भारत और ब्रिटेन रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेंगे
ब्रिटेन की 2020 के आखिर तक यूरोपीय संघ से अलग होने की पूरी तैयारी है। ऐसे में ब्रिटेन अब पश्चिम से अलग अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने के प्रयास कर रहा है।
ब्रिटेन की 2020 के आखिर तक यूरोपीय संघ से अलग होने की पूरी तैयारी है। ऐसे में ब्रिटेन अब पश्चिम से अलग अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने के प्रयास कर रहा है।
डिजिटल बैठकों से आगे बढ़ते हुए कोविड महामारी में भी ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक राब का भारत दौरा यह संकेत करता है कि भारत से सम्बन्धों को मजबूत करने के लिए ब्रिटेन कितना इच्छुक है। श्री राब ने इस बात की भी पुष्टि की कि आगामी गणतन्त्र दिवस परेड 2021 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन मुख्य अतिथि के रूप सम्मिलित होंगे। भारत और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत 2004 से हुई। यह उल्लेखनीय है कि यूरोपीय संघ से अलग होने बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का पहला विदेशी दौरा भारत में ही होने वाला है। भारत-ब्रिटेन मंत्रीस्तरीय संवाद के अंतर्गत भारतीय विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की और 5 क्षेत्रों लोगों से लोगों के बीच संपर्क, व्यापार एवं संपन्नता, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु एवं स्वास्थ्य में सहयोग मजबूत करने की संभावनाओं का पता लगाया गया।

दोनों पक्षों ने महत्वकांक्षी 10 वर्षीय भारत ब्रिटेन रोड मैप की घोषणा की। इस संदर्भ में डॉक्टर जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों में लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था, बाजार आधारित अर्थव्यवस्था और बहुलतावादी समाज के चलते नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए हम बदलाव ला सकते हैं। हमें ऐसा करना चाहिए और हम ऐसा करेंगे। बैठक में कोविड-19 के बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने समेत अफगानिस्तान में वर्तमान हालात, मध्य पूर्व तथा हिंद प्रशांत क्षेत्र में वर्तमान परिस्थितियों पर भी चर्चा की गई।
ब्रिटेन भी उन यूरोपीय देशों की सूची में अब शामिल हो गया है जिन्होंने हाल ही में हिंद प्रशांत नीति को बढ़ावा देना शुरू किया है। विदेश मंत्री राब ने कहा कि उनके देश के लिए हिंद प्रशांत अब सर्वोच्च प्राथमिकता में रहेगा जिसमें सामुद्रिक सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला के मुद्दे शामिल होंगे और ब्रिटेन भारतीय नौसेना के हिंद महासागर क्षेत्र में सूचना केंद्र पर एक जन संपर्क अधिकारी की नियुक्ति करेगा। इसका उद्देश्य सामुद्रिक परिस्थितियों के प्रति जागरूक रहना है। डॉक्टर जयशंकर ने कहा कि हिंद प्रशांत की परिकल्पना भारत के लिए भूमंडलीकरण को और मजबूती देना है। श्री राब ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और भारत के पर्यावरण तथा शिक्षा मंत्रियों से भी मुलाकात की। दोनों पक्ष अकादमिक अभियोग्यता की पारस्परिक मान्यता के लिए भी सहमत हुए।
भारत और ब्रिटेन दोनों ही देश आगामी वर्षों में नेतृत्व की भूमिका की तरफ देख रहे हैं। भारत जनवरी 2021 से दो वर्षों के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का चयनित सदस्य बनेगा और ऐसे में भारत ब्रिटेन के साथ काम करना जारी रखेगा। समान रूप से ब्रिटेन जी-7 और संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन की अध्यक्षता भी कर रहा है, यह भी पारस्परिक संबंधों में संवर्धन करेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जी-7 सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया गया है। ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन आईएसए और आपदा रोधी बुनियादी ढांचे से जुड़े संगठन में भारत के नेतृत्व की भूमिका को स्वीकारा। दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते के माध्यम से आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी सहमत हुए। तकनीकी के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर श्री राब ने जोर दिया कि रक्षा और सुरक्षा साझेदारी, साइबर सुरक्षा, टेलीकॉम नेटवर्क, 5G नेटवर्क ऐसे प्रमुख क्षेत्र होंगे जिन को और अधिक सुरक्षित तथा टिकाऊ बनाए जाने की आवश्यकता है।
दोनों देशों के संबंधों पर जोर डालते हुए ब्रिटिश विदेश मंत्री ने कोविड-19 महामारी पर साझेदारी के महत्वपूर्ण बिंदुओं को उल्लेखित किया और वैक्सीन उत्पादन के संबंध में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी तथा एस्ट्राज़ेनेका के साथ सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। यह साझेदारी और सहयोग को और लाभकारी बनाएगा क्योंकि दोनों पक्ष निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में निवेश करने हेतु संकल्पबद्ध हैं जिससे इन देशों को कोविड-19 रोधी टीका मिलेगा और लाखों की संख्या में लोगों को सस्ते दर पर स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध हो सकेगी।
श्री राब ने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुनिया में सबसे ज्यादा जोखिम वाले और गरीब देशों को भी समान रूप से और सहज ही टीका उपलब्ध हो सके। ऑक्सफोर्ड द्वारा विकसित किया गया टीका विश्व स्वास्थ्य संगठन की साझेदारी से वैश्विक पहल कोवैक्स के माध्यम से विश्व के गरीब देशों को उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई में सहयोग को और बढ़ाने के लिए भारत-ब्रिटेन ने एक नए वर्चुअल वैक्सीन हब शुरू किए जाने की घोषणा की है। वैक्सीन के राष्ट्रीयकरण की संभावनाओं के बीच ब्रिटेन और भारत ने टीका उत्पादन के लिए जिस प्रकार से साझेदारी शुरू की है इसे दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग और टीका उत्पादन में संयुक्त प्रयासों के संदर्भ में अच्छे स्वरूप में देखा जा सकता है। यह दौरा इस बात का साफ संकेत है कि यूरोपीय संघ से अलग होने का समय नजदीक आने पर ब्रिटेन ने भारत को प्राथमिकता पर रखा है। दोनों देशों ने अगले एक दशक में आपसी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किए जाने का एजेंडा तय कर लिया है।
आलेख: प्रोफेसर उम्मू सलमा बावा, यूरोपीय अध्ययन केंद्र, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय
अनुवाद एवं स्वर: देवेंद्र त्रिपाठी
नोट : यह लेख आल इंडिया रेडियो के विदेश सेवा प्रभाग की वेबसाइट से लिया गया है

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