कश्मीर और ओपिनियन पोल के बहाने डैमेज कंट्रोल की कोशिश

माजिद अली खां

लखीमपुर खीरी में हुई किसानों की मौत के बाद योगी सरकार समेत पूरी भारतीय जनता पार्टी पर मनोवैज्ञानिक दबाव में आ गई है इसलिए अब इस घटना के बाद हुए नुकसान की भरपाई के लिए डैमेज कंट्रोल करने का काम शुरू कर दिया गया है जिसके लिए मीडिया द्वारा ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है जिससे इस घटना का कोई संदेश भारतीय जनता पार्टी के लिए नकारात्मक रूप से जनता में ना जाए.

दो पहले कश्मीर में हुई हत्याओं में मारे गए लोगों का मीडिया पर धार्मिक विश्लेषण करना इस बात का संकेत था कि भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य को अपने परंपरागत ढंग से ध्रुवीकरण कराकर जीतना चाहती है.  कशमीर में हुए हत्याकांड के बाद हिंदू अतिवादी संगठन मुसलमानो के खिलाफ मुखर होकर विरोध करने लगे हैं.

हालांकि कशमीर में आतंकवाद का शिकार जयादातर मुसलमान होते रहे हैं लेकिन भाजपा समर्थित समाचार माध्यम ऐसा प्रदर्शित करना चाहते हैं कि कशमीर मे मुसलमान आतंकवादियों द्वारा सिखो और हिंदुओ की हत्या की जा रही है. कश्मीर में हुए इस हत्याकांड में सिखों को भी निशाना बनाया बनाया गया है जिसके पीछे भी यही साजिश है कि किसी भी तरह सिखों और मुसलमानों के आपसी गठजोड़ को नफरत में बदल दिया जाए क्योंकि देश में चल रहे किसान आंदोलन में सिख समुदाय की अहम भूमिका रही है.

सिखों को भड़काने के लिए ही ऐसी घटनाएं घटित हो रही हैं जबकि लखीमपुर खीरी में मारे गए किसान भी सिख समुदाय तो अनुमान लगाया जा सकता है कि अचानक कश्मीर में सिखों का मरना क्या रहस्य रखता है. इसके साथ ही टीवी चैनलों पर ओपिनियन पोल करा कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ब्रांडिंग करने की कोशिश हो रही है तथा राज्य में सबसे ज्यादा समर्थक योगी आदित्यनाथ के दिखाने प्रयास किए जा रहे हैं. अगले वर्ष उत्तर प्रदेश में चुनाव होना है और पिछले एक साल से उत्तर प्रदेश किसानों के आंदोलन को भी देख रहा है.

इस आंदोलन का प्रभाव अब पूरे राज्य में दिखाई देने लगा है. उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा प्रभाव पश्चिम उत्तर प्रदेश में देखने को मिलता है क्योंकि किसान नेता राकेश टिकैत मुजफ्फरनगर के रहने वाले हैं और यह बात भारतीय जनता पार्टी भी महसूस करने लगी थी कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में उसका प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहने वाला है.

इसलिए भारतीय जनता पार्टी के नीति निर्धारकों ने मध्य यूपी और पूर्वांचल में ज्यादा फोकस करने की नीति बनाई थी. लखीमपुर खीरी की घटना ने भारतीय जनता पार्टी और सरकार को मध्य यूपी में भी कटघरे में खड़ा कर दिया है जिससे अब भारतीय जनता पार्टी को एहसास ही नहीं बल्कि यकीन हो चला है कि आगामी विधानसभा चुनाव में बहुत ज्यादा सकारात्मक परिणाम नहीं मिलेंगे इसलिए भाजपा करो या मरो की स्थिति में आकर चुनाव जीतने के लिए सभी सभी हथकंडे इस्तेमाल करने को आतुर नजर आ रही है.

लखीमपुर खीरी घटना के बाद जिस प्रकार प्रियंका गांधी ने सक्रियता दिखाते हुए योगी सरकार को झुकने पर मजबूर किया उसका प्रभाव भी भारतीय जनता पार्टी पर देखा जा सकता है. कुछ दिनों पहले तक निष्क्रिय विपक्ष के चलते भारतीय जनता पार्टी संतुष्ट थी कि वह बिना ज्यादा विरोध झेले उत्तर प्रदेश की सत्ता पर दोबारा काबिज हो जाएगी लेकिन लखीमपुर की घटना के बाद प्रियंका गांधी व कांग्रेस के नेताओं की सक्रियता ने भाजपा के सोचने पर मजबूर किया है कि मुकाबला अब आसान नहीं होने वाला है. भारतीय जनता पार्टी है डैमेज कंट्रोल करने के लिए कुछ नया करने की तैयारी कर रही है.

कश्मीर और ओपिनियन पोल के बाद विश्व इस्लामिक देशों संगठन के ओआईसी के असम संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देना भी इसी चुनावी प्रचार का हिस्सा हो सकता है कि वह देश में हिंदू वोटरों को यह मैसेज देना चाहती हो भाजपा की सरकार  किसी विदेशी  या मुसलमानों के दबाव में नहीं आने वाली है. भारत ने जवाब देते हुए जो भाषा इस्तेमाल की है वह किस बात का बिल्कुल संकेत है कि मोदी सरकार उत्तर प्रदेश को जीतने के लिए जी जान की बाजी लगाने को तैयार है.

Note: लेख में दिए गए विचार माजिद अली ख़ाँ के निजी हैं।

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