मिड-डे मील के लिए लौकी तोड़ने छत पर भेजे जाने का आरोप; तीन स्कूलकर्मी गिरफ्तार, दो शिक्षक निलंबित, बिजली विभाग के जेई के खिलाफ भी एफआईआर
एशिया टाइम्स | नई दिल्ली | 3 नवंबर 2026
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में चौथी कक्षा के छात्र की हाईटेंशन बिजली तार की चपेट में आने से मौत हो गई। घटना ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षकों की जिम्मेदारी और बिजली विभाग की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतक छात्र की पहचान अरशद अहमद के रूप में हुई है। वह गड़वार थाना क्षेत्र के कनैला गांव स्थित नवीन पोखरा प्राथमिक विद्यालय में कक्षा चार का विद्यार्थी था। घटना सोमवार, 2 नवंबर की सुबह लगभग नौ बजे की बताई जा रही है।
पुलिस के अनुसार, मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) के लिए लौकी तोड़ने के उद्देश्य से एक शिक्षक ने अरशद को विद्यालय की छत पर भेजा था। इसी दौरान वह छत के पास से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई।
मिड-डे मील के लिए लौकी तोड़ने का मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय की रसोई के पास लौकी की बेल लगी हुई थी। आरोप है कि मिड-डे मील तैयार करने के लिए लौकी की आवश्यकता होने पर छात्र को उसे तोड़ने के लिए छत पर भेजा गया।
पुलिस ने भी अपनी प्रारंभिक जानकारी में शिक्षक द्वारा छात्र को छत पर भेजे जाने की बात कही है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में संबंधित कर्मचारियों की व्यक्तिगत भूमिका और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
अरशद की मौत की खबर फैलते ही विद्यालय और आसपास के इलाके में शोक और आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण विद्यालय परिसर में पहुंच गए और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे।
स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना का एक महत्वपूर्ण पहलू विद्यालय की भौतिक संरचना और उसके आसपास मौजूद बिजली व्यवस्था है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह के अनुसार, विद्यालय का रसोईघर मुख्य विद्यालय भवन से लगभग छह फीट की दूरी पर बना है और उसके पास से हाईटेंशन बिजली की लाइन गुजरती है।
बीएसए ने यह भी कहा कि सब्जी तोड़ने के लिए बच्चे को छत पर भेजना गलत था।
अब यह जांच का विषय है कि विद्यालय परिसर में बिजली लाइन की मौजूदगी के बावजूद बच्चों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए थे। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित विभागों को इस संभावित खतरे की पहले से जानकारी थी या नहीं।
तीन स्कूलकर्मी गिरफ्तार, दो शिक्षक निलंबित
घटना के बाद पुलिस ने मृतक के बड़े भाई सलमान की शिकायत पर विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक विजय शंकर, सहायक अध्यापक अनिल कुमार, शिक्षामित्र दीपचंद राम और बिजली विभाग के अवर अभियंता राम नारायण यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
पुलिस अधीक्षक ईराज राजा के अनुसार, प्रभारी प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक और शिक्षामित्र को 3 नवंबर को गिरफ्तार किया गया।
उधर, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने प्रभारी प्रधानाध्यापक विजय शंकर और सहायक अध्यापक अनिल कुमार को निलंबित कर दिया है। शिक्षामित्र दीपचंद राम की सेवा समाप्त करने के लिए ग्राम शिक्षा समिति से प्रस्ताव मांगा गया है।
मामले में बिजली विभाग के अवर अभियंता के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज हुई है। हालांकि, बिजली विभाग के अधिकारी की विभागीय स्थिति और उसके विरुद्ध आगे की कार्रवाई के बारे में विस्तृत जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।
परिवार और ग्रामीणों की मांग
घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने विद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। परिजनों और ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई।
प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर परिवार तथा ग्रामीणों से बातचीत की और उचित सहायता तथा कार्रवाई का आश्वासन दिया।
अरशद अपने माता-पिता की छह संतानों में सबसे छोटा था। उसकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
हादसे से आगे, व्यवस्था की जवाबदेही का सवाल
बलिया की यह घटना केवल एक बच्चे की असमय मौत का मामला नहीं है। यह सरकारी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े उन बुनियादी सवालों को सामने लाती है, जिनका जवाब शिक्षा विभाग, स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग को देना चाहिए।
पहला सवाल यह है कि क्या विद्यालयों में बच्चों से मिड-डे मील के लिए सब्जियां तोड़ने या अन्य ऐसे काम कराए जाते हैं, जिनमें उनकी सुरक्षा जोखिम में पड़ सकती है?
दूसरा सवाल यह है कि विद्यालय परिसर के आसपास मौजूद हाईटेंशन बिजली लाइनों का नियमित सुरक्षा ऑडिट क्यों नहीं किया जाता?
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या जिले के दूसरे सरकारी विद्यालयों में भी ऐसी ही जोखिमपूर्ण परिस्थितियां मौजूद हैं?
इस घटना के बाद जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में बिजली की लाइनों, छतों, रसोईघरों और अन्य संभावित खतरों की सुरक्षा जांच कराना आवश्यक हो गया है।
अरशद की मौत की निष्पक्ष जांच के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में किसी दूसरे बच्चे की जिंदगी इस तरह खतरे में न पड़े। गिरफ्तारी और निलंबन तत्काल प्रशासनिक कदम हैं, लेकिन वास्तविक जवाबदेही जांच पूरी होने और दोष सिद्ध होने के बाद ही तय होगी।
बच्चों को स्कूल में शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिलना उनका अधिकार है। किसी भी परिस्थिति में उनकी सुरक्षा को मिड-डे मील या विद्यालय के दूसरे कामों से कम प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।
नोट – यह रिपोर्ट एशिया टाइम्स की नहीं है, यह विभिन समाचार माध्यमों में प्रकाशित न्यूज पर अधारित है
