भारत और अफ्रीका का स्वास्थ्य सम्मेलन

भारत सरकार, इथियोपिया, अफ्रीकी संघ और अन्य साझेदारों ने भारत और अफ्रीका स्वास्थ्य सम्मलेन का आयोजन किया। भारत के केन्द्रीय स्वास्थ्य परिवार एवं कल्याण मंत्री और विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी मंडल के अध्यक्ष डॉ. हर्षवर्धन, भारत के विदेश और संसदीय मामलों के राज्य मंत्री श्री वी मुरलीधरन, इथियोपिया सरकार की स्वास्थ्य मंत्री डॉ. लिया ताडासे, अफ्रीकी संघ आयोग से सामाजिक मामलों की मंत्री अमीरा एल्फाडिल, भारत और अफ्रीका मिशन में डीन आलेम त्सेहए वोलेमरियम और भारत, इथियोपिया तथा अफ्रीकी संघ के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया।

साझे मूल्यों, उपनिवेशवाद के विरुद्ध संघर्ष और लोगों के बीच सदियों पुराने संबंधों की वजह से भारत का अफ्रीकी देशो के साथ ख़ास संबंध रहा है। भारत की स्वाधीनता के बाद अफ्रीकी देशों के साथ भारत के रिश्तों में बहुत बदलाव आया और क्षेत्रीय तथा वैश्विक संदर्भों में लंबी साझेदारी से ये संबंध और भी मज़बूत हुए। आज भारत और अफ्रीका के विकासशील देश कोविड-19 महामारी का सामना कर रहे हैं जिसका असर ना सिर्फ़ लोगों के जीवन पर पड़ रहा है बल्कि उनकी आजीविका भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

कोविड-19 महामारी ने विशेष तौर से स्वास्थ्य क्षेत्र के साथ सभी क्षेत्रों में आपूर्ति शृंखला में विविधता और लचीलापन लाने के महत्व को रेखांकित किया है। इसने देशों को अपनी स्वास्थ्य देखभाल संरचना की ज़रूरतों का आकलन करने, दवाओं की उपलब्धता और मूल्यों पर ध्यान देने और बेहद ज़रूरी चिकित्सा देखभाल उत्पादों की आपूर्ति शृंखला में लचीलापन विकसित करने के लिए प्रेरित किया है। दुनिया ने ये भी महसूस किया है कि अब और अधिक विश्वसनीय तथा सक्षम पक्षों की ज़रूरत है। पूरी दुनिया को एक परिवार मानने वाले वसुधैव कुटुंबकम के प्राचीन दर्शन में भरोसा करने वाला भारत एक ज़िम्मेदार साझेदार की भूमिका निभाने की क्षमता भी रखता है और इच्छुक भी है।

महामारी के बावजूद बढ़ती वैश्विक माँग को पूरी करने के लिए भारत तेज़ी से अपने औषधि उत्पादन को बढ़ाने में कामयाब रहा। हमने 35 अफ्रीकी देशों समेत 150 देशों को दवाएँ भेजीं और मुश्किल में फँसे अपने मित्र देशों में चिकित्सा दल भी भेजे। ज़रूरत में फँसे देशों की आगे बढ़कर मदद करने की वजह से भारत को आज दुनिया का औषधालय माना जा रहा है।

भारत दुनिया के साथ विशेष रूप से अफ्रीका के साथ इस दिशा में गठजोड़ करने के लिए तैयार है। भारत अफ्रीका के साथ सक्रियता में स्वास्थ्य सेवाओं को एक महत्वपूर्ण कारक मानता है। भारत अपने अफ्रीकी साझेदारों की प्राथमिकता को समझता और सराहता है। भारत एजेंडा 2063 के अंतर्गत अपेक्षाकृत अधिक सक्षम, सतत विकास वाले सम्पन्न अफ्रीका को देखना चाहता है। सतत विकास लक्ष्य 3 और एजेंडा 2063 का लक्ष्य कम क़ीमत वाली अधिक गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध करवाकर 2063 तक सभी नागरिकों का कल्याण और अच्छी सेहत सुनिश्चित करना है।

भारत भी इस सतत विकास लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध है और भारत की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में रेखांकित अच्छी गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवा भारत और अफ्रीका की विकासीय साझेदारी को अहमियत देती है जिसमें उन क्षेत्रों में काम किया जाएगा जहाँ अफ्रीका की स्वास्थ्य देखभाल ज़रूरतों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त भारतीय अनुभव और उपचार की आवश्यकता हो।

भारत अफ्रीका सम्मेलन-तीन के सामरिक दृष्टिकोण को स्वास्थ्य क्षेत्र में संरचनात्मक साझेदारी के माध्यम से आगे ले जाने के लिए भारत के विदेश मंत्रालय ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के साथ मिलकर 2016 में पहली भारतीय-अफ्रीकी स्वास्थ्य विज्ञान बैठक आयोजित करवाई थी।

भारत के विदेश मंत्रालय ने 2009 में पूरे अफ्रीका में 542 करोड़ रुपए लागत की एक ई-नेटवर्क परियोजना जारी की थी। इस परियोजना के अंतर्गत उपग्रह और फ़ाइबर ओप्टिक संपर्कों के ज़रिए ई-नेटवर्क द्वारा भारतीय संस्थानों को अफ्रीका के 53 देशों से जोड़ा जाना था और उन्हें टेली शिक्षा तथा टेली चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध करवानी थीं। ये परियोजना टेलीकम्यूनिकेशन्स कंसल्टैंट्स भारत लिमिटेड के साथ समझौता करने वाले 48 देशों में आरम्भ की जा चुकी है। इस कार्यक्रम का पहला चरण 2017 में पूरा हो गया था और अब हम दूसरे चरण में पाँच वर्षों के अंदर 1500 वज़ीफ़े प्रदान कर रहे हैं। इन परियोजनाओं को नया नाम ई-विद्याभारती और ई-आरोग्यभारती नेटवर्क परियोजना दिया गया है।

भारत और अफ्रीका के रिश्तों में टेली-मेडिसिन परियोजना मील का पत्थर साबित हुई है। इसके माध्यम से अफ्रीका में मरीज़ों के स्थान से चिकित्सा कर्मी अफ्रीकी संघ द्वारा अपने सदस्य राज्यों द्वारा चुने गए भारतीय चिकित्सा विशेषज्ञों से ऑनलाइन परामर्श ले सकते हैं। नई दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान सहित भारत के 12 बड़े अस्पतालों में मरीज़ों के लिए परामर्श केन्द्र स्थापित किए गए हैं।

ये बहुत ज़रूरी है कि भारत और अफ्रीकी देशों की सरकारें तथा उद्योगपति एक ऐसा तंत्र तैयार करने के लिए आगे आएं जिसके माध्यम से निजी और सार्वजनिक साझेदारी से निरंतर और निर्बाध विकास के लिए हम नियामक और वैधानिक संरचना वाली सहायक नीतियाँ तैयार कर सकें।

आलेख- पद्म सिंह, समाचार विश्लेषक, आकाशवाणी

अनुवाद- नीलम मलकानिया

नोट : यह लेख  आल इंडिया रेडियो के विदेश सेवा प्रभाग  की वेबसाइट से लिया गया है  


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