन्हें भडकाना और उन्हे सड़कों पर ला खड़ा करना चाहती है और इस से हिन्दू  वोटरों  को  यह सन्देश देना चाहती है कि हम देश के मुसलमानों को सबक सिखा रहे हैं .

‘ग्रेट इंडिया फाउंडेशन’ के चेयरमैन ‘नूरुल्लाह खान’ का कहना है कि “ मुसलमानों का हर मामले में सबसे पहले बयान देना और हर मुद्दे को अपना लेना मुनासिब नहीं है . जहां बोलना ज़रूरी होता है वहां तो ख़ामोशी होती है. यह कोई नया नहीं है हर बार इलेक्शन से पहले ऐसा होता रहा है , बयान देकर हम खुद को सबसे बड़े मुखालिफ बन जाते हैं और फिर जहां कुछ करने की बारी आती है तो सो जाते हैं . इस पर सभी मुस्लिम रहनुमाओं को सोचना चाहिए “.  

यही फार्मूला बीजेपी को वोट मिलने में काम आता रहा है काश देश का पिछड़ा और बहुजन हिन्दू समाज बीजेपी की इस चाल को समझ पाता की यह तो सही मायनों में  दलित और पिछड़ा विरोधी कानून है और बड़ी चालाकी से सवर्णों ने इसे ‘मुसलमानों  ’ के सिर मढ़ दिया है काश ‘मुस्लमान ’ यह समझ पाते कि देश रुपी ग्राउंड  में जब 135 करोड़ भारतीय फील्डिंग करने खड़े हैं तो वही  अकेले दौड़ दौड़ कर सारे ग्राउंड में  ‘कैच’ क्यों पकड़ें  बाकी सब क्यों सिर्फ ताली  बजाए जा रहे हैं ,क्या जनसंख्या कानून का मुखर विरोध करना  सिर्फ मुसलमानों की  ही जिम्मेदारी है ?

क्या मुस्लमान  कुछ देर के लिए अपना दरवाज़ा बंद नहीं कर सकते ,अगर ऐसा हो जाये तो फिर देखिये गा बीजेपी को उसकी ही भाषा में देश का दलित और पिछड़ा समाज जवाब दे देगा .मुसलमानों  प्लीज तुम कुछ देर के लिए पीछे हट कर भी देख लो ना  . 

 

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