भारत का नया नॉर्मल, ईसाइयों पर दस महीनों में 305 साम्प्रदायिक हमले

शादाब ख़ान

मानवाधिकार संगठनों के एक समूह द्वारा जारी की गई रिपोर्ट ने भारत में ईसाइयों पर होने वाले सांप्रदायिक हमलों पर रोशनी डाली है। “क्रिश्चियन्स अंडर अटैक इन इंडिया” के नाम से जारी इस रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से सितंबर 2021 तक ईसाइयों पर 305 सांप्रदायिक हमले हुए हैं।

इस फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ़ सितंबर के महीने में ईसाइयों पर 69 हमले हुए, जबकि अगस्त के महीने में यह संख्या 50 थी। जनवरी में 37, जुलाई में 33, मार्च, अप्रैल और जून में 27-27, फरवरी में 20 और मई के महीने में ईसाइ समुदाय पर 15 हमले किये गए। इन सभी घटनाओं में सिर्फ 49 एफ़आईआर दर्ज की गई हैं।

साम्प्रदायिक हमलों की लिस्ट में सबसे ऊपर उत्तर प्रदेश का नाम है जहां 09 महीनों के दौरान 66 हमले हुए हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में 47, झारखंड में 30 और मध्य प्रदेश में ईसाइयों पर 26 साम्प्रदायिक हमले हुए हैं।

इस फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग रिपोर्ट में 03 अक्तूबर को रुड़की में चर्च पर हुए हमले की भी विस्तार से जानकारी दी गई है। 3 अक्टूबर को स्थानीय दक्षिणपंथी संगठन के कार्यकर्ताओं ने रुड़की के एक चर्च में तोड़फोड़ की थी। इस हमले में महिलाओं समेत चर्च में प्रार्थना के लिए इकट्ठे हुए सभी लोगों के साथ मारपीट की गई थी। मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

चर्च की देखरेख करने वाली ईवा लांस ने हमले की जानकारी साझा करते हुए कहा, “हमें आज तक नहीं पता चला है कि हमला करने वाले लोग कितने थे। वह भीड़ 300 से भी ज़्यादा लोगों की थी। भीड़ में औरतें भी शामिल थीं। मैं उनमें से कई लोगों को जानती भी हूं, वह स्थानीय लोग थे।”

पुलिस की नाकामी पर बात करते हुए ईवा ने कहा, “हम शिकायत दर्ज करने के लिए पुलिस स्टेशन गए। हमें वकीलों से कोई मदद नहीं मिली। मैंने अपनी टूटी-फूटी भाषा में वहां शिकायत लिखी। दो दिन बाद हमें पता चला कि हमला करने वालों ने हमारे ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है। मेरी माँ की उम्र 65 साल है, उनके ऊपर डकैती का आरोप लगाया गया है। दो हफ़्ते बाद भी हमलावरों को गिरफ़्तार नहीं किया गया है।”

युनाइटेड क्रिश्चियन फ़ॉरम के राष्ट्रीय समन्वयक ए.सी. माइकल का कहना है कि देशभर में हो रहे हमलों में एक पैटर्न देखा जा सकता है। एशिया टाइम्स से बात करते हुए माइकल ने बताया, “सबसे पहले हिन्दुत्ववादी संगठन ईसाइयों के प्रार्थना स्थल पर हमला करते हैं। सभा में मौजूद पादरी के साथ मारपीट करने के बाद वह पुलिस को बुलाते हैं और पादरी पर जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाते हैं। बाद में हमें पता चलता है कि मारपीट करने वाले लोगों पर तो कोई कार्रवाई नहीं होती, लेकिन पादरी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर ली जाती है।” माइकल इस फ़ैक्ट-फ़ाइंडिंग टीम के सदस्य भी हैं।

 

इस मामले की पूरी रिपोर्ट यहां देखी जा सकती है


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