प्रसिद्ध शैक्षणिक एवं साहित्यिक संस्था रबाब फाउंडेशन द्वारा एक अद्भुत "महफ़िल-ए-उर्दू" का आयोजन
मशहूर शायर, मुशायरे के संयोजक और पत्रकार मोईन शादाब को रबाब फाउंडेशन की सलाहकार परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया
नई दिल्ली (2 फरवरी): रबाब फाउंडेशन ने बहुत ही कम समय में अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और भारत समेत दुनिया भर के सैकड़ों उर्दू प्रेमियों को उर्दू लिखना पढना सिखाने और शायरी सिखाने का कर्तव्य पूरा किया है. यह एक बहुमूल्य सेवा है और इसके लिए प्रसिद्ध शायरा फ़ौज़िया रबाब, रबाब फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष और रबाब फाउंडेशन के सभी सहयोगी सराहना के पात्र हैं.
ये विचार मशहूर शायर, मुशायरे के संयोजक और पत्रकार मोईन शादाब ने रबाब फाउंडेशन के तत्वावधान में जामिया मिलिया इस्लामिया , नयी दिल्ली में आयोजित "महफिल-ए-उर्दू" में व्यक्त किये. इस अवसर पर फौ़जि़या रबाब ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया और घोषणा की कि मोइन शादाब को अपनी उपयोगी सलाह, सुझावों और अनुभवों से फाउंडेशन को मजबूत करने के लिए रबाब फाउंडेशन की सलाहकार परिषद के सदस्य के रूप में नामित किया गया है. इस अवसर पर रबाब फाउंडेशन के विभिन्न पाठ्यक्रमों से संतुष्ट लोगों ने फाउंडेशन की कक्षाओं और उर्दू के बारे में अपनी सराहनीय भावनाएं व्यक्त कीं. अनुवादक एवं कवि योगेन्द्र दत्त त्यागी ने कहा कि उर्दू पढ़ना-लिखना सीखने और शायरी को निखारने में रबाब फाउंडेशन का मुझ पर बहुत बड़ा उपकार है. आज मैं जो कुछ भी हूं उसमें फाउंडेशन का बड़ा योगदान है.
कॉर्पोरेट क्षेत्र से जुड़े कवि हमिंदर बी खन्ना ने कहा कि फाउंडेशन की कक्षाओं ने मेरे अंदर काव्यात्मक रुचि को विकसित करने और पोषित करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. सेवानिवृत इंजीनियर संदीप कल्हार ने भी फाउंडेशन के संबंध में सकारात्मक एवं वर्णनात्मक उद्गार व्यक्त किये. इंजीनियर दानिश खा़न ने भी स्वीकार किया कि उर्दू ज्ञान और काव्यात्मक प्रकृति को बढ़ावा देने में इस संगठन का मुझ पर गहरा प्रभाव पड़ा. नवोदित शायर ताबिश खा़न ने भावुक होकर कहा कि रबाब फाउंडेशन से जुड़ना मेरे जीवन की एक महत्वपूर्ण छण है. महफिल-ए-उर्दू में हास्य के मशहूर शायर अनस फै़जी ने अपने शेरों से महफिल को खूब हंसाया. जाने-माने आलोचक और कवि डॉ. खा़लिद मुबश्शिर ने अपनी नवीनतम कविता "छब्बीस जनवरी और एक लड़का" में वर्तमान युग के दुःख और शोक को बखू़बी दर्शाया है.
मशहूर युवा शायर सफी़र सिद्दीकी़ ने अपने रंग की मौलिक ग़ज़ल पढ़ी. युवा कवि और रिसर्च स्कॉलर शाहरुख़ अ़बीर, शायरा और रिसर्च स्कॉलर मुनज़्ज़ा क़य्यूम और जामिया के छात्र नवेद यूसुफ ने अपनी ग़ज़लों से दर्शकों का मनोरंजन किया. इस सत्र में जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नयी दिल्ली के प्रोफे़सर डॉ. अदील अहमद, वरिष्ठ साहित्य प्रेमी साह़ब हु़सैन, द विंग्स फा़उंडेशन के निदेशक डॉ. अनवावरुल हक, ऑक्सफो़र्ड इंटरनेशनल के निदेशक तफ़हीमुर रह़मान सिद्दीकी़, बांग्लादेश में एमबीबीएस छात्र फ़ायका़ क़य्यूम और नायाब वर्ल्ड यूट्यूब चैनल के तौसीफ ह़बीब और अन्य लोग उपस्थित थे.

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