क्या था भारत और बांग्लादेश का वर्चुअल सम्मेलन

भारत और बांग्लादेश का वर्चुअल या आभासी सम्मेलन एक और ऐसा सफल प्रयास रहा जिसने दो पड़ौसी देशों के बीच साझे और गहरे संबंध को और घनिष्ठ बना दिया है। 16 दिसंबर को विजय दिवस मनाने के ठीक एक दिन बाद ये बैठक आयोजित की गई।
इसी दिन 1971 में बांग्लादेश ने पाकिस्तान से मुक्ति की लड़ाई जीती थी। मुक्ति युद्ध को याद करना पचास साल पुराने भारत और बांग्लादेश के रिश्तों का एक मुख्य बिंदु है। ग़ौरतलब है कि कोविड-19 महामारी फैलने की वजह से प्रधानमंत्री मोदी की मार्च 2020 में ढाका की नियोजित यात्रा रद्द कर दी गई थी। उसके बाद से ये दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच पहली द्विपक्षीय बैठक थी।
इस बैठक से पहले भारत और बाग्लादेश ने नई दिल्ली संग्रहालय और बंगबंधु संग्रहालय के बीच सहयोग के लिए, हाइड्रोकार्बन, कृषि, उच्च प्रभाव वाली सामुदायिक विकास परियोजना, सीमा पार हाथी संरक्षण और बारिशल में निकासी परियोजना के लिए कचरा प्रबंधन उपकरण प्राप्त करने के लिए एक त्रिपक्षीय समझौते के लिए परस्पर सहयोग के उद्देश्य से सात सहमति ज्ञापन समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे।
वर्चुअल बैठक के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त रूप से शेख़ मुजिबुर्रहमान और महात्मा गाँधी के जीवन और विरासत के सम्मान में इन दोनों नेताओं पर आधारित डिजिटल प्रदर्शनी का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। भारत सरकार द्वारा बंगबंधु शेख़ मुजिब के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर एक डाक टिकट भी जारी की गई। दोनों देशों के बीच 55 साल से बंद पड़ी चिलहटी और पश्चिम बंगाल से हल्दीबाड़ी के बीच रेल मार्ग को भी इंटरनेट के माध्यम से फिर से शुरू किया गया। कोविड महामारी से उपजे हालातों से ठीक हो जाने के बाद इस मार्ग में संचालन आरम्भ करने का फ़ैसला किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों के मौजूदा स्वरूप पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि बांग्लादेश भारत की पडौस प्रथम नीति का एक अहम स्तम्भ है। उनकी सरकार ने सत्ता में आने के समय से ही बांग्लादेश के साथ मज़बूत द्विपक्षीय संबंध बनाए रखने पर ज़ोर दिया है। दोनों पक्षों ने अक्तूबर 2019 में प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की आधिकारिक दिल्ली यात्रा के समय लिए गए विभिन्न फ़ैसलों की प्रगति को लेकर भी संतोष व्यक्त किया है।
कोविड-19 महामारी के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने ये आश्वासन दिया कि जब भी भारत बचावकारी टीका निर्माण शुरू करेगा तब बांग्लादेश को ये टीका उपलब्ध करवाया जाएगा। प्रधानंत्री हसीना ने तीसता जल बंटवारे को लेकर 2011 में दोनों सरकारों के बीच हुई सहमति के आधार पर शीघ्र एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर का आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस संदर्भ में भारत के निष्ठावान प्रयासों को दोहराया। दोनों नेताओं ने मनु, खोवई, गौमती, धारला, मुहुरि और दूधकुमार इन साझी 6 नदियों के जल को बांटने के उद्देश्य से भी अंतरिम समझौता किए जाने की ज़रूरत पर बल दिया।
दोनों नेताओं ने पत्तन प्रतिबंध और पृथकवास प्रतिबंधों सहित ग़ैर शुल्क बाधाओं को दूर करके दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र का भरपूर लाभ उठाने के महत्व पर भी बात की। प्रधानमंत्री हसीना ने अनुरोध किया कि भारत सरकार की निर्यात-आयात नीति में होने वाले किसी भी बदलाव की पहले से ही सूचना दी जाए क्योंकि इन बदलावों का बांग्लादेश के घरेलू बाज़ार पर बहुत प्रभाव पड़ता है। व्यापार वार्ता में द्विपक्षीय व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते की संभावनाओं और दोनों देशों के वस्त्र मंत्रालयों के बीच सहमति समझौते को लेकर चल रही मौजूदा वार्ताओं को शीघ्र सम्पन्न किए जाने संबंधी वार्ता भी शामिल रही।
प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य चुने जाने के लिए भारत को बधाई देते हुए बाग्लादेश की ओर से रोहिंग्या लोगों को म्यांमा भेजने की प्रक्रिया में भारत की मदद की आकांक्षा व्यक्त की। प्रधानंमत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की चुनाव प्रक्रिया में सहयोग के लिए बांग्लादेश का आभार व्यक्त किया। दोनों देशों ने सतत विकास लक्ष्य हासिल करते हुए, जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करते हुए और प्रवासियों के हितों की रक्षा करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की।
दोनों नेताओं ने भूटान-बांग्लादेश-नेपाल और भारत मोटर वाहन समझौते के भी जल्द पूरे और लागू होने पर विचार-विमर्श किया। ढाका की ओर से भारत-म्यांमा और थाईलैंड के त्रिपक्षीय हाइवे परियोजना में जुड़ने की इच्छा भी व्यक्त की गई। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश को नए विकास बैंक या ब्रिक्स बैंक में शामिल होने के लिए भी कहा। इस से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में आधारभूत संरचना और सतत विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन उपलब्ध करवाए जाते हैं
वर्तमान समय में जारी महामारी दोनों देशों में भू-अर्थव्यवस्था और भू-सामरिक नीतियों मे बहुत बदलाव लाने वाली है। इसे ध्यान में रखते हुए द्विपक्षीय संबंधों को इस वर्चुअल बैठक की वजह से बहुत बढ़ावा मिलेगा। दोनों देशों को प्रगति को ध्यान में रखते हुए छोटे-छोटे मतभेदों को भुलाकर शांति और सम्पन्नता के लिए कार्य करते रहना चाहिए।
आलेख- डॉ. पौलमी सान्याल, शोध विश्लेषक, मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन विश्लेषण संस्थान
अनुवाद- नीलम मलकानिया
नोट : यह लेख आल इंडिया रेडियो के विदेश सेवा प्रभाग की वेबसाइट से लिया गया है

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