जीवन के चार साल की मेहनत आगे के 40 साल आसान बना सकती है / वाइस चांसलर , जामिया हमदर्द
जामिया हमदर्द कैंपस से हम आपको रूबरू करा रहे हैं एक खास मुलाक़ात से। हमारे साथ मौजूद हैं यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर अफ़शार आलम
साक्षात्कार : अशरफ अली बस्तवी
दिल्ली के जामिया हमदर्द कैंपस से हम आपको रूबरू करा रहे हैं एक खास मुलाक़ात से। हमारे साथ हैं यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर अफ़शार आलम। हाल ही में जामिया हमदर्द ने अपना फाउंडेशन डे मनाया है। इस मौके पर हमने प्रो. आलम से विस्तार से बातचीत की—जिसमें यूनिवर्सिटी की अब तक की उपलब्धियों, नए कोर्सेज़ की शुरुआत, चल रहे रिसर्च प्रोजेक्ट्स और आने वाले वर्षों की योजनाओं पर गहन चर्चा हुई।
इंटरव्यू के अहम अंश।
प्रश्न : आपके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों को आप कैसे देखते हैं ?
उत्तर : जब मैंने कार्यभार संभाला, सबसे बड़ा चैलेंज नैक (NAAC) विज़िट का था। हमने दो साल में यह पूरा किया और हमें A+ ग्रेड मिला। कई पेंडिंग मुद्दे जैसे इनकम टैक्स और प्रॉपर्टी टैक्स को भी सुलझाया। इसके बाद सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, टेलीकम्युनिकेशन और आयुष मंत्रालय के प्रोजेक्ट मिले। हमने इंटरनेशनल रिलेशन, माइक्रोबायोलॉजी, वायरोलॉजी, बीए एलएलबी, बीटेक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एमबीए हेल्थ साइंस जैसे 20 से अधिक नए कोर्स शुरू किए। इससे जामिया हमदर्द की प्रोफेशनल इमेज मजबूत हुई।
प्रश्न : भविष्य की दिशा क्या है? जामिया हमदर्द आने वाले वर्षों में खुद को कहां देखती है?
उत्तर : हमारा लक्ष्य भारत की शीर्ष 10 यूनिवर्सिटीज़ में जगह बनाना है। इसके लिए डेटा एनालिटिक्स, आउटरीच, ट्रेनिंग, इनोवेशन और इनक्यूबेशन पर जोर दे रहे हैं। शिक्षण और रिसर्च के साथ छात्रों के ओवरऑल डेवलपमेंट को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रश्न : आपको “ट्रबल-शूटर” कहा गया है। प्रशासनिक चुनौतियों को आप कैसे संभालते हैं?
उत्तर : मैं हर काम सरकार के तय नियमों और प्रोसीजर के तहत करता हूं। चाहे रिक्रूटमेंट हो, वित्तीय प्रबंधन हो या टीचर्स के प्रमोशन—सब कुछ समय पर और पारदर्शी ढंग से। बैंक रिकंसिलिएशन से लेकर रिटायरमेंट बेनिफिट्स और एरियर तक, कोई काम पेंडिंग नहीं रहने दिया।
प्रश्न : नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को लेकर जामिया हमदर्द की प्रगति कैसी है?
उत्तर : भारत सरकार ने नीति लागू की, उसी दिन से हमने चार वर्षीय ग्रेजुएशन प्रोग्राम शुरू कर दिया। प्रोफेशनल कोर्सेज़ में इंडस्ट्री के साथ तालमेल बढ़ाकर छात्रों को अधिक प्रैक्टिकल अनुभव दिला रहे हैं।
प्रश्न : रिसर्च के क्षेत्र में यूनिवर्सिटी का स्थान और योजनाएं?
उत्तर : हमारे पास हर साल लगभग 30–40 करोड़ का रिसर्च ग्रांट है। डीएसटी, आईसीएमआर, आईसीएसएसआर जैसी कई एजेंसियों से सहयोग मिल रहा है। हम यूरोपियन यूनियन के साथ भी साझेदारी की दिशा में काम कर रहे हैं।
प्रश्न : क्या विदेश में कैंपस खोलने की योजना है?
उत्तर : जी हां, हमने सरकार से रियाद में ऑफशोर कैंपस के लिए एनओसी की मांग की है। केरल में पहले से हमारा एक ऑफ-कैंपस है। इसके अलावा डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सिक्योरिटी और पैरामेडिकल जैसे कई स्किल और सर्टिफिकेट प्रोग्राम चल रहे हैं।
प्रश्न : फार्मेसी विभाग की लगातार टॉप रैंकिंग पर आपका क्या कहना है?
उत्तर : हमने 10 बार NIRF रैंकिंग में भाग लिया, सात बार पहला स्थान हासिल किया। इंडस्ट्री–अकादमिक साझेदारी, पेटेंटिंग और रिसर्च पर हमारा जोर है। यही हमारी सफलता का राज है।
प्रश्न : प्लेसमेंट और एलुमिनाई कनेक्शन को लेकर क्या पहल हैं?
उत्तर : हाल ही में हमने ट्रेनिंग, प्लेसमेंट और एलुमिनाई अफेयर्स का एक अलग निदेशालय बनाया है। इंडस्ट्री से सीधे कैंपस इंटरव्यू, इंटर्नशिप और स्कॉलरशिप के मौके मिल रहे हैं। हमारे पूर्व छात्र आज देश-विदेश की शीर्ष कंपनियों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं और वे मौजूदा छात्रों को मार्गदर्शन देते हैं।
प्रश्न : अपने छात्रों के लिए आपका संदेश?
उत्तर : मैं हमेशा कहता हूं कि जीवन के चार साल की मेहनत आगे के 40 साल आसान बना सकती है। पढ़ाई के साथ खेलकूद, आउटरीच और नेतृत्व क्षमता पर भी ध्यान दें, लेकिन इंडस्ट्री को ध्यान में रखकर पढ़ाई करें।

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