ओखला प्रेस क्लब की दुकानों एवं परिसरों पर उर्दू में नेम प्लेट एवं साइनबोर्ड लगाने के अभियान का शुभारम्भ

नयी दिल्ली, 26 मई - ओखला प्रेस क्लब (पंजीकृत) ने दैनिक जीवन और उद्योग-वाणिज्य से उर्दू भाषा को हटाये जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए देशभर में दुकानों, कार्यालयों और घरों में उर्दू लाने का संकल्प लिया है। यह प्रतिबद्धता ओखला प्रेस क्लब ने दुकानों और घरों पर अन्य भाषाओं के साथ उर्दू में भी बोर्ड और साइनबोर्ड लगाने के अभियान का उद्घाटन करते हुए व्यक्त की।

ओपन प्रेस क्लब की कोर कमेटी के सदस्यों में चेयरमैन वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अतहरुद्दीन (मुन्ने भारती), वरिष्ठ पत्रकार सोहेल अंजुम, जावेद अख्तर, डॉ. खालिद रजा खान, यूएनआई के आबिद अनवर, खुर्रम शहजाद शामिल हैं। मिल्लत टाइम्स ने शम्स तबरेज कासमी, सैफुल्लाह सिद्दीफी और जहीरुल हसन ने मिलकर 'अपने घर, दुकान में उर्दू में बोर्ड लगाएं, उर्दू को बढ़ावा दें' नाम से अभियान चलाया। 

ओखला प्रेस क्लब का प्रयास न केवल जामिया नगर निवासियों, दुकानदारों, कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और मस्जिदों और दरगाहों में उर्दू में बोर्ड लगाना है, बल्कि इस अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर भी चलाना है। इसकी शुरुआत करते हुए ओखला प्रेस क्लब कोर कमेटी के सदस्यों ने अपने घरों में उर्दू में नाम का बोर्ड लगाया है और जगह-जगह इस अभियान को जन अभियान बनाने के लिए पोस्टर लगा रहे हैं. ओखला प्रेस क्लब के सदस्य भी उर्दू में बोर्ड बनाने में सहयोग दे रहे हैं। 

गौरतलब है कि जामिया नगर को "लघु भारत" भी कहा जा सकता है क्योंकि यहां देशभर के मुसलमानों का एक पढ़ा-लिखा वर्ग रहता है. प्रसिद्ध विश्वविद्यालय जामिया मिलिया इस्लामिया भी यहीं स्थित है, इसके अलावा भारत के प्रमुख संगठनों के कार्यालय भी यहीं स्थित हैं। यहां कई राजनीतिक दलों के कार्यालय भी हैं. जामिया नगर भी पढ़े-लिखे लोगों की बस्ती मानी जाती है, लेकिन दुख की बात यह है कि चाहे कोई सरकारी अधिकारी हो या यूनिवर्सिटी प्रोफेसर, डॉक्टर हो या इंजीनियर, वकील हो या टीचर, इनके घर पर उर्दू नेम प्लेट नहीं होती . जो उर्दू के प्रति उदासीनता का जीता जागता सबूत है. जबकि ओखला में उर्दू कवियों, लेखकों, कथा लेखकों, उपन्यासकारों और कलाकारों की कोई कमी नहीं है। यदि कोई कमी हो तो बोर्ड पर उर्दू में लिखें।

ओखला प्रेस क्लब के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार मुन्ने भारती ने कहा कि इसी को देखते हुए ओखला प्रेस क्लब ने उर्दू को घर-घर तक पहुंचाने का फैसला किया है और इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं. उनकी इच्छा है कि न केवल दिल्ली में बल्कि पूरे देश में व्यापारिक प्रतिष्ठानों, दफ्तरों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, घरों और दुकानों पर उर्दू पट्टिकाएं लगाई जाएं ताकि लोगों में उर्दू के प्रति रुचि पैदा हो, वे उर्दू की ओर आकर्षित हो सकें। और वे उर्दू सीख सकते हैं,  ओखला प्रेस क्लब इस अभियान को समाचार पत्रों और समाचारों के माध्यम से पूरे देश में फैलाने के लिए सहयोग की अपील की है

1 comments

  • Alina

    Very good initiative... Let's save the language of tahzeeb,,let's spread the language of mohabbat...let's spread Urdu....

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