पैगंबर ए इस्लाम की शान में अपशब्द असहनीय- कलीमुल हफ़ीज़
जो लोग इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद पर कीचड़ फेंकते हैं, वे इंसान नही दरिन्दे हैं, ऐसे आसामाजिक तत्वों को सलाखों के पीछे होना चाहिए AIMIM -Delhi
नई दिल्ली (प्रेस विज्ञप्ति)
पैगंबर हजरत मुहम्मद पूरी दुनिया में लोगों के दिलों में बसते हैं। उनपर जान न्योछावर करने वाले करोड़ों अरबों की संख्या में हैं। उन का अपमान करना, ना केवल भारत के संविधान का अपमान है, बल्कि मानवता के लिए भी एक जघन्य अपराध है। ऐसे लोगों की जगह सिर्फ़ जेल है। ऐसे लोगों के कारण दुनिया भर में भारत बदनाम हो रहा है। लेकिन दुर्भाग्य से वर्तमान केंद्र सरकार ने ऐसे अज्ञानी गुंडों और भगवा आतंकवादियों को खुली छूट दे रखी है। ऐसे लोगों को गिरफ्तार करना और उन्हें कानून के अनुसार दंडित करना सरकार की जिम्मेदारी है। ये विचार दिल्ली एआईएमआईएम के अध्यक्ष श्री कलीमुल हफ़ीज़ ने प्रेस को जारी एक बयान में व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि कल जिस तरह प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया जैसे सम्माननीय संस्था में एक भगवा आतंकवादी नरसिंहानंद ने इस्लाम के पैगंबर के लिए निन्दात्मक शब्दों का प्रयोग किया है, इसकी कल्पना किसी भी सभ्य समाज में नहीं की जा सकती। किसी भी धर्म के आदर्श पुरुष की शान में अपशब्द कहने से समाज में नफ़रत और घृणा पैदा होती है। उन्होंने फाँसीवादियों से पूछा कि इस्लाम भारत में एक हजार से अधिक वर्षों से मौजूद है और हिंदू और मुस्लिम प्रेम और भाईचारे से रह रहे हैं कोई समस्या नहीं हुई।
लेकिन क्या कारण है कि जब से भाजपा सरकार आई है, रोज़ाना धार्मिक घृणा बढ़ती जा रही है। कभी अज़ान से परेशानी है, तो कभी बुरके से, कभी मंदिर में पानी पीने पर बच्चे की पिटाई होती है , कभी होटल और ढाबों पर हलाल होर्डिंग लगाने की बात की जाती है।आख़िर इस देश में यह सब कब तक होता रहेगा? कब तक मुसलमान अपना अपमान सहेंगे?इस मामले में राज्य की अरविंद केजरीवाल सरकार की भी पूरी जिम्मेदारी है क्योंकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नाक के नीचे यह सब हुआ है केजरीवाल पूरी दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं और उन्हें सबका ख्याल करना चाहिए। उन्होंने मुस्लिमों के घाव पर मरहम नहीं लगाया, खामोश रहे और जब मौका मिलता है तो वह जख्मों पर नमक जरूर छिड़कते हैं जैसा कि उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान तब्लीगी जमात पर आरोप लगाकर किया था। उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि दिल्ली में उन्हें मुसलमानों द्वारा ही कुर्सी पर बैठाया गया है।
मजलिस अध्यक्ष ने मुस्लिम विधायकों के आत्मसम्मान को भी चुनौती दी। उन्होंने कहा मुस्लिम विधायकों को अपनी सरकार पर दबाव बनाकर ऐसे असामाजिक तत्वों को सजा दिलवाना चाहिए। उन्होंने कहा सिर्फ दिल्ली पुलिस को दोषी ठहरा कर सरकार के प्रतिनिधि अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते। यदि मुस्लिम प्रतिनिधि पैगंबर मोहम्मद के अपमान पर चुप रहते हैं, तो उन्हें हज़रत मुहम्मद के अनुयायी कहलवाने का कोई अधिकार नहीं होगा।
कलीमुल हफ़ीज़ ने प्रेस क्लब के ज़िम्मेदारों से अनुरोध किया कि किसी को भी देश में नफरत फैलाने के लिए प्रेस क्लब का दुरुपयोग करने की अनुमति नही दी जानी चाहिए। प्रेस क्लब एक लोकतांत्रिक संस्था है और लोकतंत्र के अस्तित्व के लिए यह आवश्यक है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में कोई अलोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने पूछा कि नरसिंहानंद जैसे लोगों को इस्लाम और इस्लाम के पैग़मबर से क्या दुश्मनी है? उन्होंने ये भी कहा कि ये काम किसी अनजाने में नहीं बल्कि जान बूझकर समाज को विभाजित करने और आवश्यक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए किया गया है। दिल्ली मजलिस अध्यक्ष ने कहा कि नरसिंहानंद के कुकर्मों से भारत की छवि दुनिया भर में बिगड़ रही है। केंद्र सरकार को इन लोगों पर अंकुश लगाना चाहिए अन्यथा हमारे प्रधानमंत्री मुस्लिम दुनिया को क्या मुंह दिखाएंगे। उनके धार्मिक चरमपंथ के कारण, केंद्र सरकार पहले से ही दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों के निशाने पर है।
भारत की प्रतिष्ठा धूमिल हो गई है, अब लोग भारत के नाम से भी नफरत करने लगेंगे। उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि सभी लोकतांत्रिक तरीकों से इस अपमान का जवाब दें और इस समय पूरी दिल्ली में हज़रत मुहम्मद के जीवन पर आधारित साहित्य वितरित करें। भारत के लोगों के सामने अपने पैग़म्बर का परिचय कराएँ। कलीमुल हफ़ीज़ ने कहा कि उनकी पार्टी ऐसे तमाम गुंडों तथा समाज विभाजन करने वालों को सजा दिलाने की पूरी कोशिश करेगी।

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