इलाहाबाद हाईकोर्ट ने श्रावस्ती के बंद 30 मदरसों को खोलने का आदेश दिया

लखनऊ। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने श्रावस्ती ज़िले में जबरन बंद कराए गए 30 मदरसों को दोबारा खोलने का आदेश दिया है।

करीब चार महीने पहले राज्य सरकार ने मदरसों के खिलाफ एक अभियान शुरू किया था, जिसके तहत कई मदरसों को ध्वस्त कर दिया गया और कई अन्य को बंद करने का आदेश दिया गया। इन्हीं में श्रावस्ती के 30 मदरसे शामिल थे। सरकारी अधिकारियों का कहना था कि ये मदरसे “अवैध” हैं, बिना मान्यता के चल रहे हैं और सरकारी ज़मीन पर बने हैं। लेकिन आलोचकों का तर्क था कि इनको बंद करने और ध्वस्त करने की कार्रवाई में कानूनन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

सरकार की इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए इन मदरसों की प्रबंधन समितियों ने, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सहयोग से, इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। इनमें मदरसा मोइनुल इस्लाम क़स्मिया समिति द्वारा दाख़िल याचिका भी शामिल थी। इन याचिकाओं पर 21 अगस्त 2025 को जस्टिस पंकज भाटिया की अदालत में सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत चंद्रा ने दलील दी कि राज्य सरकार ने मनमाने ढंग से सभी 30 मदरसों को बंद करने का सामूहिक आदेश जारी कर दिया और इन्हें अपनी बात रखने का कोई मौका नहीं दिया गया। उनका कहना था कि नोटिस या तो सही तरीके से तामील ही नहीं किए गए या बिल्कुल भी नहीं दिए गए, जिससे सरकार की कार्रवाई अवैध और दुर्भावनापूर्ण हो गई।

वहीं, राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश ग़ैर-सरकारी अरबी और फ़ारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन और सेवा नियमावली 2016 के तहत की गई थी और इसमें कोई अवैधता नहीं थी।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस भाटिया ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फ़ैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि “बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए गए आदेश टिकाऊ नहीं हो सकते।” अदालत ने श्रावस्ती के सभी 30 मदरसों को तुरंत खोलने का निर्देश दिया।

फ़ैसले के बाद तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह “न्याय, संविधान और मदरसों की हिफ़ाज़त की जीत है।” उन्होंने कहा, “मदरसे देश और क़ौम दोनों की रीढ़ हैं। ये संस्थान ग़रीब बच्चों को मुफ़्त शिक्षा देते हैं और उन्हें अच्छा इंसान और ज़िम्मेदार नागरिक बनने की राह दिखाते हैं।”
हाईकोर्ट के इस आदेश से योगी सरकार बैकफुट पर आ गई है।

विपक्षी दलों ने सरकार पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने और मदरसा शिक्षा के ख़िलाफ़ कठोर रुख़ अपनाने का आरोप लगाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह आदेश न सिर्फ़ इन मदरसों के अधिकार बहाल करता है बल्कि यह भी संदेश देता है कि क़ानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
courtesy:indiatomorrowhindi.com

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