योगी सरकार रोज़गार देने में नाकाम, 100 दिन में 9500 युवाओं को नौकरी देने का वादा अधूरा
लखनऊ | यूपी में आम जन, युवा, बेरोज़गार कई दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। योगी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में 9500 युवा बेरोज़गारों को नौकरी देने का वादा किया था। लेकिन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के 100 दिन पूरे होने के बावजूद सरकार अपने वादे को पूरा नहीं कर सकी। योगी सरकार बेरोज़गारों को रोज़गार देने में नाकाम साबित हुई है.
यही हाल दूसरे विभागों का भी है। बिजली कर्मचारियों के घरों में मीटर लगवाने में पावर कार्पोरेशन नाकाम रहा है। इसके साथ ही योगी सरकार एक साल में दो मुफ्त गैस सिलेंडर देने के अपने वादे की शुरुआत ही नहीं कर सकी है।
यूपी में भाजपा की दोबारा सरकार बनने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 100 दिन में राज्य के विकास के लिए एक एजेंडा तैयार किया था और इसकी सारी जिम्मेदारी अपने मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों को सौंपी थी। यही नहीं, योगी आदित्यनाथ ने बेरोज़गारों को रोजगार देने के लिए मन बनाया था और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से यह अपेक्षा किया था कि वह इस काम को तेजी के साथ करेगा तथा बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराएगा।
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने योगी आदित्यनाथ की मंशा को पूरा करने के लिए 9500 युवा बेरोज़गारों को नौकरी देने का दावा किया था। लेकिन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग योगी आदित्यनाथ-2 सरकार के 100 दिन पूरे होने के बावजूद अपने वादे को पूरा करने में फेल रहा है।
योगी आदित्यनाथ-2 सरकार द्वारा बेरोज़गारों को रोजगार देने की मंशा जाहिर करने के बाद उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 100 दिन में 9500 युवा बेरोजगारों को नौकरी देने का वादा किया था। लेकिन वह अपना वादा पूरा नहीं कर सका है
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने बेरोजगारों को भर्ती करने के लिए 3 नए विज्ञापन जारी करने, 3 भर्ती परीक्षा कराने और 4 परीक्षाओं के नतीजे जारी करने का वादा किया था। जबकि कनिष्ठ सहायक के 535 पदों और आबकारी सिपाही के 405 पदों का ही परिणाम आयोग जारी कर सका है। इस तरह 940 युवाओं को ही रोजगार मिला है।
आयोग अपने किये गए वादे में से 10 प्रतिशत से भी कम युवाओं को रोजगार दे पाया है। आयोग ने 3 नए विज्ञापन जारी करने की बात कही थी, लेकिन वह 2 विज्ञापन ही जारी कर सका है। इसमें से एक प्रारंभिक अहर्ता परीक्षा-2022(पीईटी) और दूसरा प्रवर /अवर सहायक, पूर्ति निरीक्षक का निकाला है।
इस तरह योगी आदित्यनाथ की सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने में फेल रही है। जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 100 दिन में बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के लिए बड़े -बड़े और लंबे -चौड़े वादे किए थे।
अब हम योगी आदित्यनाथ सरकार के दूसरे बड़े विभाग ऊर्जा की बात करते हैं। इस विभाग के मंत्री अरविंद कुमार शर्मा हैं। अरविंद कुमार शर्मा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़ास हैं। अरविंद कुमार शर्मा ने यह मन बनाया था कि पावर कार्पोरेशन के लगभग 1 लाख विभागीय कर्मचारियों के यहां बिजली के मीटर लग जाएं, जिससे विभाग के राजस्व में बढ़ोत्तरी हो। लेकिन अरविंद कुमार शर्मा इसको अमलीजामा पहनाने में नाकाम रहे।
हालांकि दावा किया जा रहा है कि प्रदेश में 4.58 लाख नए मीटर लगाए गए हैं। लेकिन कितने मीटर विभागीय कर्मचारियों के यहां पर लगाए गए हैं, इस पर विभाग के कर्मचारी और अधिकारी मौन हैं। प्रदेश में बिजली की हालत खराब है। ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा चाहते हैं कि पटरी से उतरे बिजली विभाग को वह चुस्त दुरुस्त कर दें, लेकिन ख़बर है कि प्रमुख सचिव ऊर्जा एम देवराज अरविंद कुमार शर्मा का पूरी तरह से सहयोग नहीं करते हैं।
एम देवराज की पीठ पर योगी आदित्यनाथ ने हाथ रखा हुआ है। योगी आदित्यनाथ चाहते हैं कि अरविंद कुमार शर्मा बिजली विभाग यानी ऊर्जा विभाग चलाने में फेल हो जाएं, तो अरविंद कुमार शर्मा से ऊर्जा विभाग ले लिया जाए। अरविंद कुमार शर्मा, पीएम नरेंद्र मोदी के कारण योगी सरकार में मंत्री बने हैं और उनको मनचाहा विभाग ऊर्जा देना पड़ा है। जबकि योगी आदित्यनाथ ऊर्जा विभाग अरविंद कुमार शर्मा को नहीं देना चाहते थे।
यूपी में दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने मतदाताओं को भाजपा के पाले में लाने के लिए साल में 2 मुफ्त गैस सिलेंडर देने का वादा किया था। योगी आदित्यनाथ के वादे के बाद मतदाताओं को यह लगा था कि उनको होली के त्यौहार में मुफ्त में एक गैस सिलेंडर मिलेगा, जिससे उनका त्यौहार बढ़िया से होगा। लेकिन मतदाता ताकते रह गए और उनको मुफ्त के गैस सिलेंडर के दर्शन नहीं हुए।
जून महीने में योगी आदित्यनाथ की सरकार के 100 दिन पूरे हो गए हैं, लेकिन मतदाताओं को अभी तक मुफ्त में मिलने वाला गैस सिलेंडर नहीं मिला है। इस तरह योगी आदित्यनाथ का मतदाताओं से किया गया यह वादा झूठा साबित हो गया है।
योगी आदित्यनाथ बड़े-बड़े दावे कर यूपी में भूमाफियाओं के कब्जे से सरकारी ज़मीन मुक्त कराने की बात करते हैं, जबकि यह सच नहीं है। यूपी में योगी आदित्यनाथ सेलेक्टिव भूमाफियाओं के कब्जे से ही जमीन मुक्त करा रहे हैं। आज भी बड़े पैमाने पर यूपी में भूमाफियाओं ने सरकारी ज़मीनों और तालाबों पर कब्जा कर रखा है, लेकिन योगी आदित्यनाथ चुप्पी साधे हुए हैं।
यूपी में अपराध चरम पर है, इस पर योगी सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। आए दिन हत्या, बलात्कार, लूटपाट और महिलाओं से संबंधित अपराध होते रहते हैं, जिन पर योगी आदित्यनाथ की सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। इस प्रकार योगी आदित्यनाथ की सरकार अपने 100 दिन के कार्यकाल में असफल ही साबित हुई है।
...courtesy to indiatomorrow

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