कतर की मध्यस्थता में बातचीत जारी, ईरान ने अमेरिकी हमलों का कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी; सऊदी अरब के साथ भी क्षेत्रीय सुरक्षा पर बातचीत जारी
दुबई, 3 नवंबर (रॉयटर्स): ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर किसी समझौते तक पहुंचने में अभी काफी दूरी है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि दोनों देशों के बीच मतभेद अब भी बरकरार हैं। हालांकि, संभावित रूप से फिर से सैन्य संघर्ष शुरू होने से रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने रात के दौरान ईरान के क़ेश्म (Qeshm) द्वीप पर कथित तौर पर ‘रक्षात्मक हमले’ किए। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, इन हमलों में सतह से हवा में मार करने वाली उन मिसाइल प्रणालियों को निशाना बनाया गया, जिनका इस्तेमाल अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों के खिलाफ किया जा रहा था।
दूसरी ओर, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने रात के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया।
होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए ईरान की शर्तें
ईरान के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कतर के मध्यस्थ सोमवार रात तेहरान पहुंचे थे। वहां अमेरिका और ईरान के बीच पिछले आठ दिनों से बातचीत के दायरे में मौजूद प्रस्तावित समझौते के मसौदे पर चर्चा हुई।
अधिकारी के अनुसार, ”मध्यस्थ तेहरान और वाशिंगटन के बीच मतभेद कम करने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं।”
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खुलवाना चाहता है तो उसे ईरान की शर्तें स्वीकार करनी होंगी।
उनका कहना था कि परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर बातचीत इसके बाद ही शुरू हो सकती है। ईरान अमेरिका की अत्यधिक और अनुचित मांगों को स्वीकार नहीं करेगा।
अमेरिकी हमलों का कड़ा जवाब देगा ईरान
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर क़ालिबाफ ने मंगलवार को कहा कि अब गेंद अमेरिका के पाले में है। उन्होंने दावा किया कि तेहरान वाशिंगटन को अपना ”मजबूत और तर्कसंगत जवाब” दे चुका है।
ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान क्षेत्र के भीतर और उससे बाहर भी कड़ी कार्रवाई कर सकता है।
क़ालिबाफ ने चेतावनी दी कि अमेरिका धमकियों और सैन्य कार्रवाई के जरिए ईरानी जनता को झुकाना चाहता है, लेकिन वह अपने मकसद में सफल नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की किसी भी गलत कार्रवाई का ईरान ऐसा जवाब देगा, जिसकी पहले से भविष्यवाणी नहीं की जा सकेगी। इस जवाब की कोई भौगोलिक सीमा भी नहीं होगी।
ट्रंप के बयान से सैन्य कार्रवाई को लेकर असमंजस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य हमले शुरू करने की अपनी पिछली धमकी को लेकर अनिश्चितता जाहिर की।
ट्रंप ने यह भी कहा कि उनका मानना है कि तेहरान जल्द से जल्द समझौता करना चाहता है।
यह बयान अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले आया है। चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य रणनीति को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
ईरान और सऊदी अरब के बीच भी बातचीत जारी
अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए संदेशों के आदान-प्रदान के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर भी कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मंगलवार को कहा कि सऊदी अरब के साथ बातचीत जारी है। तेहरान क्षेत्र के देशों के लिए ऐसी नई सुरक्षा व्यवस्था विकसित करना चाहता है, जिसमें बाहरी सैन्य हस्तक्षेप की भूमिका न हो।
पिछले सप्ताह सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों ने तेहरान में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की थी। अगस्त के बाद इन तीनों देशों और ईरान के बीच यह पहली उच्चस्तरीय बैठक थी।
सऊदी अरब के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य बातचीत के नए रास्ते खोलना और सैन्य तनाव की दोबारा वापसी को रोकना था।
यमन में हूती विद्रोहियों की सक्रियता से सऊदी अरब की चिंता बढ़ी
इस बीच सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच यमन में संघर्ष भी तेज हो गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, हूती लड़ाकों ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास अपनी गतिविधियां और बढ़ा दी हैं। यह वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है और अरब प्रायद्वीप के दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य के सामने स्थित है।
हूतियों ने सऊदी अरब की तेल सुविधाओं और हवाई अड्डों को भी निशाना बनाया है। इनमें रियाद का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी शामिल है। इन हमलों के कारण उड़ानें और तेल निर्यात प्रभावित हुए हैं।
इसके जवाब में सऊदी अरब ने यमन में हवाई हमले किए हैं।
यमन संकट से क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ा
यमन पिछले एक दशक से गृहयुद्ध का सामना कर रहा है। वर्ष 2014 में हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सऊदी समर्थित सरकार को बेदखल कर दिया था।
अब ईरान, अमेरिका, सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया में व्यापक सैन्य टकराव की आशंका पैदा कर दी है।
विश्लेषण: क्या पश्चिम एशिया एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है?
ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा तनाव अब केवल दो देशों के बीच का विवाद नहीं रह गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य, बाब अल-मंदेब, सऊदी अरब की सुरक्षा और वैश्विक तेल आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे भी इससे जुड़ गए हैं।
कतर की मध्यस्थता और सऊदी अरब, तुर्किये तथा पाकिस्तान की कूटनीतिक सक्रियता संकेत देती है कि क्षेत्रीय देश किसी नए बड़े युद्ध को टालना चाहते हैं।
हालांकि, ईरान की शर्तों और अमेरिका की मांगों के बीच मौजूद गहरे मतभेदों को देखते हुए तत्काल समझौते की संभावना फिलहाल कठिन नजर आती है।
स्रोत: रॉयटर्स (Reuters)
