फ्रांस प्रोटेस्ट- बजट कटौती के खिलाफ 5 लाख लोग जुटे:स्कूली बच्चों ने हाईवे ब्लॉक किए, पत्थरबाजी हुई; 80 हजार पुलिसकर्मी तैनात, 141 गिरफ्तार

फ्रांस में बजट कटौती को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ट्रेड यूनियनों ने गुरुवार को हड़ताल की अपील की थी, जिसमें लाखों लोग शामिल हुए। पेरिस, लियोन, नांतेस, मार्सिले, बोर्डो, टूलूज और कैएन जैसे शहरों में सड़कें जाम हो गईं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में 5 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे, जबकि यूनियनों ने संख्या 10 लाख बताई है। सुरक्षा के मद्देनजर देश भर में 80,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और 141 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं हैं।

कुछ जगहों पर पत्थरबाजी और आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ, लेकिन ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे। कई जगह स्कूली बच्चों ने भी हाईवे ब्लॉक किए।

प्रदर्शन की 5 तस्वीरें...

फ्रांस में बजट कटौती के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर उतरे।
फ्रांस में बजट कटौती के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर उतरे।
ट्रेड यूनियंस का दावा है कि इन प्रदर्शनों में 10 लाख लोग शामिल हुए।
ट्रेड यूनियंस का दावा है कि इन प्रदर्शनों में 10 लाख लोग शामिल हुए।
सुरक्षा के मद्दे नजर पूरे देश में 80 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए।
सुरक्षा के मद्दे नजर पूरे देश में 80 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए।
कई जगह पर पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।
कई जगह पर पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।
विरोध प्रदर्शन के दौरान देश में 141 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान देश में 141 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

बजट कटौती के प्लान से भड़की जनता

फ्रांस की सरकार ने 2026 के बजट में करीब 52 अरब डॉलर की कटौती का प्लान बनाया है। इसमें पेंशन फ्रीज करना, स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च कम करना, बेरोजगारी भत्ता घटना और दो राष्ट्रीय छुट्टियां हटाना शामिल है।

सरकार का कहना है कि देश का घाटा यूरोपीय यूनियन के 3% मानक से दोगुना है, और कर्ज जीडीपी का 114% हो गया है। लेकिन लोग इसे अमीरों के लिए राहत और गरीबों पर बोझ मानते हैं। यूनियनों का कहना है कि अमीरों पर टैक्स बढ़ाओ। महंगाई से पहले ही जिंदगी मुश्किल हो गई।

प्रदर्शन की प्रमुख 4 वजह

  1. राष्ट्रपति मैक्रों की नीतियां: जनता के एक बड़े वर्ग को लगता है कि मैक्रों की नीतियां आम लोगों के हितों के खिलाफ हैं और अमीर वर्ग को फायदा पहुंचाती हैं।
  2. बजट में कटौती: सरकार ने खर्चों में कटौती और कल्याणकारी योजनाओं में कमी कर आर्थिक सुधार लागू किए हैं। इससे आम जनता खासकर मध्यमवर्ग और श्रमिक वर्ग पर दबाव बढ़ा।
  3. 2 साल में 5 पीएम: हाल ही में सेबास्टियन लेकोर्नू को प्रधानमंत्री बनाया गया है। यह दो साल से भी कम समय में पांचवें प्रधानमंत्री हैं। इससे लोगों में अस्थिरता और असंतोष बढ़ गया है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि उनकी नियुक्ति की शुरुआत से ही सरकार पर दबाव बनाया जाए।
  4. ब्लॉक एवरीथिंग आंदोलन: वामपंथी गठबंधन और जमीनी संगठनों ने इस नारे के साथ आंदोलन शुरू किया है ताकि देश में सबकुछ ठप करके सरकार को झुकने पर मजबूर किया जा सके।

सभी प्रमुख विपक्षी दलों का आंदोलन को समर्थन

इन विरोध प्रदर्शनों को वामपंथी राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिल रहा है। वामपंथी पार्टी फ्रांस अनबाउड ने अगस्त में ही इस आंदोलन का समर्थन किया था। अब इससे अन्य वामपंथी दल भी जुड़ गए।

सोशलिस्ट पार्टी ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है। वहीं, न्यू पॉपुलर फ्रंट (NPF) और नेशनल रैली (RN) जैसे दल, जिन्होंने संसद में बजट के खिलाफ वोट देकर पिछली सरकार गिराई थी। वे दल भी यूनियनों के साथ सड़कों पर हैं, और अमीरों पर ज्यादा टैक्स की मांग कर रहे हैं।

देश के सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने इस आंदोलन को समर्थन दिया है।
देश के सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने इस आंदोलन को समर्थन दिया है।

इन प्रदर्शनों से क्या असर पड़ेगा?

ये आंदोलन नई सरकार के लिए बड़ा खतरा हैं। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू को अब बजट पास करने में मुश्किल होगी। संसद बंटी हुई है और किसी के पास बहुमत नहीं है। प्रदर्शन से ट्रेन, बस, मेट्रो रुक गई है, स्कूल बंद करने पड़े हैं और बिजली उत्पादन 1.1 गीगावाट कम हुआ है।

इससे अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा और सरकार पर बजट बदलने का दबाव बढ़ेगा। मैक्रों की लोकप्रियता पहले ही कम है, इससे उसमें और गिरावट आ सकती है।

 

 

 

 

 

courtesy:www.bhaskar.com

0 comments

Leave a Reply