बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही चर्चा शुरू, कोरोना काल में विधायक जी कैसे मांगने आएंगे वोट

 

नई दिल्ली : चुनाव आयोग द्वारा बिहार में विधानसभा चुनाव की तिथियां घोषित होते ही गली-मोहल्लों में चुनावी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सभी जगह कोरोना काल में चुनाव और सियासी समीकरण की चर्चा होती रही। शुक्रवार को तो पूरा दिन ही चुनाव के बारे में तरह-तरह की चर्चा करते ही बीता। सभी चुनाव के विभिन्न पहलुओं पर अपना-अपना तर्क देते दिखे।

एनडीए और महागठबंधन के समर्थक अभी से अपने पक्ष में आंकड़े गिनाने शुरू कर दिए हैं। कौन किसके साथ रहेगा, यह भी कयास सभी लगाते रहे। घरों में लोग टीवी से चिपके रहे और अपने अपने इलाके की र्वोंटग की तिथि की जानकारी लेते रहे। दशहरा और दिवाली के बीच चुनाव खत्म करने को लेकर लोग चुनाव आयोग का अच्छा प्रयास मान रहे हैं।  वहीं, गांधी मैदान के पास बैठे कुछ लोग इस बार बदला-बदला नजारा रहने की बात कर रहे थे। स्टेशन गोलंबर के पास इस चर्चा में मशगूल दिखे कि नेता अबकी वोट मांगने कैसे जाएगा। कोरोना के चलते नेताजी को इस बार कोई वोटर बैठने को भी नहीं कहेगा। 

सियासी गुणा-गणित बैठाते रहे लोग
शुक्रवार दोपहर साढ़े तीन बजे दरियापुर इलाके में व्यवसायियों की मंडली मौजूद थी। बैठक में शामिल रमेश सिंह ने अपने साथी दुकानदार से पूछा ‘आएं हो, इलेक्शनवा के डेट त फाइनल हो गया। लेकिन इलेक्शन करावे में प्राण निकल जावेगा। कोरोना के कारण कोई घरहु से निकलेगा कि नहीं।’ साथी जयप्रकाश ने जवाब दिया ‘काहे नहीं निकलेगा। सब निकलेगा। जो कह ले पर इलेक्शन के दिन तक लोग के मूड बदलता है। तू का नया हो यहां, देखे नहीं हो का इलेक्शन।’ इस तरह की छोटी बैठकी एक नहीं कई देखने को मिला। कैट के प्रदेश अध्यक्ष भी दो-तीन लोगों से इलेक्शन की चर्चा करते दिखे। चाय पीते हुए देर तक अलग-अलग सीटों और राजनीतिक पार्टियों के समीकरणों की चर्चा होती रही। प्रदेश अध्यक्ष अशोक वर्मा ने सामने मौजूद एक सर्राफा कारोबारी से कहा कि अभी जो दिख रहा है उसमें कई तरह का बदलाव हो सकता है। देखिए डीजीपी साहब कहां से खड़ा होते हैं। आने वाले दिनों में बहुत कुछ तेजी से बदलेगा। 

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