पेरू में GenZ प्रदर्शन, 1 की मौत,100 घायल:7 दिन पहले बने राष्ट्रपति से इस्तीफा मांगा; GenZ ने एक महीने में 3 देशों की सरकारें बदलीं
दक्षिण अमेरिकी देश पेरू में GenZ भ्रष्टाचार को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन में गुरुवार को एक युवा की मौत हो गई, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं, जिनमें 80 पुलिस कर्मी और 10 पत्रकार शामिल हैं।
इसके बाद प्रदर्शन के दौरान GenZ कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में हजारों युवाओं ने नए राष्ट्रपति जोस जेरी का इस्तीफा मांगा। हालांकि, राष्ट्रपति जेरी ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया। जेरी 10 अक्टूबर को सत्ता में आए थे, जब संसद ने पूर्व राष्ट्रपति दीना बोलुआर्ते को हटा दिया था।
जेरी पिछले 5 साल में छठे राष्ट्रपति हैं। जेरी ने प्रदर्शनों को लेकर कहा, 'मेरा दायित्व देश में स्थिरता बनाए रखना है, यही मेरी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता है।' उन्होंने संसद से अपराध पर नियंत्रण के लिए विशेष अधिकार मांगे हैं।
GenZ के प्रदर्शनों के कारण पिछले एक महीने में तीन देशों (पेरू, नेपाल और मेडागास्कर) में राजनीतिक तख्तापलट या सत्ता परिवर्तन हुआ है।
प्रदर्शन की फुटेज...







प्रदर्शन में रैपर की मौत, पुलिस ने गोली मारी
इस प्रदर्शन में 32 साल के रैपर और प्रदर्शनकारी एडुआर्डो रूइज की गोली लगने से मौत हुई। इसका एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। वीडियो फुटेज में दिखा कि एक व्यक्ति भीड़ से भागते हुए गोली चलाता है, जिससे रूइज गिर पड़ते हैं। गवाहों ने कहा कि हमलावर एक पुलिसकर्मी था।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने 'जेरी बलात्कारी है' जैसे नारे लगाए। भीड़ ने आगजनी की, जबकि पुलिस ने आंसू गैस और रबर की गोलियां दागी। पेरू के लोग पिछले कई दशकों से भ्रष्टाचार और नेताओं की नाकामी से परेशान हैं।
एक्सपर्ट ओमर कोरोनेल का कहना है, 'पेंशन की मांग से शुरू हुआ आंदोलन अब भ्रष्टाचार और असुरक्षा के खिलाफ जनता की नाराजगी बन चुका है।' प्रदर्शनकारियों ने कहा, 'विरोध करना अधिकार है, मारना अपराध।' एक महिला के पोस्टर पर लिखा था, 'कातिल से बलात्कारी तक, वही गंदगी।'
PM बोले- GenZ लोकतंत्र पर हमला करने वाली गैंग
राष्ट्रपति जेरी ने रूढ़िवादी पूर्व न्यायाधीश एर्नेस्टो अल्वारेज को प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। अल्वारेज ने कहा कि 'पेरू की GenZ लोकतंत्र पर हमला करने वाली गैंग है।'
जेरी खुद भी विवादों में हैं। उनके खिलाफ एक महिला ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था, हालांकि यह मामला अगस्त में बंद कर दिया गया।
पेंशन योजना में बदलाव से गई पूर्व राष्ट्रपति की कुर्सी
यह विरोध 20 सितंबर को युवाओं के बेहतर पेंशन और वेतन की मांग से शुरू हुआ था, लेकिन अब यह भ्रष्टाचार, अपराध और सरकार से बढ़ती नाराजगी का प्रतीक बन गया है।
इसके बाद 27 सितंबर को राजधानी लीमा में हजारों युवाओं ने राष्ट्रपति दीना बोलुआर्ते के खिलाफ नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया। बोलुआर्ते की छवि जनता के बीच काफी खराब थी। उनके शासन में साल 2022 में प्रदर्शनों को दबाने की कोशिश की गई थी, जिसमें 50 लोग मारे गए थे।
दरअसल, पेरू में पेंशन सुधार के नियमों में बदलाव किए गए थे, जिससे लोग गुस्साए हुए थे। नए नियम के अनुसार, पेरू में 18 साल से अधिक उम्र के हर व्यक्ति को किसी न किसी पेंशन कंपनी से जुड़ना होगा।

जानिए पेंशन योजना में क्या बदलाव हुआ...
पेरू में भ्रष्टाचार, आर्थिक असुरक्षा, बढ़ता अपराध और जवाबदेही की कमी ने युवाओं को नाराज किया है। 2022 में पूर्व राष्ट्रपति पेद्रो कास्तिलो को हटाए जाने और गिरफ्तार किए जाने के बाद, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में दर्जनों प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी। इस पर भी सरकार से सवाल किया जा रहा है।
पेरू सरकार ने हाल ही में पेंशन सिस्टम में बदलाव किया है। पहले लोग चाहें तो पेंशन योजना से जुड़ सकते थे, लेकिन यह अनिवार्य नहीं था।
अब सरकार ने नियम बना दिया है कि पेरू में जो भी नागरिक 18 साल की उम्र पूरी कर लेगा, उसे किसी न किसी पेंशन प्रदाता कंपनी/संस्था से जुड़ना होगा। यानी कोई भी वयस्क इस सिस्टम से बाहर नहीं रह सकता।
पेंशन प्रदाता वे निजी या सरकारी संस्थान होते हैं जो लोगों से हर महीने एक तय रकम जमा कराते हैं। रिटायरमेंट या बुढ़ापे में वही पैसा पेंशन के रूप में वापस मिलता है।
पेरू की राष्ट्रीय सांख्यिकी एजेंसी (INEI) के अनुसार, देश की 27% आबादी 18 से 29 साल की उम्र के बीच है। ये युवा इस आंदोलन की रीढ़ हैं।
लोग नाराज क्यों हैं?
- कई लोगों को लगता है कि यह जबरन वसूली जैसी है।
- युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही, ऐसे में वे पेंशन के लिए पैसे कहां से जमा करेंगे?
- पेंशन प्रदाता संस्थाओं में पहले से ही भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी की शिकायतें हैं।
- लोग चाहते हैं कि यह उनकी इच्छा पर निर्भर हो, मजबूरी न बने।
- लोगों का कहना है कि सरकार को रोजगार, शिक्षा और सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए, न कि जबरन पेंशन योजना थोपनी चाहिए।
युवाओं का प्रतीक बना वन पीस का केरेक्टर
इस बार के विरोध में पेरू की GenZ यानी 18 से 29 साल के युवा सबसे आगे हैं। वे जापानी कॉमिक्स 'वन पीस' के केरेक्टर 'लूफी' को अपना प्रतीक बना रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के हाथ में खोपड़ी वाली टोपी का निशान देखा जा रहा है, जो लूफी की पहचान है।
एक छात्र नेता लियोनार्डो मुन्योस ने कहा, 'लूफी जगह-जगह जाकर भ्रष्ट और तानाशाही शासकों से जनता को आजाद कराता है। पेरू में भी वही स्थिति है। अब और खामोश नहीं रहेंगे'
छात्र सैंटियागो जापाटा ने कहा – 'हम इस बात से थक चुके हैं कि मौत और भ्रष्टाचार को सामान्य बना दिया गया है। हमारी पीढ़ी अब खामोश नहीं बैठेगी। सरकार को जनता से डरना चाहिए, न कि जनता को सरकार से।'
वन पीस जापान की मशहूर कॉमिक्स और ऐनिमे सीरीज है। इसकी कहानी समुद्री डाकुओं (पाइरेट्स) पर आधारित है, जो आजादी, दोस्ती और न्याय के लिए लड़ते हैं। यह सीरीज पूरी दुनिया में युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय है।


पेरू और नेपाल के बाद अब अफ्रीका में GenZ आंदोलन
पेरू के अलावा एशिया के बांग्लादेश और नेपाल में भी GenZ प्रदर्शन हुए। इसके साथ ही अब GenZ आंदोलन अफ्रीकी महाद्वीप में भी जोर पकड़ रहा है। बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और आर्थिक असमानता से त्रस्त यह युवा पीढ़ी अब केवल विरोध नहीं कर रही, वह सरकारें बदल रही है।
पिछले एक साल में केन्या, मेडागास्कर, मोरक्को और बोत्सवाना जैसे देशों में जेन-जी के नेतृत्व में व्यापक प्रदर्शन हुए।
मेडागास्कर में राष्ट्रपति हटे, मोरक्को में सेना ने हस्तक्षेप किया और केन्या में सरकार झुक गई। वहीं बोत्सवाना में युवाओं ने मतदान के जरिये 60 साल पुरानी सत्ता पलट दी। सोशल मीडिया से संगठित यह पीढ़ी अब लोकतंत्र, जवाबदेही और रोजगार की नई परिभाषा गढ़ रही है।

केन्या में टैक्स बिल पर भड़के युवा, 60 की मौत राष्ट्रपति विलियम रूटो के वित्त विधेयक से टैक्स बढ़ने की आशंका थी। युवाओं ने कहा 'हम पहले ही टूट चुके हैं।'
सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह आंदोलन सड़कों पर आ गया। पुलिस फायरिंग में 60 से ज्यादा लोग मारे गए, संसद पर हमला हुआ। राष्ट्रपति को बिल वापस लेना पड़ा।
मेडागास्कर के राष्ट्रपति देश से भागे, आर्मी चीफ ने सत्ता संभाली बिजली-पानी की कमी और बढ़ती गरीबी ने युवाओं को भड़का दिया। प्रदर्शन राजधानी अंतानानारिवो से शुरू हुए। झड़पों में सैकड़ों घायल, संसद ने राष्ट्रपति एंड्री रजोएलिना पर महाभियोग लगाया। राष्ट्रपति देश छोड़कर भाग गए और सेना प्रमुख जनरल रिको रैनड्रिवेलो ने सत्ता संभाल ली।

मोरक्को में खेल आयोजनों पर खर्च से भड़के युवा, 3 की मौत सरकार ने 2030 विश्व कप व अफ्रीका कप की तैयारियों पर अरबों डॉलर खर्चे किए, युवाओं को शिक्षा-स्वास्थ्य नहीं मिला। इससे युवाओं में गुस्सा भड़का। जेन-जी प्रदर्शन में 3 लोगो की मौत। सरकार को पीछे हटना पड़ा। राजधानी साले और कैसाब्लांका में सेना ने नियंत्रण संभाल लिया। नाम मात्र की सरकार रही।

courtesy:www.bhaskar.com

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