राजस्थान में भाजपा को सत्ता में लाने के लिए RSS ने संभाली कमान, झुंझुनूं में की तीन दिवसीय बैठक
नई दिल्ली | राजस्थान में भाजपा को सत्ता दिलाने यानी सत्ता में बैठाने के लिए आर एस एस ने कमान संभाल ली है। भाजपा को सत्ता में बैठाने के लिए आर एस एस ने राजस्थान के झुंझुनूं में एक तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। भाजपा को राजस्थान की सत्ता में बैठाने की संघ ने योजना बनाई है। इसी योजना को अमली जामा पहनाने के लिए आर एस एस की आज राजस्थान में तीन दिवसीय बैठक हुई।
इस महत्वपूर्ण बैठक में आरएसएस के 45 प्रांत प्रचारक शामिल हुए। इस बैठक का मुख्य एजेंडा राजस्थान में भाजपा को सरकार में बैठाना रहा। बैठक में हिंदुत्व के साथ-साथ उदयपुर के कन्हैया लाल दर्जी के मामले को धार देने और इसको अगले साल राजस्थान में होने वाले चुनाव तक जिंदा रखने पर विचार हुआ। आरएसएस के इस प्रकार के इरादों से यह ज़ाहिर होता है कि वह उग्र हिंदुत्व के मुद्दे पर राजस्थान की सत्ता हासिल करना चाहती है।
संघ की बैठक से पहले उसके इरादों की झलक भाजपा नेताओं के कन्हैया लाल दर्जी के घर जाकर उसके परिवार से मिलना और सहानुभूति जताना, बहुत कुछ दर्शाता है। गजेंद्र सिंह शेखावत और वसुंधरा राजे सिंधिया ने अलग-अलग कन्हैया लाल दर्जी के परिजनों से जाकर मुलाकात की। कन्हैया लाल दर्जी के मामले को आर एस एस राजस्थान के चुनाव में उभारकर हिंदुत्ववादी लहर पैदा करना चाहता है, जिससे राजस्थान में भाजपा को सत्ता मिल जाये।
आरएसएस द्वारा इस बैठक को लेकर यह कहा गया कि यह रूटीन बैठक थी और इस प्रकार की बैठक साल में एक बार होती है। जबकि ऐसा नहीं है, क्योंकि राजस्थान में 2023 में विधानसभा चुनाव होना है और संघ को राजस्थान में भाजपा को सत्ता में बैठाना है। इसीलिए संघ ने राजस्थान के झुंझुनूं में इतनी बड़ी बैठक किया है। राजस्थान में आर एस एस के सभी प्रांत प्रचारकों की बड़ी बैठक करना सीधे-सीधे अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अभी से रणनीति तैयार करना है।
बैठक में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, दत्तात्रेय होसबोले और भाजपा के संगठन महासचिव बी एल संतोष भी शामिल हुए। आरएसएस राजस्थान की सत्ता में भाजपा को बैठाने के लिए किस कदर बेचैन है कि वह अब राजस्थान में टुकड़ों में बंटी भाजपा के हर गुट के नेताओं को पुचकार रही है और उनको मनाने में भी लगी है।
आरएसएस राजस्थान में भाजपा में अलग-अलग गुटों के खड़े हो जाने को लेकर भी काफी परेशान है। आरएसएस ने राजस्थान में अपनी बड़ी बैठक इसलिए की है, जिससे वह राज्य में अलग-अलग गुटों में बंटी भाजपा और उनके नेताओं में सामंजस्य बिठाने में सफल हो जाए। क्योंकि भाजपा में अलग-अलग गुटों के होने से राजस्थान में भाजपा कभी सत्ता नहीं पा सकती है।
आरएसएस राजस्थान में भाजपा की गुटबाजी से बहुत ही ज्यादा परेशान है। आरएसएस यह मानकर चल रहा है कि भाजपा में गुटबाजी अगर नहीं खत्म हुई, तो राजस्थान में भाजपा कभी भी सत्ता में नहीं बैठ पाएगी। राजस्थान में भाजपा की गाड़ी पटरी से उतरी हुई है और आरएसएस इसको लेकर बहुत ही ज्यादा चिंतित है।
राजस्थान में भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह से नहीं बनती है। वसुंधरा राजे सिंधिया एकमात्र ऐसी भाजपा की नेता हैं, जो मोदी और अमित शाह के आगे नहीं झुकी हैं। मोदी और शाह की जोड़ी ने बड़ा प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हो सके। मोदी और शाह ने राजस्थान में भाजपा में वसुंधरा राजे सिंधिया के विरुद्ध उनके विरोधियों को आगे बढ़ाया। वसुंधरा राजे सिंधिया के विरोधी सतीश पुनिया को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। लेकिन पुनिया कुछ नहीं कर सके।
वसुंधरा राजे सिंधिया के विरोधी गजेंद्र शेखावत को केंद्र में मंत्री बनाया, लेकिन वह भी वसुंधरा राजे सिंधिया का विकल्प नहीं बन सके। राजस्थान में वसुंधरा राजे सिंधिया को किनारे करके भाजपा कभी भी सत्ता नहीं पा सकती है। वसुंधरा राजे सिंधिया ने अपने धुर विरोधी घनश्याम तिवारी से हाथ मिलाकर उनको राज्यसभा सांसद बनवा दिया और मोदी के उम्मीदवार सुभाष चंद्रा को हरवा दिया। आरएसएस वसुंधरा राजे सिंधिया की ताकत को अच्छी तरह से समझता है, इसलिए राजस्थान में बैठक कर वसुंधरा राजे सिंधिया को समझाने का प्रयास कर रहा। लेकिन इस बात में संदेह है कि, आरएसएस को इसमें सफलता मिलेगी। क्योंकि वसुंधरा राजे सिंधिया मोदी-शाह के आगे अपने हथियार नहीं डालेंगी।
राजस्थान में भाजपा में चल रही उठापटक को खत्म करना इतना आसान नहीं है। इसको आरएसएस अच्छी तरह से समझता है, इसीलिए वह राजस्थान में अपनी बैठक कर सभी विकल्पों पर काम कर रहा है। आरएसएस का मानना है कि अभी राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने में एक साल है और वह इतने समय में उग्र हिंदुत्ववादी हवा को चलाकर भाजपा के पक्ष में लहर पैदा करने में सफल हो जाएगा। इससे अगर भाजपा में एकता नहीं होगी और गुटबाजी नहीं खत्म होगी, तो भी भाजपा को सत्ता मिल सकती है।
आरएसएस, कन्हैया लाल दर्जी को हिंदुत्ववादी लहर पैदा करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा मानता है। कन्हैया लाल दर्जी के कांड में भाजपा बेनकाब हो चुकी है। कन्हैया लाल की हत्या के आरोपी का संबंध राजस्थान के पूर्व गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया से होने की बात सामने आ चुकी है इससे भाजपा की पोल खुल गई है। राजस्थान में कई साम्प्रदायिक घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें बहुत से लोग प्रभावित हुए हैं और उसका दंश झेल रहे हैं।
आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार हैं। उनकी अगुवाई में राष्ट्रीय मुस्लिम एकता मंच चलता है और वह यह प्रयास कर रहा है कि कन्हैया लाल की जो हत्या हुई है, उसके विरोध में जगह-जगह श्रद्धांजलि अर्पित की जाए। जिससे देश में जो माहौल खराब हुआ है उसको सुधारा जा सके। लेकिन इससे माहौल नहीं सुधरेगा बल्कि राजस्थान समेत देश में साम्प्रदायिक तनाव पैदा होगा, जिसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ेगा। क्योंकि सत्ता के लिए आरएसएस दंगा कराने से परहेज़ नहीं करेगा।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से वसुंधरा राजे सिंधिया के अच्छे संबंध हैं। अगर सब कुछ ठीकठाक न रहा, तो वसुंधरा राजे सिंधिया भाजपा की जड़ों पर मट्ठा डालने का काम करेंगी और अशोक गहलोत को फायदा पहुंचाएंगी।

0 comments