CIA की ओर से विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल को धार्मिक आतंकी संगठन करार देने से बौखलाए संघ चिन्तक राकेश सिन्हा , क्या है पूरा मामला इस रिपोर्ताज से जानें
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नई दिल्ली. अमेरिका की ‘सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी’ (सीआईए) ने विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल को धार्मिक आतंकी संगठन बताया है। सीआईए ने अपनी वर्ल्ड फैक्टबुक में इन दोनों संगठनों को राजनीतिक दबाव वाले समूह में रखा है। यानी वो समूह जिनका राजनीति में सीधे तौर पर असर रहता है, लेकिन वे खुद कभी चुनाव में हिस्सा नहीं लेते हैं , दैनिक भास्कर के मुताबिक सीआईए ने आरएसएस, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस, महमूद मदनी की जमीयत उलेमा-ए-हिंद को राजनीतिक दबाव वाले समूह में रखा है। आरएसएस को राष्ट्रवादी संगठन बताया गया है, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को अलगाववादी संगठन कहा गया है और उलेमा-ए-हिंद को धार्मिक संगठन बताया गया है।
267 देशों की जानकारी मुहैया कराती है सीआईए वर्ल्ड फैक्टबुक
सीआईए हर साल 4 जून को अपनी वर्ल्ड फैक्टबुक प्रकाशित करती है। इसके जरिए अमेरिकी सरकार को अलग-अलग देशों के इतिहास, सरकार, आर्थिक स्थिति, ऊर्जा, भौगोलिक स्थिति, संचार और सैन्य ताकत जैसी जानकारियां मिलती हैं।
सीआईए के पास इस वक्त करीब 267 देशों का डेटा मौजूद है। एजेंसी ने इन जानकारियों को 1962 में इकट्ठा करना शुरू किया था। हालांकि, इसे 1975 में सार्वजनिक किया गया।
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भाजपा के पूर्व संयोजक ने बताया फेक न्यूज
बीजेपी संवाद सेल के पूर्व संयोजक खेमचंद शर्मा ने आज सीआईए के दावे को खारिज कर दिया और कहा कि ये एक फर्जी खबर है. उन्होंने ये भी कहा कि एजेंसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि हम वीएचपी और बजरंग दल को धार्मिक उग्रवादी संगठन बताने के दावे को पूरी तरह नकारते हैं और ये संगठन राष्ट्रवादी संगठन हैं ये सभी जानते हैं. शर्मा ने ट्वीट कर कहा कि इस रेफरेंस के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के तहत प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगाी.
सीआईए की इस रिपोर्ट को लेकर वीएचपी ने जवाब दिया है कि सीआईए द्वारा विश्व हिन्दू परिषद् और बजरंग दल को धार्मिक उग्रवादी संगठन घोषित करना घोर आपत्तिजनक, अपमानजनक तथा तथ्यों से परे है. ये संगठन पूर्ण रूप से देश भक्त हैं तथा इनकी गतिविधियां राष्ट्र को समर्पित हैं. 60 हजार से अधिक एकल विद्यालय तथा एक हजार से अधिक अन्य सेवा कार्य करते हुए विहिप देश के समग्र विकास के लिए समर्पित है. देश हित और हिंदू हितों के साथ ये संगठन कभी समझौता नहीं करते. इन सब तथ्यों की जानकारी सीआईए को न हो, ये संभव नहीं है. इसके बावजूद ये अनर्गल आरोप लगाना किसी निहित स्वार्थ के कारण ही संभव है. संभवतः भारत के चर्चों द्वारा लिखे गए पत्र भी इस षडयंत्र के भाग हैं.
अमेरिकी सरकार को अपनी एजेंसी को आदेश देना चाहिए कि त्रुटियों में सुधार कर भारत की जनता से क्षमा याचना करे. अगर जल्द ही ये सुधार नहीं हुआ तो विश्व हिन्दू परिषद वैश्विक स्तर पर सीआईए के खिलाफ आंदोलन छेड़ेगा.
संघ चिन्तक राकेश सिन्हा की बौखलाहट देखें उनके tweet से, अब अपनी बारी है तो किस तरह सीआईए को लताड़ रहे हैं , यही जब किसी अन्य ग्रुप के बारे में होता तो फिर .....क्या यही भाषा होती
http://ashrafbastavi.blogspot.com/2013/01/blog-post_4.html
आश्चर्य की बात है कि मामला आतंकवाद की जांच से संबंधित है, इसके बावजूद देश के बहुसंख्यक ( हिन्दू ) वर्ग की एनजीओज को जाँच के इस दायरे में नहीं लायागया है जबकि एनआईए के मद्देनजर 2008 से 2011 के बीच देश में आने वाले विदेशी दान का विवरण है यह वही समय है जब मुंबई ऐ टी एस के चीफ हेमंत करकरे ने पहली बार देश के सामने भगवा आतंकवाद का चेहरा बेनक़ाब किया था और माले गांव धमाके सहित अन्य मामलों में हिंदू चरमपंथी संगठनों के शामिल होने की बात कही गई थी. पुरोहित और प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित अन्य की गिरफ्तारी हुई थी,लेकिन एनआईए ने हिन्दू एन जी ओज का विवरण जानने की ज़हमत गवारा नहीं. की एनआईए ने ऐसा क्यों किया यह गौरतलब बात है. दूसरी ओर एक और पहलू इस से खुलकर सामने आया है कि देश में सबसे अधिक ईसाई मिशनरीज सक्रिय हैं उनकी संख्या सबसे अधिक है और दान भी ईसाई मिशनरीज सबसे जियादा प्राप्त करते हैं. गौरतलब है............
पूरा पढने के लिए क्लिक कीजिये
https://www.frontline.in/static/html/fl1925/stories/20021220005502700.htm
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नई दिल्ली. अमेरिका की ‘सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी’ (सीआईए) ने विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल को धार्मिक आतंकी संगठन बताया है। सीआईए ने अपनी वर्ल्ड फैक्टबुक में इन दोनों संगठनों को राजनीतिक दबाव वाले समूह में रखा है। यानी वो समूह जिनका राजनीति में सीधे तौर पर असर रहता है, लेकिन वे खुद कभी चुनाव में हिस्सा नहीं लेते हैं , दैनिक भास्कर के मुताबिक सीआईए ने आरएसएस, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस, महमूद मदनी की जमीयत उलेमा-ए-हिंद को राजनीतिक दबाव वाले समूह में रखा है। आरएसएस को राष्ट्रवादी संगठन बताया गया है, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को अलगाववादी संगठन कहा गया है और उलेमा-ए-हिंद को धार्मिक संगठन बताया गया है।
267 देशों की जानकारी मुहैया कराती है सीआईए वर्ल्ड फैक्टबुक
सीआईए हर साल 4 जून को अपनी वर्ल्ड फैक्टबुक प्रकाशित करती है। इसके जरिए अमेरिकी सरकार को अलग-अलग देशों के इतिहास, सरकार, आर्थिक स्थिति, ऊर्जा, भौगोलिक स्थिति, संचार और सैन्य ताकत जैसी जानकारियां मिलती हैं।
सीआईए के पास इस वक्त करीब 267 देशों का डेटा मौजूद है। एजेंसी ने इन जानकारियों को 1962 में इकट्ठा करना शुरू किया था। हालांकि, इसे 1975 में सार्वजनिक किया गया।
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भाजपा के पूर्व संयोजक ने बताया फेक न्यूज
बीजेपी संवाद सेल के पूर्व संयोजक खेमचंद शर्मा ने आज सीआईए के दावे को खारिज कर दिया और कहा कि ये एक फर्जी खबर है. उन्होंने ये भी कहा कि एजेंसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि हम वीएचपी और बजरंग दल को धार्मिक उग्रवादी संगठन बताने के दावे को पूरी तरह नकारते हैं और ये संगठन राष्ट्रवादी संगठन हैं ये सभी जानते हैं. शर्मा ने ट्वीट कर कहा कि इस रेफरेंस के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के तहत प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगाी.
सीआईए की इस रिपोर्ट को लेकर वीएचपी ने जवाब दिया है कि सीआईए द्वारा विश्व हिन्दू परिषद् और बजरंग दल को धार्मिक उग्रवादी संगठन घोषित करना घोर आपत्तिजनक, अपमानजनक तथा तथ्यों से परे है. ये संगठन पूर्ण रूप से देश भक्त हैं तथा इनकी गतिविधियां राष्ट्र को समर्पित हैं. 60 हजार से अधिक एकल विद्यालय तथा एक हजार से अधिक अन्य सेवा कार्य करते हुए विहिप देश के समग्र विकास के लिए समर्पित है. देश हित और हिंदू हितों के साथ ये संगठन कभी समझौता नहीं करते. इन सब तथ्यों की जानकारी सीआईए को न हो, ये संभव नहीं है. इसके बावजूद ये अनर्गल आरोप लगाना किसी निहित स्वार्थ के कारण ही संभव है. संभवतः भारत के चर्चों द्वारा लिखे गए पत्र भी इस षडयंत्र के भाग हैं.
अमेरिकी सरकार को अपनी एजेंसी को आदेश देना चाहिए कि त्रुटियों में सुधार कर भारत की जनता से क्षमा याचना करे. अगर जल्द ही ये सुधार नहीं हुआ तो विश्व हिन्दू परिषद वैश्विक स्तर पर सीआईए के खिलाफ आंदोलन छेड़ेगा.
संघ चिन्तक राकेश सिन्हा की बौखलाहट देखें उनके tweet से, अब अपनी बारी है तो किस तरह सीआईए को लताड़ रहे हैं , यही जब किसी अन्य ग्रुप के बारे में होता तो फिर .....क्या यही भाषा होती
अमेरिकी एजेंसी सीआईए सालाना एक वर्ल्ड फैक्टबुक प्रकाशित करती है जिसमें वो इंटेलीजेंस से जुड़े और तथ्यात्मक रेफरेंस सामग्री या मुद्दे अमेरिकी सरकार को मुहैया कराती है. इसमें इतिहास, लोगों की, सरकार की, एनर्जी, भूगोल, संचार, परिवहन, मिलिट्री और राष्ट्रीय जानकारी दी गई होती है. ये डेटा 267 देशों को मुहैया कराया जाता है. एजेंसी इस सामग्री को साल 1962 से प्रकाशित करती आ रही है लेकिन इसने इसे सार्वजनिक 1975 में करना शुरू किया
इस का इतिहास जानने के लिए निम्न लिखित दो रिपोर्ट्स को ज़रूर पढ़ें
हिंदू एनजीओज को मिलने वाले विदेशी दान का विवरण क्या हैं?
अशरफ अली बस्त्वी ,नई दिल्ली
A report details the means adopted by the United States-based India Development and Relief Fund to collect funds from U.S. corporates and channel them to Hindu fundamentalist organisations.
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