महाराष्ट्र की सभी पार्टियां मराठा आरक्षण के पक्ष में:सर्वदलीय बैठक के बाद शिंदे बोले- कानूनी प्रक्रिया के लिए समय दें; आंदोलन खत्म करें
मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बुधवार सुबह साढ़े 10 बजे सर्वदलीय बैठक की। इसमें शरद पवार समेत 32 पार्टियों के नेता शामिल हुए। करीब 3 घंटे की बैठक के बाद दोपहर डेढ़ बजे शिंदे सहयाद्री भवन से बाहर आए और मीडिया से करीब 2 मिनट बात की।
शिंदे ने कहा- सर्वदलीय बैठक में सभी दलों के नेता इस बात पर सहमत हुए कि मराठा समुदाय को आरक्षण मिलना चाहिए। यह निर्णय लिया गया कि आरक्षण कानून के दायरे में और अन्य समुदाय के साथ अन्याय किए बिना होना चाहिए। आरक्षण के लिए अनशन पर बैठे मनोज जारांगे से भी अपील है कि वो अनशन खत्म करें। हिंसा ठीक नहीं है।
इधर, आरक्षण की मांग को लेकर मंगलवार को एक महिला समेत 9 और लोगों ने आत्महत्या कर ली। 19 से 31 अक्टूबर तक यानी 13 दिनों में 25 लोग सुसाइड कर चुके हैं। यह संख्या 1990 के मंडल आंदोलन के दौरान की गई आत्महत्याओं के आंकड़े के बाद सबसे ज्यादा है। इस साल सितंबर में शुरू हुआ आंदोलन 10 जिलों में हिंसक हो गया है।

अब तक क्या हुआ?
- 30 अक्टूबर को बीड में हुई हिंसा मुंबई तक पहुंच गई है। कोलाबा इलाके में बुधवार सुबह विधायकों के सरकारी आवास के सामने दो अज्ञात लोगों ने महाराष्ट्र के मेडिकल एजुकेशन मिनिस्टर हसन मुश्रिफ के काफिले की गाड़ी में तोड़फोड़ की। इस मामले में 3 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
- आंदोलन के समर्थन में अब तक दो सांसद और 4 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें शिवसेना शिंदे गुट के हिंगोली और नासिक के सांसद हेमंत पाटिल और हेमंत गोडसे शामिल हैं। इसके अलावा शिंदे की शिवसेना से विधायक रमेश बोरनारे, वैजापुर से शिवसेना शिंदे गुट के विधायक रमेश बोरनारे, परभणी से कांग्रेस के विधायक सुरेश वारपुडकर, गेरवाई से भाजपा विधायक लक्ष्मण पवार ने भी इस्तीफा दे दिया है। सरकार में शामिल तीनों दलों के 10 विधायकों ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग को लेकर अनशन भी शुरू कर दिया है।
- मराठा आरक्षण की मांग को लेकर इस साल आंदोलन शुरू करने वाले मनोज जारांगे पाटिल की भूख हड़ताल का आज 8वां दिन है। जारांगे ने चेतावनी देते हुए कहा- महाराष्ट्र सरकार स्पेशल सेशन बुलाकर आरक्षण पर फैसला करे। वरना ये आंदोलन देशभर में होगा। उन्होंने फैसला न करने पर जल त्यागने की चेतावनी दी है।
- मंगलवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जस्टिस संदीप शिंदे समिति की अंतरिम रिपोर्ट को मंजूरी दी गई। हालांकि, सरकार ने भूख हड़ताल पर बैठे मनोज जारांगे पाटिल की सभी मराठाओं को आरक्षण देने की मांग खारिज कर दी।
- राज्य के DGP रजनीश सेठ ने बुधवार को कहा कि आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में अब तक 141 केस दर्ज किए गए हैं। 168 लोगों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि उपद्रवियों ने 12 करोड़ रुपए की सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है। इसके लिए 146 आरोपी व्यक्तियों को नोटिस दिया गया है।

ओबीसी समुदाय मराठाओं को कुनबी सर्टिफिकेट देने के खिलाफ
मराठा समुदाय को अलग से आरक्षण देने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। इसके बाद मनोज जारांगे पाटिल समेत कई लोग दावा कर रहे हैं कि मराठा समाज मूल रूप से कुनबी जाति से है। यानी मराठा समुदाय को कुनबी प्रमाणपत्र दिया जाता है तो आरक्षण मिलने पर उसे ओबीसी कोटे से लाभ मिल जायेगा।
फिलहाल राज्य में ओबीसी कोटे से आरक्षण 19 फीसदी है। ओबीसी समुदाय के संगठनों का मानना है कि अगर इसमें मराठा समुदाय को भी शामिल किया गया तो आरक्षण का फायदा नए लोगों को मिलेगा। हमारा विरोध मराठा आरक्षण से नहीं बल्कि उन्हें ओबीसी से आरक्षण देने को लेकर है।
बीड से शुरू हुई हिंसा
30 अक्टूबर: आंदोलनकारियों ने बीड जिले में NCP के विधायक प्रकाश सोलंके और विधायक संदीप क्षीरसागर का घर जला दिया। सोलंके अजित गुट और क्षीरसागर शरद गुट से हैं। इसी दिन आंदोलनकारियों ने बीड जिले के NCP दफ्तर में भी आग लगा दी।
30 अक्टूबर: आंदोलनकारियों ने बीड में ही माजलगांव नगर परिषद कार्यालय में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों ने जालना के बदनापुर तहसीलदार दफ्तर में ताला जड़ दिया।
30 अक्टूबर: बीड बस डिपो में करीब एक हजार लोगों की भीड़ घुस गई और 60 से ज्यादा बसों के कांच फोड़ दिए। स्टेशन का कंट्रोल रूम भी तोड़ दिया। प्रशासन ने जिले में धारा 144 लागू कर दी है और 48 घंटे के लिए इंटरनेट बैन कर दिया।
31 अक्टूबर: प्रदर्शनकारियों ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेस पर 6 किलोमीटर लंबा जाम लगा दिया। इन शहरों में आगजनी की घटनाएं भी हुईं। जालना के पंचायत ऑफिस में आग लगा दी गई। बीड के बाद उस्मानाबाद में भी प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया है। बीड में इंटरनेट बंद कर दिया गया।

हिंसक घटनाओं की 3 तस्वीरें...



आंदोलन का चेहरा मनोज जारांगे पाटिल अनशन पर

मनोज जारांगे पाटिल मराठा आरक्षण के लिए 25 अक्टूबर से जालना के अंतरौली में अनशन कर रहे हैं। 41 साल के मनोज पेशे से किसान हैं। उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई की है। जारांगे मूल रूप से बीड के मटोरी के रहने वाले हैं। जारांगे अब अपने माता-पिता, तीन भाई, पत्नी और 4 बच्चों के साथ जालना के अंबाद के अंकुश नगर में रहते हैं।
जारांगे ने 2011 से अब तक 35 बार प्रदर्शन किए हैं। वे 2016 से मराठा आरक्षण के समर्थन में आंदोलन कर रहे हैं। शुरुआत में जारांगे कांग्रेस पार्टी में काम किया करते थे। 2004 में उन्होंने कांग्रेस के जिला युवा अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने शिवबा नाम के सामाजिक संगठन की स्थापना की। जारांगे ने आंदोलन का खर्च उठाने के लिए अपनी जमीन भी बेच दी।
महाराष्ट्र की राजनीति पर आंदोलन का असर कितना...


अब 121 साल पहले की बात, जब मराठा आरक्षण की नींव पड़ी
26 जुलाई 1902। छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज और कोल्हापुर के महाराजा छत्रपति शाहूजी ने एक फरमान जारी किया। इसमें कहा गया कि उनके राज्य में जो भी सरकारी पद खाली हैं, उनमें 50% आरक्षण मराठा, कुनबी और अन्य पिछड़े समूहों को दिया जाए।
यह एक ऐसा फैसला था जिसने आगे चलकर आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था करने की राह दिखाई। मराठा समुदाय भी इसे ही अपनी मांग का आधार बताता है। 1942 से 1952 तक बॉम्बे सरकार के दौरान भी मराठा समुदाय को 10 साल तक आरक्षण मिला था। इसके बाद मामला ठंडा पड़ गया।
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