अब्बास अंसारी की विधायकी बहाली पर अनिश्चितता के बादल

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा अब्बास अंसारी की दो साल की सजा रद्द किए जाने के बावजूद उनकी विधानसभा सदस्यता की बहाली पर अब भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की मऊ विधानसभा के पूर्व विधायक अब्बास अंसारी को मऊ की एमपी-एमएलए अदालत ने दो साल की सजा सुनाई थी, जिसके चलते उनकी विधायकी समाप्त कर दी गई थी। अंसारी ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 30 जुलाई 2025 को फैसला सुरक्षित रखा और 20 अगस्त 2025 को अपना निर्णय सुनाया।

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति समीर जैन ने फैसला सुनाते हुए अंसारी की सजा को रद्द कर दिया, निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी और सजा को निरस्त कर दिया। इस निर्णय के बाद व्यापक रूप से उम्मीद जताई जा रही थी कि उनकी विधानसभा सदस्यता तुरंत बहाल कर दी जाएगी।

लेकिन, प्रक्रियात्मक उलझनों और राजनीतिक खींचतान ने बहाली की राह रोक दी है। परंपरागत रूप से, जब सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट किसी सांसद या विधायक की सजा को रद्द करता है, तो लोकसभा अध्यक्ष या विधानसभा अध्यक्ष बहाली का आदेश जारी करते हैं और फिर सचिवालय द्वारा सदस्यता बहाल करने की अधिसूचना जारी की जाती है।

अब्बास अंसारी के मामले में अब तक ऐसा कोई आदेश या अधिसूचना जारी नहीं हुई है। विधानसभा सचिवालय का कहना है कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से बहाली का आदेश नहीं दिया है। साथ ही, उन्होंने यह भी तर्क दिया है कि मऊ की सीट को रिक्त दिखाया गया है और अंसारी ने अब तक बहाली के लिए कोई औपचारिक आवेदन नहीं दिया है।

इन दलीलों को जानबूझकर बहाली टालने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश की सियासत में यह चर्चा जोरों पर है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद अंसारी की आसानी से विधानसभा में वापसी के पक्ष में नहीं हैं। माना जा रहा है कि सरकार चाहती है कि अंसारी एक बार फिर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाएं और वहां से अपनी सदस्यता बहाली का स्पष्ट आदेश लेकर आएं।

अगर ऐसा होता है, तो यह संसदीय परंपरा से हटकर एक नई मिसाल होगी, जिसके दूरगामी और खतरनाक नतीजे हो सकते हैं। आलोचकों का कहना है कि हाईकोर्ट के फैसले को मान्यता न देना योगी सरकार की ओर से बेहद चिंताजनक संदेश है और इससे न्यायपालिका की गरिमा पर आंच आती है।

जैसे-जैसे गतिरोध जारी है, यह संभावना और मजबूत हो रही है कि अब्बास अंसारी को अपनी विधायकी की बहाली के लिए एक बार फिर अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।

courtesy:indiatomorrowhindi.com

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