आज़म खान की यूनिवर्सिटी की ज़मीन पर सरकार ले सकती है क़ब्ज़ा !

 

रईस अहमद | रामपुर

उत्तर प्रदेश के जनपद रामपुर से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान (Azam Khan) और जिला प्रशासन के बीच चूहे-बिल्ली का खेल अभी भी जारी है।

आज़म खान पर दर्ज किए गए 80 से ज्यादा मुकदमों में भले ही अधिकतर में अदालतों से उभे ज़मानत मिल गयी हो लेकिन प्रशासन ने आजम खान पर अब राजस्व अदालतों में शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

इसी क्रम में आजम खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन सरकार के कब्जे में लिए जाने को लेकर जो मुकद्दमा है, उसकी एडीएम प्रशासन रामपुर की अदालत में कार्रवाई चल रही है।

मामला मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा है जिसकी स्थापना के समय उत्तर प्रदेश भूमि अधिनियम के अंतर्गत किसी व्यक्ति या संस्था के द्वारा अधिकतम साढे बराह एकड़ भूमि रखे जाने की सीमा को लेकर शासन से छूट प्राप्त की गई थी। इसमें शासन द्वारा कुछ शर्ते लगाई गई थीं।

प्रशासन का आरोप है के जौहर ट्रस्ट द्वारा उन शर्तों का उल्लंघन किया गया जिसके चलते जौहर यूनिवर्सिटी के लिए साढे बारह एकड़ से अधिक भूमि की अनुमति निरस्त मानी जाएगी और तमाम भूमि सरकार की घोषित करते हुए उस पर सरकार का कब्जा लिए जाने की कार्रवाई की जा रही है।

वहीं शासकीय अधिवक्ता अजय तिवारी ने ग्लोबलटुडे को इस मामले की तफ्सील बताते हुए कहा,”हमारे सांसद मोहम्मद आजम खां साहब ने जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए साढे़ 12 एकड़ से ज्यादा जमीन खरीदने की अनुमति शासन से मांगी थी। उस शासनादेश के अनुसार उन्होंने कहा था कि 400 एकड़ जमीन हमें जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए चाहिए।

यूनिवर्सिटी हासिल करने की शर्तें क्या थीं?

400 एकड़ जमीन खरीदने की अनुमति उन्होंने 2005 में प्राप्त की थी जो अनुमति मिली थी वह कुछ शर्तों के अधीन थी। उन शर्तों के आधार पर थी उसकी शर्त नंबर 5 में शासनादेश में यह लिखा हुआ है। अगर किसी भी शर्त का उल्लंघन होगा तो ये 12 एकड़ से ज्यादा जमीन किसानों की खरीदी गई है अपने आप सरकार में निहित हो जाएगी क्योंकि उनके द्वारा शासनादेश में जो शर्ते दी गई थीं उसमें एक अनुमति यह थी कि आपके द्वारा जितनी जमीन खरीदने की अनुमति मांगी गई है शासनादेश की तिथि से 5 साल के अंदर स्थापना पब्लिक निर्माण का कार्य पूरा करना होगा। जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना और निर्माण से संबंधित जो भी कार्य है वह 5 साल के अंदर पूरा करना है।

दूसरी शर्त उनकी यह थी… उसका प्रस्ताव भी गया था। सांसद आजम खान की तरफ से यह कहा गया था तो किसानो की सहमति हमें मिल गई है और उनकी सहमति के बाद ही हम यह जमीन खरीद रहे हैं। इसमें यह भी था इसमें कोई अनुसूचित जाति और जनजाति का व्यक्ति है उसकी जमीन तो नहीं है इसमें उस प्रस्ताव में लिखा है के इस तरह का कोई व्यक्ति इसमें नहीं है। अनुसूचित जाति और जनजाति के व्यक्तियों की भी अपने रसूख का और फायदा उठाते हुए उनकी जमीनें भी खरीदी गई। उसके अलावा रेत की जमीन को पट्टा करके अपने यूनिवर्सिटी में मिलाया गया जो नदी की जमीन का पट्टा शासन निरस्त कर चुका है। चकरोड़ को शामिल किया गया जो ग्राम सभा की सुरक्षित भूमि थी उसमें यह भी था ऐसी सुरक्षित भूमि को यूनिवर्सिटी में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके अलावा जो चैरिटी के काम थे जो लोकहित के काम थे जनहित के काम से उसको करने के लिए इनको जमीन खरीदने की अनुमति प्रदान की गई थी। इन्होंने अपने जवाब में कोई ऐसा साक्ष्य नहीं दिया, सबूत नहीं दिया के इन के द्वारा चैरिटी के क्या-क्या काम किए जा रहे हैं।

इनका कहना यह था कि लोगों को शिक्षा देने के लिए शिक्षित करने के लिए हम जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना कर रहे हैं और यह भी कहा कि रामपुर शिक्षा की दृष्टि से काफी पिछड़ा हुआ है जबकि रामपुर उत्तर प्रदेश का एकमात्र जिला ऐसा है जिसमे आजादी से पहले कई इंटर कॉलेज, कई डिग्री कॉलेज, कई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रामपुर के अंदर थे। रामपुर हरगिज शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ नहीं था। हमारा कहना यह भी था आप यह कहते हैं के बच्चों को शिक्षा हम देंगे हम पढ़ाएंगे लेकिन बच्चों की फीस जो यूनिवर्सिटी में माफ की गई है उसका कोई जिक्र कर नहीं है। किसको कम शुल्क पर पढ़ाया जा रहा है इसका कोई जिक्र नहीं है। एक सबसे बड़ा विषय यह है यहां रोहिलखंड विश्वविद्यालय संचालित है,गवर्नमेंट का राजकीय रजा डिग्री कॉलेज वहां बीएससी प्रीवियस का जो बच्चा है उसकी पंद्रह सौ रुपए फीस है। क्या जौहर यूनिवर्सिटी में इससे कम फीस पर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, उनका एडमिशन कराया जा रहा है, उसका कोई ज़िक्र आपत्ति में नहीं था। तो इस पर हमने प्रति आपत्ति दाखिल की है। हमने कहा है शर्तों का उल्लंघन हुआ है तो जमीन सो मोटो सरकार में निहित हो गई है। हमारे जिलाधिकारी महोदय जो साढे़ 12 एकड़ से ज्यादा जमीन है जो खरीदी गई है उस पर कबजा लें क्योंकि वह जमीन सरकार की है। शर्तों का उल्लंघन हुआ है तो वह जमीन अपने आप सरकार में निहित  हो जाएगी और शर्तों का उल्लंघन किया गया है। ट्रस्ट के लोगों ने आजम खान साहब को हमने पहले उनके पते पर नोटिस भिजवाया था। फिर पता चला कि मैं सीतापुर जेल में निरूद्ध है तब हमने सीतापुर जेल में जेलर के माध्यम से वे नोटिस उनको भेजा। वहां से रिपोर्ट आई कि सांसद महोदय ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया। उसके बाद हमने अखबार के माध्यम से उसका प्रकाशन कराया के बाद में जौहर ट्रस्ट की ओर से जवाब दाखिल हुआ नोटिस उनको इसलिए भेजा गया कि जो परमिशन ली गई थी अधिक भूमि क्रय करने के साढे 12 एकड़ से सांसद मोहम्मद आजम खान द्वारा ली गई थी जो ट्रस्ट के अध्यक्ष होने के नाते एडीएम प्रशासन जेपी गुप्ता जी के न्यायालय में ही मामला चल रहा है। अगली तारीख 7 अक्टूबर की मुकर्रर की गई है।

 

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