'मुस्लिम बुद्धिजीवी परिषद नई दिल्ली में 2024 की अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया
नई दिल्ली : (एशिया टाइम्स)
मुस्लिम बुद्धिजीवी परिषद 10 से 18 फरवरी तक नई दिल्ली पुस्तक मेले में लगातार दूसरी बार एक विशेष स्टाल में भाग ले रही है। आगंतुकों की संख्या की दृष्टि से यह पुस्तक मेला क्षेत्र के सबसे बड़े मेलों में से एक है। जिसका उद्देश्य शांति के संदेश को बढ़ावा देना, संवाद और सहिष्णुता के मूल्यों को मज़बूत करना तथा धर्म और राष्ट्रीयता में मतभेदों के बावजूद लोगों के बीच सहयोग के बंधन को दृढ़ करना है। इसलिए, परिषद अपने स्टाल में 5 अलग-अलग भाषाओं में 220 से अधिक प्रकाशन प्रस्तुत करती है, ये पुस्तकें महत्वपूर्ण बौद्धिक विषयों और चर्चाओं पर आधारित हैं और इनका उद्देश्य ग़लतफ़हमियों को दूर करना और उग्रवाद और घृणित विचारधाराओं को ख़ारिज करना है।
इस वर्ष परिषद द्वारा हिंदी, मलयालम और उर्दू अनुवाद के साथ प्रकाशित सोलह (16) पुस्तकें इस विश्व पुस्तक मेले की विशेष सजावट बनने जा रही हैं। इसके अलावा, दिवंगत लेखक डॉ. महमूद हमदी ज़क़ूज़ूक़ की पुस्तक "धार्मिक विचार और समकालीन मुद्दे" और मुस्लिम विद्वानों की परिषद के महासचिव महामहिम मुहम्मद अब्दुस्सलाम की महत्वपूर्ण कृति "इमाम, पोप एवं संकट भरी राहें: मानव भाईचारे का उदय” भी भारत की तीन अन्य राष्ट्रीय भाषाओं (उर्दू, हिंदी और मलयालम) में अनुवाद के साथ अरबी-वांगारेसी संस्करणों के साथ भी प्रदर्शित किए जाएंगे।इसी प्रकार, नई दिल्ली में आयोजित इस अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले में “मुस्लिम बुद्धिजीवी परिषद” अपने स्टाल में तीनों भारतीय भाषाओं (उर्दू, हिंदी, मलयालम) में छह (6) अन्य पुस्तकें प्रस्तुत कर रही है। जिसे परिषद के अध्यक्ष महामहिम ग्रांड इमाम शैख़ अल-अज़हर, डॉ. अहमद अल-तय्यब ने लिखा है। जिनमें उर्दू भाषा में "आतंकवादी विचारधारा के खिलाफ़ अल-अज़हर की लड़ाई" और “अल-अज़हर और मुस्लिम एकता”, हिंदी और उर्दू में “जिहाद का अर्थ”, उर्दू और मलयालम में “युवाओं को संबोधन”, उर्दू में “पूर्व के साथ वार्तालाप के संदर्भ में हमारा दृष्टिकोण”, तथा मलयालम और उर्दू में "शांति पर चर्चा” जैसी किताबें शामिल हैं।
“मुस्लिम बुद्धिजीवी परिषद” मंडप प्रदर्शनी में अपनी भागीदारी के इन सभी दिनों में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम और बौद्धिक सेमिनार भी आयोजित करती है। जिनमें "वर्तमान युग में मानव भाईचारे का महत्व" शीर्षक से एक संगोष्ठी है, जिसमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पश्चिम एशिया और खाड़ी मुद्दों की शोधकर्ता डॉ. समीना हमीद, पारसी धर्म के प्रमुख आवा खोला व्याख्यान देंगे। सिंडीकेट ऑफ जर्नलिस्ट्स के महासचिव संजय कपूर भी अपना बहुमूल्य व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। परिषद "इंटरफेथ सह-अस्तित्व: शांतिपूर्ण जीवन के संदर्भ में कुछ बातें" के शीर्षक के अंतर्गत एक दूसरी संगोष्ठी का आयोजन करेगी, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के समाजशास्त्री प्रोफेसर डॉ. आनंद कुमार और इंटरफेथ फ्रेंडशिप फोरम के महासचिव डॉ. इंजीनियर सलीम अहमद भी अपने व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। 'धर्मों के बीच सम्मान' विषय पर तीसरा सेमिनार होगा, जिसमें राष्ट्रीय सहारा अख़बार एवं सहारा टीवी के पूर्व प्रधान संपादक फैसल अली और इंस्टीट्यूट ऑफ हार्मनी एंड पीस के संस्थापक निदेशक फादर एमडी थॉमस व्याख्यान देंगे। जबकि चौथा सेमिनार "विश्व एक परिवार है और सभी धर्म सद्भावना सिखाते हैं" शीर्षक से आयोजित होगा, जिसमें हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जसपाल सिंह और नई दिल्ली में इस्लामिक स्टडीज सेंटर के निदेशक डॉ. ज़िकरुर्रहमान भी भाग लेंगे, तथैव अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन के प्रोफेसर और मध्य पूर्व अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रोफेसर डॉ. पी. आर. कुमार स्वामी भी अपने बहुमूल्य व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे।
हॉल नंबर 4 में अपने स्टॉल नंबर H05 पर, “मुस्लिम बुद्धिजीवी परिषद” ने अपने कई हालिया प्रकाशन प्रस्तुत किए हैं जो इस साल की शुरुआत में प्रकाशित हुए थे और क़ाहिरा अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले में इनकी काफी मांग थी, जो मेला इसी महीने की 6 तारीख़ को खत्म होआ है। इनमें से कई पुस्तकें अकादमिक विज़न श्रृंखला में अपनी हैसियत मनवाने में सफ़ल रही हैं। उनमें "हिंसा और सुरक्षा की सही समझ", नासिर अल-बाज़ाती की "पश्चिमी पुनर्जागरण में मुस्लिम विचार का आधार", साथ ही "इस्लामिक दुनिया में सुरक्षा पहचान का विकल्प" और "अंडालुसिया में मुस्लिम और ईसाई के बीच परिचय का उतार चढ़ाव” इसके अलावा अहया-उल-तुरास की सीरीज़ भी शामिल हैं। जिनमें ‘मुस्लिम विद्वानों की परिषद’ के अध्यक्ष, शैख़ अल-अज़हर, महामहिम इमाम अकबर, प्रोफेसर डॉ. अहमद अल-तय्यब की दो पुस्तकें, "प्राचीन फ़िलासफ़ी के अध्ययन पर प्रारंभिक चर्चा" और "उम्मुल मोमिनिन सैय्यदा आइशा", सुलेमान ख़मीस की किताब "विद्वान जाहिज़ की हक़ीक़त", सुलैमान दुनिया की किताब "धर्म और बुद्धि", मुहम्मद बिन मुस्तफ़ा अल-जज़ाइरी की "महिला अधिकारों के बारे में चिंता" तथा ग़ादह अब्दुल जलील अल-ग़ुनैमी की “बहुलवाद और दूसरे को स्वीकार करना” जैसी किताबें विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।जहाँ तक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और सेमिनारों के शोध पत्रों, निबंधनों और परिणामों पर आधारित प्रकाशनों का सवाल है, परिषद ने इस संबंध में कई मूल्यवान संकलन भी तैयार किए हैं। जिनमें "अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी कार्यवाही: इस्लाम और पश्चिम, विविधता और एकता", "यरूशलेम के समर्थन में अल-अज़हर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन" और "मानव सह-अस्तित्व के लिए पूर्व और पश्चिम के बीच संवाद" शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि परिषद लगातार दूसरी बार नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले में विशेष मंडप में भाग ले रही है। पिछले वर्ष 2023 में पहली भागीदारी को भारतीय समाज के सभी वर्गों द्वारा स्वागत किया गया था, सभी ने परिषद के प्रकाशनों तथा इसके तत्वावधान में आयोजित सांस्कृतिक एवं बौद्धिक कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों की सराहना की थी। जिससे परिषद को बड़ी प्रेरणा मिली और उसने इस मेले में पुनः प्रवेश किया और आगंतुकों को एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियों से लाभान्वित होने का सुनहरा अवसर दिया।

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