इम्पार वेबनार : मुस्लिम आचरण और उसके प्रति गैर मुस्लिमों की चिंतायें

इम्पार वेबनार : मुस्लिम आचरण और उसके प्रति गैर मुस्लिमों की चिंतायें

 

नई दिल्ली : मुस्लिम आचरण और उसके प्रति गैर मुस्लिमों की चिंतायें, विषय परइम्पार द्वारा एक वेबनार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम, इम्पार के भारतीय मुसलमानों में समाज सुधार ऐजेन्डे के तह तथा।

वेबनार में अनेक गैर मुस्लिम प्रबुद्ध नागरिकों ने मुसलमानों की सामान्य सामाजिक परम्पराओं व आचरण पर सवाल उठाये और कहा  कि वह महसूस करते है कि यह परम्परायें आज के दौर में अप्रासंगिक व सामान्य प्रचलन से बाहर है इम्पार द्वारा आयोजित इस वेबनार में जन सहमति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने व समाज का व्यापक प्रतिनिधित्व करने वाले अनेक प्रबुद्धजनों ने अपने विचार रखे।

 

वेबनार में प्रमुखरुप से जिन बातों पर चिंता प्रकट की गयी उसमें अज़ान में लाऊडस्पीकर का इस्तेमाल, जुमें की नमाज़ में सार्वजनिक सड़कों का इस्तेमाल, सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी किया जाना, मांस की दुकानों पर पर्देका प्रयोग न करना, अपने धार्मिक आयोजनों में दूसरे धर्मो के अनुयायियों की असुविधा की चिंता न करना आदि शामिल थी।

 

इस बात पर लगभग सभी ने अपनी सहमति जतायी कि सुबह की अज़ान में लाऊडस्पीकर की ऊंचीआवाज से निकट रहने वाले दूसरे धर्मालंबियों की नींद उचाटहोती है। इसी तरह जबरास्तों पर लोग नमाज़ पढ़ते हैं और वहां आस पास बेतरतीब वाहन खड़ा करते हैं तो उस से यातायात में जो व्यवधान उत्पन्न होता है उससे उस क्षेत्र के निवासियों अथवा वहां से गुज़रने वालों पर खराब प्रभाव पड़ताहै । इस तरह के व्यवहार को हम को त्यागना होगा जिस से दूसरों को असुविधा या कष्ट पंहुचता हो। अन्य प्रमुख चिंताओं में कुर्बानी के बाद मांस तथा पशुअवशेषका सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन व उसका निस्तारण न होना तथा मुस्लिम बहुल आबादी के बीच मांस की दुकानों परमां सका प्रदर्शन दोनों बहुसंख्यक समाजमें घ्रणा को जन्म देती है।

 

लोगों ने सुझाव दिया कि मस्जिद इंतिजामिया कमेटी को लाऊडस्पीकर के इस्तेमालसे या बचना नही तो उसकी आवाज़ को कम करना चाहियें विशेषकर सुबह के समय तोइ सका विशेष ध्यान रखना चाहिये। यह भी लोगों ने कहा कि मौअजि़्ज्न को चाहिये कि अज़ान देते समय अपनी आवाज़ सुखदायक बनाये। मस्जिद कमेटी को चाहिये कि नमाज़ी ज़्यादा होने की स्थिति में एक से अधिक जमात की व्यवस्था करे तथा यातायात को सुचारु बनाये रखने के लिए नमाज़ियों के वाहनो की सुव्यवस्था हेतु स्वंय सेवकों की टीम लगाये।

वक्ताओं ने यह भी सलाह दी कि कुर्बानी हेतु कई स्थानों का पूर्वनिर्धारण होना चाहिये जहां पर सफ़ाई की समुचित व्यवस्था हो ऐसा ही मांस की दुकानों के सम्बंध में भी किया जाना चाहिये।

लोगों ने यह भी महसूस किया कि इम्पार को मुस्लिम समाज में सुधार को लागू करने के लिए जिन धार्मिक व सामाजिक नेताओं के बड़ी तादाद में अनुयायी है उनको विश्वास में लेना चाहिये तथा उनकी मदद से इस काम को किया जानाचाहिये।वेबनारमें शामिल वक्ताओं ने सुझाव रखा कि समाज सुधार के काम हेतु अपने समुदाय के मजहबी व समाजि कर हनुमाओं तथा प्रभावशाली लोगों को मिलाकर एक 21 सदस्यीय कमेटी का गठनक रनाचा हिये।


यह भी सुझाव आया कि अन्य धर्मो तथा सामाजिक संस्थाओं से लगातार संवादक़ायम रखने के लिए इम्पार को एक ऐसे पुल का निर्माण करना चाहिये जिससे दूसरे  धर्मों और हमारे बीच खाई बन गयी है उसे पाटा जा सके। वेबनार का संचालन मशहूर पत्रकार यूसुफ़ अंसारी तथा विषय प्रवेश इम्पार के चेयरमेन एमजे खान ने किया।

प्रमुख वक्ताओं में श्री शाहिद सिद्दीक़ी, लेफ्टीनेंट जरनल ज़मीरुद्दीन शाह, हज़रत मौलाना खालिदर शीद साहब फ़िरंगी महल, के रहमान खान, माजिद पारिख, सय्यद मज़हरउल हसन, अब्बास अली रिज़वी, प्रोफ़ेसर एसए अब्बासी, ज़किया खान, शीरीन अली, ब्रिगेडियर अहमद अली, एसआर मलिक, हसन मदावर, गु़फ़रान आज़ाद, मुशर्रफ़ अलीत था अन्य रहे।

संतोष भारती व किशोर अस्थाना ने मुस्लिमों की परम्पराओ व आचरण सम्बंधी हिन्दुसमाज की चिंताओं और उनके निदान से अवगत कराया।

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