अच्छे लोग केवल मस्जिदों में जाने वाले नहीं होते हैं बल्कि मंदिरों ,गिरजा घरों में भी होते हैं

लेख: कमर फलाही : उर्द से अनुवाद : अबू अनस नई दिल्ली

अच्छे लोग आसमान से नहीं टपकते बल्कि हमारे आस पास होते हैं। अच्छे लोग केवल मस्जिदों में जाने वाले नहीं होते हैं बल्कि मंदिरों ,गिरजा घरों में भी होते हैं।  जिनका चेहरा दाढ़ी से भरा हुआ हो महज ये लोग अच्छे नहीं होते हैं ,बल्कि क्लीन शेव , गुदड़ी पोश और पेंट शर्ट वाले भी होते हैं। 

अगर हम मक्खियों  की तरह कमी तलाश करना छोड़ दें और मधुमखियों की तरह हर फूल से रब्त रखें और अपने मक़सद के पूरा करने पर नज़र रखें तो हमारी नज़रों में सभी अच्छे लगने लगेंगे वरना हर  कोई ऐब दार होता है। 


हमारे नबी हज़रत मुहम्मद (स ) किसी व्यक्ति की बुराई अपने सामने बयानकरने से रोकते थे और यह कहते थे की मैं अपने अल्लाह  से इस हाल में मिलना चाहता हूँ कि की मेरा नफ़्स किसी के बारे में मोटा न हो, और हम अक्सर दूसरों में कमी तलाश  करने में लगे रहते हैं ,और फिर यह कहते हैं की लोग अच्छे नहीं हैं। 

 अल्लाह ने क़ुरआन मजीद में  जहां यह कहा है कि यहूदी और मुशरिक मुस्लिम दुश्मनी में बढ़े  हुए हैं  तो वहीं यह भी कहा है कि सारे यहूदी एक जैसे नहीं हैं ,उनमें नेक भी हैं नमाज़ी भी हैं और खुदा से डरने वाले भी। 


अल्लाह के नबी जब ताइफ़ से लौटे तो आप को अमान  देने वाला एक मुशरिक ही था। जिनके साथ आप ने काबा पर हज्रे अस्वद नस्ब  किया  वह सब मुशरिक ही थे , जिह्नें आप ने खुली माफ़ी दी वह सब  मुशरिक थे।


आज मुसलमानों में बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो गैरमुसलमानों की कुछ जमातों के कार्यकर्ताओं को मुसलमानों का खुला दुश्मन बताते हैं ,और मुसलमानों  के दिलों में  गुस्सा भरते ते हैं वो यह जान लें कि हर जमात में अच्छे लोग हो सकते हैं ,अच्छे लोगों की पहचान अच्छा बनने के बाद ही होती है क्योंकि हर पढ़ा  लिखा जौहरी नहीं हो सकता।


इस्लाम में पड़ोसियों के हुक़ूक़ जानने , पढ़ने और उस पर अमल के बाद नफरत अपने आप काम हो जाती है और एक Pilural  सोसाइटी का  खाका ज़ेहन में बनता है।  


हमारे दरम्यान अच्छे लोगों की एक नई  तारीफ यह है की इंसान नमाज़ी हो ,हाजी हो ,मगर यह दुरुस्त पहचान नहीं है , यह तो अल्लाह के हक़ है जिनकी ज़रुरत अल्लाह को बिलकुल नहीं है मगर इंसानों के हुक़ूक़ जिनकी ज़रुरत इंसानों को है अगर उसे नज़र अंदाज़ किया जा रहा है तो ऐसा इंसान कैसे अच्छा हो सकता है। 


हमारे नबी ने कहा है की वह व्यक्ति मोमिन नहीं  तीन बार कहा जिसका पड़ोसी  उस से तकलीफ महसूस करता हो। आज आप देखेंगे तो हर जगह ऐसा मिलेगा  मगर फिर भी लोग अच्छे हैं ,अल्लाह हमें अच्छा बनाए ,आमीन 

 लेखक  इस्लामिक स्कालर एवं स्वतंत्र विचारक हैं  

https://www.facebook.com/qamar.falahi



0 comments

Leave a Reply