क्या यूपी में मुर्दे भी ले रहे हैं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ ?
लखनऊ | यूपी में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ मुर्दे भी ले रहे हैं। 2019 से लेकर अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि पाने वाले कितने किसान मर गए और कितने इस निधि का पैसा ले रहे हैं, इसके बारे में कभी कोई जांच करना उचित नहीं समझा गया, क्योंकि भाजपा को सत्ता मिल गई थी और नरेंद्र मोदी की सरकार बन गई थी।
2019 से लेकर अब तक यूपी में 77,889 किसानों की मौत हो गई। बताया जाता है कि मृतक किसानों के खाते में लगभग 100 करोड़ रुपए भेजा गया है। मरे हुए किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि दी जाती रही। मुर्दा किसानों का यह पैसा मृतक किसानों के आश्रित लेते रहे या कोई और, इसको बताने वाला कोई नहीं है। वास्तविक स्थिति का आंकलन किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की शुरुआत मोदी सरकार ने 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए किसानों को अपने पाले में लाने के लिए किया था। इसके पीछे भाजपा की यह सोच थी कि यदि देश के किसानों को खेती-किसानी के लिए मदद के नाम पर उनको अगर कुछ धनराशि दी जाए, तो किसान भाजपा के पक्ष में खड़े हो सकते हैं और किसानों का वोट भाजपा को मिल सकता है। किसानों के भाजपा के साथ आने से केंद्र में सरकार बनाने में उसको बड़ा फायदा मिल सकता है, क्योंकि किसानों के वोट भाजपा को मिलने से अधिक लोकसभा सदस्य चुनाव में जीतकर आ सकते हैं। भाजपा की इसी सोच पर चलते हुए मोदी सरकार ने 2019 में फरवरी माह में इस योजना की शुरुआत की।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में पात्र किसानों के खाते में चौथे, आठवें और बारहवें महीने 2-2 हजार रुपए देने की केंद्र सरकार ने व्यवस्था की।इस तरह केंद्र सरकार ने किसानों को एक साल में 6 हजार रुपए देना तय किया। इसके बाद मोदी सरकार ने किसानों को उनके खाते के जरिए 2 हजार रुपए देना शुरू किया। अकेले यूपी में 2 करोड़, 55 लाख और 80 हजार किसानों के खाते में 45 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा भुगतान किया गया।
इसका असर यह हुआ कि किसानों ने लोकसभा चुनाव में भाजपा का साथ दिया है और यूपी से 80 में से भाजपा के 64 लोकसभा सदस्य चुने गए। भाजपा को बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी की अगुवाई में दोबारा केंद्र में भाजपा की सरकार फिर बन गई। केंद्र में दोबारा भाजपा की सरकार बनने के बाद पार्टी खुश हुई और मोदी सरकार ने इस योजना को जारी रखा।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का फायदा किसानों को ही नहीं हुआ बल्कि भाजपा को भी हुआ। किसानों को रुपये मिले और भाजपा को सत्ता। भाजपा को सत्ता क्या मिली कि उसने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की समीक्षा करना भी जरूरी नहीं समझा। 2019 से लेकर अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि पाने वाले कितने किसान मर गए और कितने इस निधि का पैसा ले रहे हैं, इसके बारे में कभी कोई जांच करना उचित नहीं समझा गया, क्योंकि भाजपा को सत्ता मिल गई थी और नरेंद्र मोदी की सरकार बन गई थी।
सत्ता का सुख भोगते हुए इस ओर किसी को कुछ देखने और सोचने-समझने की फुर्सत ही नहीं रही। 2019 से लेकर अब तक यूपी में 77,889 किसानों की मौत हो गई। लेकिन मरे हुए किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि दी जाती रही। मुर्दा किसानों का यह पैसा मृतक किसानों के आश्रित लेते रहे या कोई और। इसको बताने वाला कोई नहीं है। बताया जाता है कि मृतक किसानों के खाते में इस तरह लगभग 100 करोड़ रुपए भेजा गया है। वास्तविक स्थिति का आंकलन किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में इस भारी गड़बड़ी का पता उस समय चला, जब किसान सम्मान निधि पाने वाले मृतक किसानों के आश्रितों ने वरासत कराई और उत्तराधिकार प्रमाण पत्र बनवाया। इनके बनाने में हुई जांचों में इसका खुलासा हुआ। इस खुलासे के होने से प्रशासनिक क्षेत्र में हड़कंप मच गया। बताया जाता है कि इस गड़बड़झाले की जानकारी योगी आदित्यनाथ की सरकार को भी हो गई थी, लेकिन यूपी में विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस मामले को दबा दिया गया।
इसके सामने आने से और कार्यवाही होने से किसानों में योगी सरकार के प्रति नाराज़गी होने तथा किसानों के भाजपा के खिलाफ जाने का खतरा उत्पन्न हो गया था। इससे विधानसभा चुनाव में भाजपा का नुकसान हो सकता था, इसलिए इस मामले पर पर्दा डालने का काम किया गया। चर्चा यह भी है कि इस मामले का भंडाफोड़ शासन द्वारा स्पेशल ऑडिट सर्वे कराने से हुआ है। मजे की बात यह है कि इस संबंध में मृतक किसानों के आश्रितों /वारिसों द्वारा न तो कोई सूचना दी गई और न ही बैंकों द्वारा कोई सूचना दी गई।
यूपी के कृषि निदेशालय द्वारा इस संबंध में राज्य के सभी जिलों के कृषि विभाग के अधिकारियों को एक पत्र भेजकर इस मामले की जानकारी दी गई है। जिलों के सम्बंधित कृषि अधिकारियों से इस मामले के सत्यापन कराने, उसके बाद मृतक किसानों के वारिसों को नोटिस देने तथा अंत में दी गई रकम की रिकवरी की तैयारी करने के लिए कहा गया है।
उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव कृषि डॉ. देवेश चतुर्वेदी का इस बारे में कहना है कि, “तीन साल में जितने वरासत के मामले दर्ज किए गए हैं, उनमें यह पता लगाया जाएगा कि ऐसे कितने मामलों में धनराशि भेजी गई है। अगर मृतकों के खाते उनके वारिसों के नाम चले गए हैं, तो वारिसों के खाते से यह धनराशि रिकवरी की जाएगी। वरासतों के मामलों का मिलान किया जा रहा है। इसके बाद इस प्रकार के मामलों की संख्या बढ़ भी सकती है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का पैसा जिस प्रकार से मुर्दे अभी तक लेते रहे हैं, यह बहुत ही गम्भीर मामला है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के रूप में आंख मूंदकर जिस तरह से पैसा दिया गया है, यह बहुत बड़ी चूक है। इसी प्रकार से चूक होने या अधिकारियों की मिलीभगत होने से बड़े-बड़े आर्थिक घोटाले होते हैं। अगर राजनीतिक नफा-नुकसान की बात न होती, तो शायद इस प्रकार की यह बड़ी गड़बड़ी न होती। लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए सरकारी पैसे को बांटने में आंखें मूंदकर बैठे रहना बहुत बड़ी गड़बड़ी है, जिसे कहीं से भी उचित नहीं कहा जा सकता है।

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