मुजफ्फरपुर आई हास्पिटल ने छीन ली 60 लोगों के आंखों की रौशनी अब तक 15 लोगों के आंख ओप्रेशन कर बाहर निकाले गए

ग़ज़नफर इकबाल

मुजफ्फरपुर: ट्रस्ट द्वारा संचालित मुजफ्फरपुर के जूरन छपरा रोड नंबर 2 में स्थित मुजफ्फरपुर आई अस्पताल की एक बहुत बड़ी लापरवाही सामने आई है जिसमें अब-तक पांच दर्जन लोगों ने अपने आंखों की रौशनी खो दी, साथ ही 15 लोगों के आंखों को आप्रेशन कर बाहर निकाला गया है,

दरअसल 22 नवंबर को अस्पताल परिसर में कुल 60 लोगों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था, इसमें शहर के इलावा गांव और दुसरे जिला के महिला और पुरुष भी शामिल थे,आपरेशन के बाद मरीजों ने आंखों में दर्द और पानी निकलने की शिकायत अस्पताल प्रशासन से की, बहुत से मरीज़ घर जा चुके थे लेकिन जिनको अभी डिस्चार्ज नहीं किया था उनके परिजन शिकायत पर कोई कार्रवाई न देख हंगामा करने लगे,

अस्पताल के कर्मचारियों ने शांत रहने और चले जाने का दबाव बनाया, कोई रास्ता न देख  डरे और घबराए परिजन  आनन-फानन मरीज़ को लेकर कृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे जहां डाक्टरों ने आंखों में गंभीर संक्रमण की बात कही, मरीजों ने भी अंधेपन की बात कही,डाक्टरों ने आंखों की जांच जारी रखा और संक्रमण दिमाग में फैलने और जानलेवा होने की शंका की वजह से आंखों का ऑपरेशन कर बाहर निकालना बेहतर समझा, जिसमें अभी तक 15 लोगों के आंखों को आप्रेशन कर बाहर निकाला गया है, जिसमें चार लोगों का आंख आई होसपिटल में ही निकाल दिया गया था۔

बाद में पत्थर के बने कृत्रिम आंख लगा दिए जाने की बात डाक्टरों द्वारा कही जा रही है,इधर मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन ने तत्काल तीन डॉक्टरों की जांच टीम गठित कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया था जिसमें प्रारंभिक जांच में अस्पताल द्वारा बड़ी लापरवाही, आपरेशन प्रोटोकॉल का उल्लंघन तथा आउटसोर्सिंग द्वारा डाक्टरों द्वारा आपरेशन कराये जाने की बात सामने आई है,बहाल दोनों नियमित डाक्टर की गैरहाजिरी में यह सारा मामला हुआ,

एक दिन में केवल 20 आपरेशन करने का प्रावधान है, जबकि 60 मरीजों के मोतियाबिंद  के आपरेशन कर दिए गए, जिससे सभों के आंखों की रोशनी चली गई, रजिस्टर में मरीजों का पूरा पता और डिस्चार्ज करने की तिथि भी अंकित नहीं है, मरीजों को ओप्रेशन के बाद 48 घंटे तक चिकित्सक के आब्जर्वेशन में रखने का प्रावधान है, जबकि आपरेशन वाले दिन ही अधिकांश मरीजों को छुट्टी दे दी गई,जांच टीम ने फिलहाल आपरेशन थियेटर को सील कर दिया है और किसी भी तरह के आपरेशन पर रोक लगा दी गई है,जांच में पता चला है कि कार्निया का रंग बदलकर काला से सफेद हो गया,आपरेशन और इलाज में इस्तेमाल सभी दवाईयां, उपकरण और लैब में होने वाले रसायनिक पदार्थ को जांच के लिए भेज दिया गया है۔

अस्पताल के डॉक्टरों, कर्मचारियों और लैब तकनीशियनों ,पारा मेडिकल स्टाफ के डिग्रीयों को भी जांचने की बात कही गई है,दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग ने भी तत्काल ज़िला प्रशासन और सिविल सर्जन को अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है,स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सभी मरीजों को पैन औपथौलमाइटिस नामक बिमारी का संक्रमण हुआ है,उधर मीडिया में खबर आने के बाद मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब किया है

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