तीन साल के युद्ध ने पानी को भी बना दिया संघर्ष का हिस्सा; लाखों फिलिस्तीनी सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता से महरूम
गाजा सिटी। एजेंसी । गाजा में अब पानी सिर्फ प्यास बुझाने की जरूरत नहीं रहा। पानी हासिल करना खुद एक संघर्ष बन चुका है।
कहीं परिवार पानी के टैंकरों के पीछे घंटों कतार में खड़े हैं, तो कहीं बच्चे बाल्टियां उठाकर लंबी दूरी तय कर रहे हैं। घरों में पानी पहुंच भी जाए तो परिवार को तय करना पड़ता है कि उसे पहले पीने के लिए बचाया जाए, खाना पकाने में इस्तेमाल किया जाए या बच्चों को नहलाने और कपड़े धोने के लिए।
युद्ध ने गाजा के लोगों से सिर्फ उनके घर, स्कूल और अस्पताल नहीं छीने हैं। उसने जिंदगी की सबसे बुनियादी जरूरत—साफ पानी—तक उनकी पहुंच को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है।
हनादी अल-अफ, जो अपने पांच बच्चों के साथ गाजा सिटी में विस्थापित जीवन जी रही हैं, कहती हैं कि युद्ध से पहले पानी जुटाना उनके परिवार के लिए कोई समस्या नहीं थी।
“हम अब बाल्टियों में पानी लेकर आते हैं। यह हमारे बच्चों के लिए बोझ बन गया है। स्कूल जाने और पढ़ाई करने के बजाय वे पानी ढोते हैं,” उन्होंने जून में इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) को बताया।
उनकी कहानी गाजा के हजारों परिवारों की कहानी बन चुकी है।
91 फीसदी परिवार पानी की असुरक्षा में
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) द्वारा सितंबर में उद्धृत एक सर्वेक्षण के अनुसार, आकलन किए गए 91 फीसदी परिवार मध्यम से गंभीर जल असुरक्षा का सामना कर रहे थे।
लगभग 31 फीसदी परिवारों को न्यूनतम मानवीय मानकों से भी कम कुल पानी उपलब्ध था। पीने के पानी की बात करें तो 57 फीसदी परिवार न्यूनतम मानकों से नीचे थे।
स्थिति केवल पानी की मात्रा तक सीमित नहीं है। करीब 88 फीसदी परिवारों ने सुरक्षित और स्वच्छ स्वच्छता सुविधाओं तक पहुंच में कठिनाई बताई।
यानी गाजा में लाखों लोगों के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि “पानी मिलेगा या नहीं”, बल्कि यह भी है कि जो पानी मिलेगा, वह पीने लायक होगा या नहीं।
तबाह हो चुका है जल तंत्र
तीन साल से जारी युद्ध ने गाजा की जल और स्वच्छता व्यवस्था को लगभग पंगु बना दिया है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा उद्धृत एक आकलन के मुताबिक, गाजा के 88 फीसदी सतही WASH बुनियादी ढांचे और 76 फीसदी भूमिगत नेटवर्क को नुकसान पहुंचा है।
ICRC के अनुसार, गाजा में पानी का उत्पादन अक्टूबर 2023 से पहले के स्तर का केवल लगभग 40 फीसदी रह गया है।
कुओं से स्वतंत्र रूप से पानी का उत्पादन तो युद्ध-पूर्व स्तर के एक-तिहाई से भी कम रह गया है।
इसका सीधा असर आम परिवारों पर पड़ रहा है।
पानी की कमी का मतलब है—लंबी कतारें, भारी बाल्टियां, बच्चों की पढ़ाई का नुकसान, महिलाओं पर अतिरिक्त घरेलू बोझ और परिवारों के लिए हर बूंद का हिसाब।
बिजली नहीं तो पानी भी नहीं
गाजा के जल संकट को बिजली के संकट से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
कुएं चलाने हों, समुद्री जल को मीठा करने वाले संयंत्र संचालित करने हों या सीवेज पंपिंग स्टेशन चलाने हों—हर जगह बिजली की जरूरत होती है।
लेकिन संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, गाजा के करीब 90 फीसदी ऊर्जा बुनियादी ढांचे को नुकसान या विनाश का सामना करना पड़ा है।
नियमित बिजली आपूर्ति के अभाव में पानी और स्वच्छता व्यवस्था को जनरेटरों के सहारे चलाया जा रहा है।
लेकिन जनरेटर के लिए ईंधन चाहिए—और ईंधन की कमी इस पूरी व्यवस्था को और कमजोर कर देती है।
ICRC ने जून में बताया था कि गाजा ढाई साल से अधिक समय से नियमित बिजली आपूर्ति से वंचित है।
यानी गाजा में पानी की हर बूंद के पीछे एक और संकट छिपा है—बिजली का संकट।
सवाल पानी की मात्रा का नहीं, उसकी सुरक्षा का भी है
गाजा में उपलब्ध पानी का हर स्रोत सुरक्षित नहीं है।
अगस्त में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने 938 पानी के नमूनों की जांच की। इनमें 73 फीसदी से अधिक नमूने WHO द्वारा सुझाए गए मुक्त अवशिष्ट क्लोरीन स्तर पर खरे नहीं उतरे।
लगभग 18 फीसदी नमूनों में सूक्ष्मजीव संबंधी प्रदूषण पाया गया।
WHO की फिलिस्तीन प्रतिनिधि राइनहिल्डे वान डी वीरड्ट ने सितंबर में बताया कि जनवरी से अगस्त के बीच 6,700 से अधिक पानी के नमूनों की जांच की गई।
इस दौरान पानी में सूक्ष्मजीव संबंधी प्रदूषण जनवरी के 6 फीसदी से भी कम स्तर से बढ़कर अगस्त में 18 फीसदी से अधिक हो गया।
इसी अवधि में तीव्र पानी जैसे दस्त के मामले भी लगभग दोगुने हो गए।
यह आंकड़े बताते हैं कि गाजा में पानी का संकट सिर्फ प्यास का संकट नहीं है।
यह सार्वजनिक स्वास्थ्य का संकट भी है।
सीवेज, कचरा और बीमारी का बढ़ता खतरा
पानी की कमी के साथ स्वच्छता व्यवस्था भी चरमरा चुकी है।
करीब 39 फीसदी परिवारों ने अपने आश्रय स्थलों के आसपास कचरा जमा होने की सूचना दी, जबकि 36 फीसदी ने अपने रहने की जगह के पास सीवेज या गाद देखे जाने की बात कही।
विस्थापन शिविरों में हालात और भी खराब हैं।
लगभग 230 विस्थापन स्थलों की सुरक्षा जांच में असुरक्षित शौचालय, खुले गड्ढे, गंदे पानी का जमाव, खराब जल निकासी और अत्यधिक भीड़ जैसी समस्याएं सामने आईं।
बारिश का मौसम इस संकट को और गंभीर बना सकता है।
क्षतिग्रस्त सीवेज और जल निकासी प्रणालियां बाढ़ तथा संक्रामक बीमारियों के खतरे को बढ़ा रही हैं।
MSF के अनुसार, मई से अगस्त 2025 के बीच सर्वेक्षण में शामिल लगभग हर चार में से एक व्यक्ति ने पिछले महीने दस्त की शिकायत की थी।
2025 में MSF के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में करीब 18 फीसदी परामर्श त्वचा संबंधी बीमारियों के लिए हुए।
सबसे बड़ी कीमत बच्चे चुका रहे हैं
गाजा के जल संकट का सबसे मार्मिक चेहरा बच्चे हैं।
जो समय उन्हें स्कूल में बिताना चाहिए, उसका एक हिस्सा पानी जुटाने में गुजर रहा है।
हनादी अल-अफ के बच्चे भी उन हजारों बच्चों में शामिल हैं जिन्हें पढ़ाई और पानी के बीच चुनाव करना पड़ रहा है।
एक तरफ स्कूल की किताब है।
दूसरी तरफ पानी की बाल्टी।
और परिवार के लिए दोनों में से किसी एक को चुनना भी आसान नहीं।
पानी ढोने की जिम्मेदारी बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है।
MSF ने कहा है कि पानी और स्वच्छता की कमी से जुड़ी परेशानियों ने लोगों में मानसिक तनाव बढ़ाया है और उनकी गरिमा की भावना को प्रभावित किया है।
‘पानी को हथियार बनाया गया’
MSF ने अप्रैल में जारी अपनी रिपोर्ट में इजरायली अधिकारियों पर गाजा में पानी तक पहुंच को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
संगठन ने पानी की कथित जानबूझकर रोक को सामूहिक दंड के व्यापक आरोपों से जोड़ा और कहा कि जल एवं स्वच्छता व्यवस्था पर हमले, मानवीय सहायता पर प्रतिबंध, विस्थापन और जरूरी सामान की आपूर्ति में रुकावट ने पानी तक पहुंच को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
MSF ने अपने स्पष्ट रूप से चिह्नित पानी के टैंकरों और बोरवेलों पर गोलीबारी तथा उनके नष्ट किए जाने की घटनाओं का भी दस्तावेजीकरण करने का दावा किया है।
इजरायल ने युद्ध के दौरान अपनी सैन्य कार्रवाइयों को सुरक्षा जरूरतों और हमास के खिलाफ अभियान के रूप में पेश किया है तथा नागरिकों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों को खारिज किया है।
क्या गाजा की जल व्यवस्था फिर खड़ी हो सकती है?
गाजा की जल व्यवस्था को फिर से खड़ा करना केवल पाइप और पंप लगाने का सवाल नहीं है।
इसके लिए बिजली चाहिए।
ईंधन चाहिए।
क्लोरीन और रसायन चाहिए।
स्पेयर पार्ट्स चाहिए।
कुएं और समुद्री जल शोधन संयंत्र चाहिए।
सीवेज नेटवर्क चाहिए।
और सबसे बढ़कर—सुरक्षित और निर्बाध मानवीय पहुंच चाहिए।
पानी की व्यवस्था बहाल करना वर्षों का काम हो सकता है।
लेकिन गाजा के लोगों के लिए इंतजार की कीमत हर दिन चुकानी पड़ रही है।
एक परिवार के लिए यह कीमत कई घंटे पानी की कतार में खड़े होने के रूप में सामने आती है।
एक मां के लिए यह अपने बच्चों को साफ पानी उपलब्ध न करा पाने की चिंता है।
एक बच्चे के लिए यह स्कूल छूटने का खतरा है।
और एक पूरे समाज के लिए यह स्वास्थ्य, गरिमा और भविष्य का संकट है।
आखिर कब खत्म होगा पानी के लिए यह संघर्ष?
गाजा के लोगों की मांग बहुत बड़ी नहीं है।
उन्हें विलासिता नहीं चाहिए।
उन्हें सिर्फ इतना चाहिए कि नल से पानी आए और वह पीने योग्य हो।
उन्हें ऐसा शौचालय चाहिए जो सुरक्षित हो।
उन्हें ऐसी बिजली चाहिए जो पानी के पंप चला सके।
और बच्चों को ऐसी जिंदगी चाहिए जिसमें उनके हाथ में पानी की बाल्टी नहीं, स्कूल की किताब हो।
गाजा की त्रासदी शायद इसी एक तस्वीर में सबसे साफ दिखाई देती है—
एक बच्चा पानी की बाल्टी उठाए हुए है और उसके कंधे पर वह बोझ है, जो उसके हाथ में नहीं होना चाहिए था।
उसके हाथ में किताब होनी चाहिए थी।
Disclaimer : यह खबर MNTV समाचार Website से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रकाशित की गई है। इसमें दी गई जानकारी और बयान मूल स्रोत के हैं , Asia Times ने सिर्फ हैडलाइन लिखी है .
