हत्या की अनसुलझी कहानी : 14 वर्ष की 9 की छात्रा नवरुना का 18 सितंबर 2012 को हुआ था अपहरण

बार बार समय विस्तार मिलने के बाद भी नहीं सुलझा सकी हत्या की गुत्थी ,21 जनवरी को होगी विशेष कोर्ट में सुनवाई

 

  • सीबीआई सौंप चुकी है क्लोज़र रिपोर्ट
  • बंद लिफाफे में कैद है नवरूना के हत्या की अनसुलझी कहानी
  • बार बार समय विस्तार मिलने के बाद भी नहीं सुलझा सकी हत्या की गुत्थी
  • 21 जनवरी को होगी विशेष कोर्ट में सुनवाई
  • अंतिम रिपोर्ट 23 नवंबर 2020 को जमा किया गया
  • पिता अतुल्य चक्रवर्ती को अब भी है न्याय की उम्मीद
  • 14 वर्ष की नौवीं की छात्रा नवरुना का अपहरण जवाहरलाल रोड स्थित चक्रवर्ती लेन में 
  • उसके ही घर से कर लिया गया था.

मुज़फ्फरपुर  : (गज़न्फर इकबाल की रिपोर्ट ) कहानी एक युवती के अपहरण की ,18 सितंबर 2012 की रात यह घटना तब हुई जब वह अपने कमरे में सो रही थी और खिड़की तोड़कर नवरूना को गायब कर दिया गया अपहरण की इस घटना की जांच स्थानीय जिला पुलिस की नगर थाना कर रही थी, छानबीन चल ही रही थी के इसी साल 26 नवंबर को पास के ही एक गली के नाले की सफाई नगर निगम द्वारा किए जाने के दौरान एक कंकाल की बरामदगी हुई, कंकाल के अंश को हैदराबाद के फोरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजा गया,डीएनए रिपोर्ट में यह कंकाल नवरूना का साबित हुआ जिसकी पुष्टि नवरुना के पिता अतूलय चक्रवर्ती ने भी की.

 नवरुना के पिता अतूलय चक्रवर्ती बताते हैं  कि उनकी  एक जमीन जवाहरलाल रोड स्थित व्यवसायिक क्षेत्र के करीब है, कारोबारी इलाका होने की वजह से इस जमीन का खास महत्व है, पारिवारिक कारणों से  अतूलय चक्रवर्ती इस जमीन को बेचना चाहते थे, ऐसा माना जाता है के इस जमीन पर शहर के बहुत से प्रोपर्टी डीलर्स और नेताओं की निगाह थी, क़ीमत और एग्रिमेंट को लेकर अतुल्य चक्रवर्ती पर जमीन कारोबारियों द्वारा बहुत तरह से दबाव बनाया जा रहा था, अपहरण और हत्या का मुख्य कारण भी यही बताया जा रहा है.

यह मामला पूरे शहर में चर्चित था और मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी को जांच की जिम्मेदारी 12 जनवरी 2013 को दी गई,
जांच से कोई निष्कर्ष अभी निकल भी नहीं  पाया था कि अतुल्य चक्रवर्ती ने इसकी जांच सीबीआई से कराने की अपील की और अंत में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई  को इस केस की जिम्मेदारी सौंप दी गई.
सीबीआई ने 14 फरवरी 2014 को पुनः एफआईआर दर्ज कर लिया और 19 फरवरी को पहली बार मुजफ्फरपुर पहुंच कर जांच शुरू की, सीबीआइ की यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही थी , जांच के दौरान सीबीआई ने नगर थाने की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को खंगाला, जांच प्रकिया के दौरान सीबीआई को संदेह हुआ कि साक्ष्य को छुपाया गया है या फिर जांच प्रकिया को विचलित करने के लिए केस से जुड़े शुरूआती तथ्यों के साथ छेड़छाड़ हुई है.

सीबीआई नवरुना के घर भी गई और अपहरण किए जाने की घटना का नाट्य रूपांतरण किया, नवरुना के पिता अतूलय चक्रवर्ती और मां मैत्री चक्रवर्ती से कई बार मिली, पूछताछ के बाद सीबीआई ने तत्कालीन नगर थाना के थानेदार जितेंद्र प्रसाद और वार्ड पार्षद राकेश सिन्हा उर्फ पप्पू समेत करीब एक दर्जन संदिग्धों का लाई डिटेक्टर व ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराया  लेकिन कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिल पाया.

पांच साल दस महिने चले इस जांच के दौरान तीन बार जांच के आईओ  को बदला गया, सीबीआई शहर में महीनों कैंप  लगाकर साक्ष्य जुटाने में लगी थी,आम लोगों को केस से संबंधित सूचना देने पर ईनाम की घोषणा भी की गई,फिर भी कोई साक्ष्य नहीं मिल पाया.

इधर जांच पूरी करने की डेडलाइन् समाप्त हो रही थी, करीब सात बार सीबीआई के विशेष अनुरोध पर सुप्रीम  कोर्ट ने समय विस्तार दिया,हर बार सीबीआई सुप्रीम कोर्ट से यह कहकर समय विस्तार लेती थी के जांच बस पूरी होने ही वाली है और यह अंतिम अनुरोध है, साथ ही बंद लिफाफे में प्रगति प्रतिवेदन रिपोर्ट भी प्रस्तुत करती थी, आवेदन में केस से संबंधित आगे की कार्रवाई का हवाला भी दिया जाता था.

इस दौरान शहर से चार लोगों को संदेह के आधार पर सीबीआई ने पटना बुलाया और पूछताछ के बाद विशेष कोर्ट में पेश कर अगले दिन जेल भेज दिया,इन चारों लोगों के खिलाफ सीबीआई कोई सबूत नहीं जुटा पाई और न ही सीबीआई की विशेष कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर सकी, नब्बे दिन जेल में रहने के बाद कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में चारों को जमानत दे दी.

23 नवंबर 2020 को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचे क्लोज़र रिपोर्ट जमा कर दिया, जिसमें कोर्ट को बताया गया के साक्ष्य के अभाव के में सीबीआई नवरुना के हत्यारे को नहीं ढूंढ पाई और तीन सीलबंद लिफाफे सुप्रीमकोर्ट को सौंप दिया, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने यह तीनों लिफाफे सीबीआई को लौटा दिए.

नवरूना के पिता अतूलय चक्रवर्ती के वकील शरद सिन्हा इस बंद लिफाफे को फिर से सुप्रीमकोर्ट में पेश करने और साक्ष्य के तौर पर इसके अवलोकन करने की मांग करते रहे हैं जिसका सीबीआई विरोध करता आया है.
सीबीआई का कहना है कि इस लिफाफे में केवल जांच से जुड़े प्रगति प्रतिवेदन रिपोर्ट है, साक्ष्य नहीं है, परंतु नवरूना के वकील यह मानने को तैयार नहीं,उनका कहना है कि इस बंद लिफाफे से बहुत कुछ सामने आयेगा और आगे की कार्रवाई का रास्ता मिलेगा,इसी सिलसिले में 13 जनवरी को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने विशेष कोर्ट को वह बंद लिफाफे सौंप दिए लेकिन  सीबीआई के विशेष लोक अभियोजन ने लिफाफे के अवलोकन का विरोध किया, विशेष कोर्ट ने फैसला को सुरक्षित रखते हुए अगली सुनवाई की तारीख 21 जनवरी को निर्धारित की है.

इधर इस मामले को करीब नौ साल हो चुके हैं, जिला पुलिस, सीआईडी और सीबीआई यह तीनों ही नवरुना के हत्यारे को ढूंढने में असफल साबित हुए हैं फिर भी नवरुना के पिता अतूलय चक्रवर्ती न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

0 comments

Leave a Reply