इमिग्रेशन क्लीयरेंस में देरी पर चिंता, एकरूप SOP लागू करने की मांग
नई दिल्ली:इमिग्रेशन क्लीयरेंस (EC) की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी, अतिरिक्त दस्तावेज़ों की मांग और विभिन्न कार्यालयों में अलग-अलग तरीकों को लेकर गंभीर चिंताएँ सामने आई हैं।
इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को एक लिखित प्रतिनिधित्व सौंपा गया है, जिसमें EC प्रणाली को सरल, समयबद्ध और उद्देश्यपरक बनाने की मांग की गई है।प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि कार्य वीज़ा संबंधित विदेशी सरकारें व्यापक जांच-पड़ताल के बाद ही जारी करती हैं। इसमें विदेशी नियोक्ता की वित्तीय स्थिति, कमर्शियल रजिस्ट्रेशन, प्रतिष्ठान आईडी, बुनियादी ढांचा, टर्नओवर और श्रम-आवश्यकता का आकलन शामिल होता है। ऐसे में वीज़ा जारी होने के बाद इमिग्रेशन क्लीयरेंस के स्तर पर उन्हीं बिंदुओं पर दोबारा सवाल उठाना या मामूली/दोहराए गए दस्तावेज़ मांगना प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल और विलंबित करता है।प्रतिनिधित्व में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रवासी श्रमिकों से जुड़ी अधिकांश शिकायतें वेतन, भुगतान में देरी या कार्य की प्रकृति से संबंधित होती हैं, न कि स्वयं इमिग्रेशन क्लीयरेंस प्रक्रिया से।
EC से सीधे जुड़ी शिकायतें अत्यंत दुर्लभ हैं। किसी भी शिकायत की स्थिति में कानूनी रूप से समाधान की जिम्मेदारी रिक्रूटिंग एजेंट (RA) की होती है, जिसे भारतीय मिशन, प्रोटेक्टर जनरल ऑफ एमिग्रेंट्स (PGE) और प्रोटेक्टर ऑफ एमिग्रेंट्स (POE) द्वारा मान्यता प्राप्त है। इसके बावजूद विभिन्न POE कार्यालयों द्वारा अलग-अलग प्रकार के अतिरिक्त दस्तावेज़ों पर ज़ोर दिए जाने को SOP की भावना के विपरीत बताया गया है।एक उदाहरण का हवाला देते हुए कहा गया है कि 20 दिसंबर 2025 को दायर की गई एक इमिग्रेशन क्लीयरेंस आवेदन 30 दिसंबर तक लंबित रही। ऐसी देरी के कारण प्रवासी श्रमिकों, विदेशी नियोक्ताओं और रिक्रूटिंग एजेंसियों को गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
कई मामलों में नॉन-रिफंडेबल हवाई टिकट रद्द हो गए, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ।प्रतिनिधित्व में ज़ोर दिया गया है कि इमिग्रेशन क्लीयरेंस में देरी या अस्वीकृति सीधे तौर पर बेरोज़गार युवाओं के विदेश में रोज़गार पाने के अधिकार को प्रभावित करती है।
मांग की गई है कि सभी POE कार्यालयों को स्पष्ट और एकरूप निर्देश दिए जाएँ ताकि प्रत्येक EC आवेदन या तो 48 घंटे के भीतर स्वीकृत किया जाए या SOP के अनुरूप स्पष्ट लिखित कारणों के साथ अस्वीकृत किया जाए। साथ ही, वीज़ा, बीमा और रोजगार अनुबंध को EC के लिए प्राथमिक और अनिवार्य दस्तावेज़ माना जाए तथा मामूली या सुधार योग्य कमियों के आधार पर आवेदन न खारिज किए जाएँ।पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से 22 दिसंबर से 30 दिसंबर 2025 की अवधि के दौरान कार्यालय-वार EC आँकड़े प्रकाशित करने की भी मांग की गई है, जिनमें प्राप्त, स्वीकृत, लंबित और अस्वीकृत आवेदनों की संख्या शामिल हो।संबंधित हलकों को उम्मीद है कि अधिकारी इस मुद्दे पर सहानुभूतिपूर्वक और गंभीरता से विचार करेंगे तथा इमिग्रेशन क्लीयरेंस प्रणाली में पारदर्शिता, एकरूपता और समयबद्ध निर्णय सुनिश्चित करेंगे, ताकि विदेश में रोज़गार के इच्छुक युवाओं को अनावश्यक प्रक्रियात्मक बाधाओं से राहत मिल सके।

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