कल्छीना की बेटियों आप के जज़्बे को सलाम !
नई दिल्ली : (एशिया टाइम्स / अशरफ अली बस्तवी ) आज 17 जनवरी 2021 का दिन बेहद खास रहा कारवां दिल्ली व एन सी आर के के 5 मेम्बेर्स जुबैर साहब , खुर्शीद साहब , नवेद साहब , इरफ़ान साहब , अशरफ अली बस्तवी ,ने उत्तर प्रदेश के गाज़िया बाद में ‘आज़म महल ,कल्छीना’ का दौरा किया.
यहाँ मोहतरम अकबर अली साहब ने इन्तहाई गर्मजोशी से स्वागत किया , अकबर साहब बेहद सरल एवं जुझारू व्यक्तित्व के मालिक हैं उन्हों ने ,कल्छीना’ की सामाजिक, आर्थिक व तालीमी स्थिति की तफ्सीली रिपोर्ट कुछ इस तरह बताई कि ‘कल्छीना’ का शानदार माज़ी हमारे नज़रों में तैरने लगा लेकिन अगले ही पल हमारी ख़ुशी धुंधली होने लगी जब उन्हों ने बताया कि किस तरह समय बीतने के साथ नई नस्ल तालीम से दूर होती चली गई ,कभी इस गाँव में 400 से अधिक सरकारी नौकरी करने वाले लोग होते थे .

30000 की आबादी वाले इस गाँव में मात्र तीन प्रतिशत हिन्दू भाइयों के यहाँ 2 IPS, 3 दरोगा और पुलिस समेत अन्य पदों पर लोग हैं लेकिन यहाँ का मुस्लिम नौजवान बेकारी का शिकार है . उस से भी ज्यादा शर्मनाक बात यह है कि इस नुकसान का उसे एहसास तक नहीं है .अलबत्ता बेटियों में आगे बढ़ने का जज्बा खूब देखा जा सकता है ,
अकबर साहब ने कारवां टीम की मुलाक़ात गाँव की बेटियों के एक ग्रुप से कराया
कल्छीना की सभी बेटियाँ बड़ी होनहार हैं और भविष्य का अपन सपना रखती हैं ,कोई डॉक्टर बनना चाहती है तो कोई IPS बनने की राह तलाश रही है तो कोई वकील बन कर समाज को मज़बूत करने का ख्वाब रखती है तो कोई बेटी टीचर बन कर समाज को शिक्षित करना चाहती है हर एक का अपना ख्वाब है.
उन सब का ख्वाब पूरा करने में ‘कारवां’ क्या योगदान दे सकता है और कैसे इनकी मदद की जा सकती है , इन्ही बातों को जानने के लिए आज का यह दौरा किया गया .

इन बेटियों से मिलकर उनके हौसलों को देख कर यह लगा कि अभी भी वक़्त है कि अगर हम ने इनको पढ़ा दिया तो आने वाली हमारी नस्लें महफूज़ हो जाएँगी. .
कारवां के लिए ख़ुशी की बात यह है कि अकबर साहब जैसे जमीनी सामाजिक कार्यकर्ता जो अपने नागरिक अधिकारों से अच्छी तरह बा खबर हैं और उनको हासिल करना भी जानते हैं .
कल्छीना का कन्या इंटर कॉलेज इस की जिंदा मिसाल है कि किस तरह तमाम समाजी व कानूनी अडचनों के बावजूद अकबर साहब के वालिदैन बेटियों के लिए अपने गाँव लाने में कामयाब रहे ,जिस की बदौलत आज यहाँ की बेटियाँ इंटर कॉलेज तक की पढाई कर पा रही हैं .
बेटियों से गुफ्तगू और अकबर साहब से मशविरे से तै पाया
- बेटियों से गुफ्तगू और अकबर साहब से मशविरे से तै पाया कि उनकी तालीमी ज़रुरत के लिहाज से एक अच्छी कोचिंग का बंदोबस्त किया जाय.
- कोचिंग के लिए एक काबिल टीचर पहली ज़रुरत है .
- अकबर साहब ने आज़म महल जो कि उनका घर है उसके एक हिस्से को ‘कारवां कोचिंग’ सेंटर चलाने के लिए दे दिया है .
- यहाँ एक ऐसी लाइब्रेरी कायम की जाय जिसमें ज़रूरी किताबें हों .
- कारवां के साथी समय समय पर Motivational स्पीच का भी बंदोबस्त करें.
अकबर अली साहब का बहुत शुक्रिया आप का यह जुमला कि समाजी काम करने के लिए आप के पास उसके लिए ‘समय और जज़्बा ’ दोनों हो यही मूलमंत्र हैं. हम उम्मीद करते हैं कि अज के दौरे से साथियों ने जो कुछ सीखा है उसे याद रखेंगे और कारवां को आगे ले जाने में अपने हिस्से का दिया ज़रूर जलाएं गे .
यह और बात की हमारी बस में नहीं है
मगर चिराग जलना तो अख्तियार में है
अज़हर इनायती
अल्लाह हम सब का हामी व नासिर हो, आमीन

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