जयशंकर बोले- भारत-रूस रिश्ते दुनिया में सबसे स्थिर:कहा- चीन-अमेरिका के साथ संबंध बदले, सोवियत संघ टूटा लेकिन रूस से रिश्ते पहले जैसे

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। दोनों के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। इससे पहले जयशंकर ने मंगलवार को मॉस्को में भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की।

उन्होंने कहा- दुनिया में सिर्फ भारत-रूस के रिश्ते ही स्थिर हैं। इसके अलावा सभी देशों के संबंधों में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। रूस में भारतीय समुदाय के लोगों से बात करते हुए विदेश मंत्री ने ये बात कही।

जयशंकर ने कहा- हम मिलिट्री, स्पेस और न्यूक्लियर एनर्जी के मामले में सिर्फ उसी देश के साथ साझेदारी करते हैं, जिस पर हमें पूरा भरोसा होता है। भारत-रूस के रिश्ते कई मायनों में खास हैं। अगर 60, 70 या 80 के दशक पर नजर डाली जाए, तो अलग-अलग देशों में कई स्तर पर रिश्ते बने हैं। फिर चाहे वो रूस-चीन, रूस-अमेरिका, रूस-यूरोप हो या फिर भारत-चीन, भारत-अमेरिका।

तस्वीर मंगलवार की है, जब विदेश मंत्री जयशंकर ने मॉस्को में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित किया था।
तस्वीर मंगलवार की है, जब विदेश मंत्री जयशंकर ने मॉस्को में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित किया था।

70-80 दशक में दुनिया बदली, लेकिन हमारे रिश्ते नहीं
जयशंकर ने कहा- इन सब देशों में कभी तनाव तो कभी अच्छे रिश्ते रहे। पिछले 70-80 दशकों में रूस और भारत में कई तरह के बदलाव हुए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीति भी बदली, लेकिन दोनों देशों के बीच का कनेक्शन स्थिर रहा।

भारतीय समुदाय से विदेश मंत्री ने कहा- मेरे लिए जो बात दोनों देशों के संबंध को खास बनाती है वो यह है कि 1950 के दशक के बाद, पिछले 70-80 सालों में दुनिया में कई बड़े बदलाव आए। सोवियत संघ रूस में बदल गया। भारत ने भी अलग-अलग क्षेत्रों में विकास किया। इस बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सिर्फ भारत-रूस के रिश्ते ही ऐसे हैं, जिसमें कोई बदलाव नहीं आया।

इस साल यह 7वीं बार है जब भारत-रूस के विदेश मंत्रियों के बीच मुलाकात हुई है। इससे पहले G20 समिट के वक्त भी दोनों नेता मिले थे। तब रूस के राष्ट्रपति की जगह विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे।

एनुअल समिट के लिए रूस नहीं गए PM मोदी
ये दूसरी बार है, जब भारत-रूस के बीच एनुअल समिट में PM नरेंद्र मोदी शामिल नहीं हुए। दरअसल, दोनों देशों के बीच हर साल वार्षिक सम्मेलन होता है। इस एक देश के लीडर दूसरे देश का दौरा करते हैं। समिट का वेन्यू ऑल्टरनेट तौर पर दोनों देशों में तय किया जाता है।

रूस-भारत में अब तक 21 एनुअल समिट हो चुकी हैं। आखिरी समिट 2021 में हुई थी, जब पुतिन भारत के दौरे पर आए थे। 2022 में यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद PM मोदी रूस के दौरे पर नहीं गए। इसके बाद इस साल सितंबर में रूसी राष्ट्रपति पुतिन भी G20 के लिए भारत नहीं आए थे।

पुतिन ने मॉस्को में आयोजित 14वें VTB इन्वेस्टमेंट फोरम 'रूस कॉलिंग' में PM मोदी की तारीफ की।
पुतिन ने मॉस्को में आयोजित 14वें VTB इन्वेस्टमेंट फोरम 'रूस कॉलिंग' में PM मोदी की तारीफ की।

पुतिन ने कहा था- मोदी को डराया-धमकाया नहीं जा सकता
हालांकि इस बीच पुतिन कई मंचों पर PM मोदी की तारीफ कर चुके हैं। हाल ही में मॉस्को में आयोजित 14वें VTB इन्वेस्टमेंट फोरम 'रूस कॉलिंग' में पुतिन ने कहा था- प्रधानमंत्री मोदी खुद रूस और भारत के रिश्तों की गारंटी हैं। उन्हें राष्ट्रीय हितों के विपरीत फैसले लेने के लिए डराया या मजबूर नहीं किया जा सकता।

पुतिन ने कहा था- जब राष्ट्रीय हितों की रक्षा की बात आती है तो PM मोदी के सख्त रुख की तारीफ की जाती है। मैं कल्पना नहीं कर सकता कि मोदी को ऐसे कोई भी काम करने, कदम उठाने और निर्णय लेने के लिए डराया, धमकाया या मजबूर किया जा सकता है जो भारत और भारतीय लोगों के खिलाफ हो।

PM मोदी की तारीफ करते हुए उन्होंने आगे कहा था कि रूस और भारत के रिश्ते लगातार डेवलप हो रहे हैं और इसकी गारंटी प्रधानमंत्री मोदी की नीति है। ईमानदारी से कहूं तो कभी-कभी भारतीय लोगों के राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा पर उनके सख्त रुख से मुझे हैरानी भी होती है।

 

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