क्या पत्थरबाजी का अपराध ट्रेन की बोगियों को जलाने से बड़ा हो सकता ?
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नई दिल्ली : IMPAR भारत सरकार की अग्निपथ योजना का विरोध करते हुए बड़े पैमाने पर आगजनी, ट्रेन जलाने और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले दंगाइयों के खिलाफ जबरदस्त धैर्य दिखाने के लिए राज्य सरकारों, पुलिस और नागरिक प्रशासन को बधाई देता है।
जबकि पुलिस ने जहां जरूरी था वहां कार्रवाई की, लेकिन सामान्य तौर पर इसने समझदार रुख अपनाया और पीड़ित युवकों के खिलाफ अंधाधुंध गिरफ्तारी, लॉकअप पिटाई और कठोर कानूनों के तहत मामले दर्ज नहीं किए। इससे न केवल आंदोलन और हिंसा को शीघ्रता से नियंत्रित करने में मदद मिली, बल्कि इसकी काफी सराहना भी हुई।
आदर्श रूप से कोई भी बड़ा नीतिगत निर्णय घोषणा के पहले जनता से बड़े पैमाने पर संवाद होना चाहिए ताकि लोगों को प्रभाव को समझने और समायोजित करने या लाभ प्राप्त करने के लिए तैयार किया जा सके। लोकतंत्र में, सरकारें लोगों की सामान्य भलाई को ध्यान में रखते हुए नीतिगत निर्णय लेती हैं, लेकिन कभी-कभी समाज का एक वर्ग गलत समझता है या वास्तव में नकारात्मक रूप से प्रभावित होता है, और ऐसे मामलों में विरोध एक स्वाभाविक परिणाम है। और यदि विशेषज्ञों, प्रभावित पक्षों या जनता की चिंता वास्तविक है तो सरकारों को इसका समाधान करना चाहिए। लोकतंत्र के प्रभावी कामकाज के लिए न्याय और कल्याण की सामान्य भावना एक पूर्वापेक्षा है।
हम अग्निपथ योजना की घोषणा के कारण उत्पन्न संकट से संवेदनशील तरीके से निपटने के लिए राज्य सरकारों और पुलिस अधिकारियों को बधाई देते हैंI परन्तु हमें प्रशासन की ओर से इसी तरह की संवेदनशीलता की आशा थी उन लोगों के प्रति जो सड़कों पर दो राजनीतिज्ञों की पैगम्बर मोहम्मद की खिलाफ की गयी अभद्र टिप्पणियों के कारन अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे थेI
क्या पत्थरबाजी के अपराध ट्रेन की बोगियों को जलाने और सरकारी संपत्तियों को नष्ट करने से बड़ा हो सकता? न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि व्यवस्था में लोगों के विश्वास के लिए होते हुए भी दिखना चाहिए। माननीय प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक नारा "सबका साथ, सबका विश्वास, सबका विकास" को जमीनी स्तर पर लागू भी किया जाना जाना चाहिए, कम से कम भाजपा शासित राज्य सरकारों द्वाराI
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Mohammed Yahya Khan
Nice article sir, the central and BJP ruled state governments intentionally want to curb Muslims by doing all atrocities, and as we saw the commisner of police of UP saying ye hamare bacche hai? what does it mean muslim bacche are paraye to them. It is our mistake since 2014 if we had protested all the decisions made against us in democratic way, this day would have not come. Anyway from now let us be alert and active..