आज से 50 वर्ष बाद की अररिया की नस्लें इन्हें याद करेंगीं
यह जान कर अच्छा लगा कि दीवानों की एक टीम हर जगह मौजूद होती है जो मिशन मोड में काम करती है

नई दिल्ली : ( अशरफ अली बस्तवी की रिपोर्ट ) इन्टरनेट रुपी ट्रेन पर दुनिया की सैर करते वक़्त कुछ प्लेटफ़ॉर्म तो ऐसे होते हैं जहां पर आप ठहरे बिना एक उचटती हुई नज़र डाल कर आगे बढ़ जाते हैं , कुछ मुकाम ऐसे आते हैं जहां रुक कर कुछ समय गुज़ारना चाहते हैं तो कुछ ऐसे भी होते हैं जहां पहुंच कर आप का दिल करता है कि घंटों रुकें आस पास का जाएजा लें और अपने साथ एक सुखद याद लेकर लौटें द संवाद ऐसा ही प्लेटफ़ॉर्म है जहां पहुंच कर देर तलक ठहरना चाहेंगे ,मुझे तो इसने घंटों रोके रखा .
बिहार के अररिया जिले के कुछ युवाओं ने अपने वर्तमान को डिजिटल दुनिया के पटल पर सुरक्षित करने की द संवाद नाम से एक अनोखी पहल शुरू कर रखी है .ये लोग यहाँ की सामाजिक,आर्थिक व राजनैतिक सरगर्मियों पर नज़र रखने के साथ साथ अपने आस पास की विभूतियों का नई नस्ल से परिचय कराने का एक दिलचस्प डिजिटल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म तैयार कर लिया है.
इसे देख मुझे बड़ी ख़ुशी हुई , निश्चय ही इनका कार्य देख आप का मन भी प्रफुल्लित होगा , दो दिन पहले डा .कमर फलाही साहब ने इस टीम का परिचय कराया और आज ही भाई अफ्फान कामिल से लगभग आधे घंटे की टेलीफोनिक मुलाक़ात रही.

यह जान कर अच्छा लगा कि दीवानों की एक टीम हर जगह मौजूद होती है जो मिशन मोड में काम करती है .
डॉ फ़रहा सिद्दीक़ी मतीन के बारे में मुझे बिलकुल पता नहीं था कि अररिया में एक ऐसी बेटी है जो English Poetry पर ऐसी गिरफ्त रखती है की हर साल एक कविता संकलन ले आती है .
संजर अहमद अलीग से खास मुलाक़ात , ताहा ख़ामोश साहेब से ख़ास बातचीत,विश्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सोपान जोशी जी से खास बातचीत ,भोला पंडित प्रणयी जी के साथ गुफ्तगू, रहबान अली राकेश का काव्य पाठ. महेंद्र यादव से खास बातचीत. परवेज़ आलम साहब से पत्रकारिता पर चर्चा , कुछ ऐसे एपिसोड मिले जिन्हों ने मुझे स्क्रीन पर घंटों रोके रखा .
जन पत्रकारिता के लिए विषय का चुनाव करते समय समाज का गहन अध्यन द संवाद की टीम रूचि को जाहिर करती है . समाज के सभी सभी वर्गों तक सीधी पहुंच यह बताती है समाज के प्रति संवेदन शील संवाद का एक अच्छा प्लेटफ़ॉर्म है .
इस लिए ऐसे जियालों के काम को लाइक, शेयर , सब्सक्राइब से आगे बढ़ कर उसका हिस्सा बनें , आज से 50 वर्ष बाद की अररिया की नस्लें इन्हें याद करेंगीं ,इन पर सेमीनार और सिम्पोजियम कर कर के धन्यवाद देंगीं .
इस लिए इनकी कद्र अभी से कीजिये यह लोग अपने समाज के लिए अहम् काम अंजाम दे रहे हैं . द संवाद को बहुत बहुत मुबारकबाद .
ऐसे ही लोगों के लिए शायर ने कहा है
मेरी हिम्मत को सराहो मेरे हमराह चलो
मैंने एक दीप जलाया है हवाओं के खिलाफ

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