NCPUL की गवर्निंग काउंसिल के पुनर्गठन की मांग का मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उठा

उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन ने प्रधानमंत्री को पत्र भेज कर एनसीपीयूएल के ताजा हालात से आगाह किया है

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्तर पर उर्दू भाषा के विकास और उत्थान के लिए  काम करने वाले राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (एनसीपीयूएल) की गवर्निंग काउंसिल के पुनर्गठन की मांग का मामला  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उठाया गया है।

उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन की तरफ से एक मांग पत्र प्रधानमंत्री को भेजा गया है। मांग पत्र में एनसीपीयूएल की गवर्निंग काउंसिल और गवर्निंग बोर्ड के गठन नहीं होने की वजह से उर्दू के विद्वानों, साहित्यकारों, शायरों आदि को होने वाली दिक्कतों से अवगत कराया गया है।पिछले एक साल से गवर्निंग काउंसिल के  मौजूद नहीं रहने की वजह से  एनसीपीयूएल का काम पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है।

वित्तीय वर्ष 2022- 23  का एलाट  बजट भी पूरी तरह से  बेकार हो गया है। पूरी संभावना है कि यह बजट  बिना खर्च हुए सरकार को वापस चला जाएगा। 


एनसीपीयूएल राष्ट्रीय स्तर पर  उर्दू भाषा के विकास और उत्थान के लिए काम करता है।यह केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आता है।पिछले एक साल से एनसीपीयूएल को चलाने वाली गवर्निंग काउंसिल का गठन नहीं किया गया है।केंद्रीय शिक्षा मंत्री  धर्मेंद्र प्रधान के पास गवर्निंग काउंसिल के पुनर्गठन की फाइल नवंबर 2022 में ही भेजी जा चुकी है।

मगर अभी तक इस फाइल पर मंत्रालय की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।एनसीपीयूएल उर्दू भाषा के विद्वानों, लेखकों, साहित्यकारों, शायरों आदि की पुस्तकों के मसौदे आदि को प्रकाशित कराने में आर्थिक मदद करता है। 

इसके अलावा उर्दू भाषा के विकास और उत्थान के लिए जगह-जगह सेमिनार, संगोष्ठी, मुशायरा आदि के आयोजन  के लिए  गैर सरकारी संगठनों को भी आर्थिक सहयोग  प्रदान करता है। पिछले एक साल से गवर्निंग काउंसिल के नहीं होने की वजह से यह सभी काम  रुका पड़ा  है।


उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सैयद अहमद खान का कहना है कि उन्होंने एक पत्र प्रधानमंत्री को भेजा है जिसमें उनसे एनसीपीयूएल की गवर्निंग काउंसिल के गठन के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की गई है।

उनका कहना है कि प्रधानमंत्री को एनसीपीयूल और  गवर्निंग काउंसिल के मौजूद नहीं होने  से उत्पन्न हालात से अवगत कराया गया है। उन्होंने बताया कि इससे पहले  केंद्रीय शिक्षा मंत्री  धर्मेंद्र प्रधान को भी एक पत्र लिखा गया था मगर उनके इस पत्र पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है  और ना ही पत्र का जवाब दिया गया है। 

डॉक्टर खान ने कहा कि उन्हें आशा है कि प्रधानमंत्री को लिखे पत्र पर उचित कार्रवाई होगी और प्रधानमंत्री इस गंभीर समस्या का समाधान  करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।   

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