दावा-ईरान ने 5000 लड़ाकों की मदद से प्रदर्शन को कुचला:धार्मिक यात्रा के बहाने इराक से बुलाया, सेना ने गोली चलाने से इनकार कर दिया था

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए 5,000 इराकी शिया लड़ाकों का सहारा लिया। CNN के मुताबिक यही वजह है कि प्रदर्शनकारियों की मौतों की संख्या अचानक बढ़ी और जिसके बाद प्रदर्शन शांत होने लगे।

 

रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई ने इनका इस्तेमाल तब किया, जब ईरानी सेना ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने से मना कर दिया था। इसके बाद खामेनेई ने इराकी शिया लड़ाकों की मदद ली। इन्हें धार्मिक यात्रा की आड़ में इराक से ईरान बुलाया गया। इन लड़ाकों में से कुछ का संबंध हिजबुल्लाह से भी था। इन्होंने खामेनेई के आदेश पर प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं जिसके बाद मौतों का आंकड़ा करीब 3,500 पहुंच गया।

पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) से जुड़े इराकी मिलिटेंट ग्रुप शिया बद्र आर्मी के लड़ाके। फोटो - फाइल
पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) से जुड़े इराकी मिलिटेंट ग्रुप शिया बद्र आर्मी के लड़ाके। फोटो - फाइल

बॉर्डर के रास्ते ईरान आए कट्टरपंथी संगठनों के लड़ाके

CNN के मुताबिक, पहले सिर्फ 800-850 लड़ाकों के ईरान आने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन 16 जनवरी को आई रिपोर्ट के मुताबिक ये आंकड़ा 5 हजार से ज्यादा बताया गया। इन्हें दक्षिणी बॉर्डर के पास मौजूद इराकी राज्य मायसान और वासित से ईरान लाया गया।

एक यूरोपीय मिलिट्री सोर्स ने भी इसकी पुष्टि की है कि करीब 800 शिया लड़ाके दियाला, मायसान और बसरा प्रांतों से ईरान पहुंचे। CNN ने इस मामले पर इराक सरकार और लंदन स्थित ईरानी दूतावास से रिएक्शन मांगा, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।

एक एक्सपर्ट ने कहा कि प्रदर्शनों का दबाने के लिए विदेशी मिलिटेंट ग्रुप्स का सहारा लेना खामेनेई की एक सोची-समझी रणनीति है, जिससे प्रदर्शनकारियों और विदेशी लड़ाकों में बीच किसी तरह के सहानुभूति न पनप पाए, ताकि सख्ती से कदम उठाए जा सकें।

 

ईरान के लिए काम करते हैं इराकी लड़ाके

ये लड़ाके उन सशस्त्र संगठनों से जुड़े हैं जिन्हें सीधे तौर पर तेहरान का वफादार माना जाता है। इनमें कताइब हिजबुल्लाह, हरकत हिजबुल्लाह, अल-नुजाबा, कताइब सैयद अल-शुहादा और बद्र संगठन शामिल हैं।

ये सभी सशस्त्र समूह इराक के एक छत्र संगठन पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज के तहत काम करते हैं, जिसे इराक में सरकारी समर्थन प्राप्त पैरामिलिट्री फोर्स माना जाता है।

इन्हें ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने ट्रेनिंग, हथियार और पैसा देकर खड़ा किया है। इसलिए इनकी असली निष्ठा इराकी सरकार से ज्यादा ईरान की सत्ता के साथ है।

धार्मिक यात्रा के बहाने 60 बसों में भरकर आए लड़ाके

इराकी गृह मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी अली डी. ने न्यूज एजेंसी मीडिया लेन को ईरान-इराक बॉर्डर पर बढ़ रही आवाजाही के बारे में बताया था। अली के मुताबिक, 11 जनवरी को 60 से ज्यादा 50 सीटर बसों में भरकर शिया तीर्थयात्री ईरान की ओर रवाना हुए।

अली ने बताया कि बसों में सिर्फ आदमी थे, न परिवार थे और नही कोई वृद्ध। सभी ने एक जैसी काली टीशर्ट पहनी हुई थी। CNN के मुताबिक, जिस दिन ये बसें ईरान पहुंची, तब तक ईरान के सभी 31 राज्यों तक सरकार विरोधी प्रदर्शन फैल चुके थे।

ईरानी विपक्षी नेता मेहदी रजा के मुताबिक, इराकी मिलिटेंट को सरकारी इमारतों और सैन्य मुख्यालयों के सामने तैनात किया गया।

ईरान की राजधानी तेहरान में फिलहाल प्रदर्शन शांत, लेकिन डिजिटल ब्लैकआउट की वजह से लोग जानकारी साझा नहीं कर पा रहे।
ईरान की राजधानी तेहरान में फिलहाल प्रदर्शन शांत, लेकिन डिजिटल ब्लैकआउट की वजह से लोग जानकारी साझा नहीं कर पा रहे।

मशीनगन लेकर ईरान की सड़कों पर घूम रहे लड़ाके

ईरान की राजधानी तेहरान के एक व्यक्ति के मुताबिक, इराकी लड़ाकों ने प्रदर्शनकारियों का नरसंहार करना शुरू कर दिया था, जिसके डर से विरोध प्रदर्शन बंद हो गए थे।

न्यूयॉर्क पोस्ट से हुई बातचीत में व्यक्ति ने कहा कि लोग अपने घरों से बाहर निकलने से डरने लगे थे, क्योंकि मशीनगन लिए इराकी लड़ाकों ने ईरान की सड़कों पर कब्जा कर लिया था। यही वजह है कि अब ईरान में बड़े स्तर पर कोई प्रदर्शन नहीं हो रहे हैं।

रॉयटर्स की रिपोर्ट में भी दावा किया गया कि पिछले कुछ दिनों से तेहरान में शांति है। शहर के ऊपर ड्रोन उड़ रहे हैं। 16 और 17 जनवरी को किसी तरह का विरोध प्रदर्शन दर्ज नहीं किया गया। हालांकि कुछ जगहों पर अशांति की खबरें आ रही हैं।

नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में मौजूद ईरानी मानवाधिकार संगठन से जुड़े महमूद अमीरी-मोगद्दाम ने शुक्रवार को बताया कि ईरान में अब तक लगभग साढ़े 3 हजार मौतें हुई हैं।

महमूद ने कहा कि विदेशी लड़ाकों के नरसंहार मचाने के बाद से फिलहाल प्रदर्शन शांत हैं।

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