‘पयाम’  के बैनर तले “अल्पसंख्यकों में शैक्षणिक पिछड़ापन और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान”, विषय पर  परिचर्चा

मुसलमान और दलित अपनी संवैधानिक माँगों को साथ मिलकर उठाएं : प्रोफेसर सुबोध नारायण मालाकार (JNU)

Ashraf Ali Bastavi

नई दिल्ली : गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रोग्रेसिव यूथ अवेयरनेस मिशन  पयाम  के बैनर तले “अल्पसंख्यकों में शैक्षणिक पिछड़ापन और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान”, विषय वस्तु पर  एक सामुहिक परिचर्चा का आयोजन किया गया. इस परिचर्चा की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली के पूर्व निदेशक प्रोफेसर सुबोध नारायण मालाकार ने की, उन्होंने कहा कहा,

” देश की वर्तमान सरकार अल्पसंख्यकों को ही आपस में लड़वा रही है इसका प्रमाण देश के छोटे-छोटे दंगों में दिखता हैं, जहाँ देश के  दलित बुद्धिस्टों को आगे कर कुछ समूह अपनी राजनैतिक रोटी सेंकते आए हैं. अल्पसंख्यकों में मुसलमानों को चाहिए कि देश के अन्य अल्पसंख्यकों जैसे बुद्धिस्टों, सिखों, ईसाईयों एवं पारसियों को अपने साथ लेकर चले और अपने संवैधानिक माँगों को एक साथ उठाएं.

सभा को संबोधित करते हुये महासचिव शाहनवाज़ भारतीय

प्रोग्रेसिव यूथ अवेयरनेस मिशन के राष्ट्रीय महासचिव शाहनवाज़ भारतीय ने विस्तार से अल्पसंख्यको के  स्थिती पे अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि, “आजादी के इतने साल बाद तक लगभग सभी सरकारों ने मुसलमानों को सब्ज़ी में पड़े उस गरम मसाले की तरह उपयोग किया है जिसे स्वाद के लिए तो डाला जाता है पर खाते वक़्त निकाल के खाया जाता है.

हमारे देश में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति किसी से छुपी नहीं है पर इसमें भी अल्पसंख्यकों का हाल ख़स्ताहाल है. और अल्पसंख्यकों में मुसलमानों की प्रस्थिति तो दयनीय है.

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आजादी के इतने साल बाद तक लगभग सभी सरकारों ने मुसलमानों को सब्ज़ी में पड़े उस गरम मसाले की तरह उपयोग किया है जिसे स्वाद के लिए तो डाला जाता है पर खाते वक़्त निकाल के खाया जाता है, अगर ग़लती से भी एक भी सब्ज़ी के साथ मुँह में चला गया तो उसको सब्ज़ी सहित उगल देते है.

परिचर्चा में मौजूद दर्शक

बहरहाल, सरकारों ने शिक्षा को संयुक्त सूची का विषय कहकर लगातार अपने उत्तरदायित्व से भागने का काम किया है, जिस से शिक्षा मौलिक अधिकार होकर भी जनता से दूर है.

आगे उन्होंने कहा कि, ” सरकारों का यह उत्तरदायित्व है कि सरकारें हक़ीक़त में सबका सर्वांगीण विकास करे वरना विकास पथ पर चल रही देश की गाड़ी कई जगह रुक जाएगी. समाज का यह दायित्व है कि सरकार की नीतियों को अपने समाज में लागू करने में पूर्णतः सहयोग दें.

पयाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष नजीब चौधरी ने कहा कि, ” हमारे सामने बहुत सारी समस्याएँ हैं पर हम सबको मिलकर पहले शिक्षा पे काम करना चाहिए. हमें अपने देश के खोये वकार को पुनः वापस लाकर देश को सही अर्थ में विश्वगुरु बनाना है. इस परिचर्चा की निजामत अबरार नदवी ने की.

मुख्य अथिति को स्नामनित करते हुये “पयाम” के प्रधान

प्याम के उपाध्यक्ष श्री नूरुल्लाह खान ने अपने संबोधन में कहा कि आज ही के दिन 26 जनवरी 1950 को देश को संविधान मिला जो हमारे अधिकारों का पिटारा है. आज 70 वर्षों बाद खुश ना होकर हमें समीक्षा करना चाहिए कि हम इतने पिछड़े क्यों, हम को प्याम के इस बैनर से क़ौम को नई दिशा देने की ज़रूरत है

“पयाम” के उपाध्यक्ष नूरुल्लाह खान

याम के सचिव नियाज अहमद ने विषय वस्तु पर अपनी एक विस्तृत अनुसंधानिक विवरण प्रस्तुत किया. माजिद खान ने कहा कि, हमें अपने-अपने ग्रमीण क्षेत्र पे केंद्रित होकर मयारी स्कूल क़ायम करना होगा जिसमें सारे धर्म के बच्चे पढ़ पाएँ. ख़ालिद सुहैल साहब ने कहा कि,”हमारी तनजजुली का सबब  हमने ख़ुद पैदा नहीं किया बल्कि सरकार द्वारा पैदा किये हालात ने हमें ऐसा बनाया है. हमें हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए भी काम करना होगा और सबको साथ लेके चलना होगा.  पयाम के अन्य साथी जावेद अशरफ़, नुरुल्लाह खान, शफ़ीक़ रहमान, ज़ाहिद अहसान, सेराज तालिब, समी खान, ओबैदुल्लाह सनावली, साईदुर रहमान और ओबैदुल्लाह इंजीनियर ने अपनी-अपनी इज़हारे ख़्याल पेश किया.

गोदी मीडिया की चाटुकारिता अपनी चरम सीमा पर:

 

 

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