300 सरकारी वेबपोर्टल सट्‌टेबाजों के कब्जे में:विदेशों में बैठे हैकर्स की करतूत; कई राज्यों के विभागों को पता भी नहीं

लेखक: गुरुदत्त तिवारी

देश में 21 लाख से भी ज्यादा सरकारी वेबसाइट्स हैं, जिन पर रोज लाखों लोग विजिट करते हैं। चिंता की बात ये है कि केंद्र व राज्य सरकारों के ऐसे 300 से भी ज्यादा वेबपोर्टल हैकर्स के कब्जे में हैं। वे इन पर ऑनलाइन गेमिंग और क्रिकेट सट्‌टेबाजी के विज्ञापन दिखाते हैं। जैसे ही कोई इस पर क्लिक करता है तो ये उसे पेमेंट गेटवे से जोड़ देते हैं।

 

इन यूआरएल का लिंक सोशल मीडिया के जरिए देश के छोटे-छोटे शहरों तक भी भेजा जा रहा है। केंद्र की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सर्ट) ने ऐसी कई वेबसाइट्स चिह्नित की हैं। नकली और मिलावटी सामान के प्रति आगाह करने वाले भारत मानक ब्यूरो का पोर्टल भी इन सटोरियों के हत्थे चढ़ चुका है।

इंडोनेशिया, थाइलैंड और पाक में बैठे स्कैमर इसके जरिये हजारों करोड़ रुपए के दांव लगवा रहे हैं। समस्या यह है कि कई राज्यों को इस तरह की हैकिंग की जानकारी तक नहीं है। मप्र का रेशम संचालनालय, केरल, तेलंगाना व उत्तराखंड सरकार के कई विभाग इससे अनजान हैं। कई सरकारें जानकारी होने के बाद भी तत्काल एक्शन नहीं ले रहीं।

रैनसमवेयर अटैक से साइबर सिक्योरिटी टीम का डेटा ब्लॉक कर रहे हैकर्स
इस हैकिंग की जानकारी केंद्र की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सर्ट) के पास भी है। मगर साइबर सिक्योरिटी टीम इसे ठीक करने में जुटती है तो हैकर्स पोर्टल का पूरा डेटा कब्जे में लेकर रैनसमवेयर अटैक कर देते हैं। साइट पर एकत्र डेटा ही एक्सेस नहीं करने देते। सरकार की दर्जनों वेबसाइट रोज रैनसमवेयर की शिकार बन रही हैं।

इन वेबसाइट्स पर ऑनलाइन गेमिंग व क्रिकेट सट्‌टेबाजी के लिंक...

  • ciae.icar.gov.in - यह केंद्र सरकार का कृषि अनुसंधान विभाग।
  • foldcope.dbtindia.gov - यह केंद्र सरकार का डीबीटी पोर्टल।
  • uia.mic.gov.in - यह यूनेस्को इंडिया की वेबसाइट का लिंक है।
  • sic.mic.gov.in- स्कूल ऑफ इनोवेशन काउंसिल, केंद्र सरकार।
  • etapal.mhada.gov.in - महाराष्ट्र सरकार का हाउसिंग विभाग।
  • eresham.mp.gov.in - मप्र सरकार का रेशम डायरेक्टोरेट।
  • uic.uk.gov.in - उत्तराखंड सूचना आयोग।
  • services.bis.gov.in - भारत मानक ब्यूरो।
  • chennaiport.gov.in - चेन्नई पोर्ट।

ऐसे 300 से ज्यादा सरकारी पोर्टल पर सट्‌टेबाजी के लिंक भेजे जा रहे हैं।

यूं चल रहा खेल; मैच के दौरान सबसे ज्यादा भेजे जाते हैं लिंक
ये लिंक उस समय खासतौर पर भेजे जाते हैं, जब कोई क्रिकेट मैच चल रहा हो। आईपीएल में तो यह पूरे जोर पर चलता है। हैकर सरकारी वेब पोर्टल के यूआरएल को केवल विज्ञापन के लिए लोगों तक भेजते हैं। जैसे ही कोई गेम के लिए लॉग-इन होता है, उसे अपने पेमेंट गेटवे पर ले जाते हैं। इस पेमेंट गेटवे पर वॉलेट होते हैं। गेम खेलने के लिए इसे रिचार्ज करना पड़ता है यानी पूरा पैसा एडवांस। विकल्प के तौर पर क्रिप्टो से पैसा मंगाया जाता है। जीतने पर इसी चैनल से पैसा वापस आता है।

courtesy : www.bhaskar.com

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