क्यों करो या मरो वाले इस मैच में जीत के बाद भारतीय टीम की राह और कठिन हो गई है

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करो या मरो वाले किसी मैच की सबसे खास बात यह मानी जाती है कि इसमें किसी कप्तान और कोच के लिए अपनी टीम का उत्साह बढ़ाना सबसे आसान होता है. लेकिन, भारत और न्यूजीलैंड के मैच का परिणाम देखने के बाद पता चलता है कि इस काम को भी भारतीय कप्तान मिताली राज ने काफी गंभीरता से लिया.

आज हुए इस अहम मैच में टीम के खेल को देख कर साफ़ लग रहा था कि उसने अपनी कमियों पर बारीकी से काम किया है और इन्हें दूर करने में काफी हद तक सफलता भी पाई है. यही वजह थी कि पिछले दो मैच हारने के बाद काफी कमतर नजर आने लगी भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीम को 186 रन के बड़े अंतर से हरा दिया.

इस मैच में किवी कप्तान सूजी बेट्स ने टॉस जीतकर भारतीय टीम को पहले बल्लेबाजी करने के लिए आमंत्रित किया. हालांकि, पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत काफी खराब रही. उसकी सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना 13 और पूनम राउत मात्र 4 रन ही बना सकीं. हालांकि, इन दोनों के जाने के बाद अनुभवी कप्तान मिताली राज और हरमनप्रीत कौर ने पारी को संभाला और तीसरे विकेट के लिए 132 रन की साझेदारी की.

विश्वकप में काफी अच्छी फॉर्म में नजर आ रही मिताली राज ने इस मैच में 109 रन की शानदार शतकीय पारी खेली. जबकि, इससे पहले के हुए छह मैचों कुछ विशेष न कर सकी हरमनप्रीत कौर ने 60 रन बनाए. हालांकि, इन दोनों की बेहतरीन पारियों के दौरान भारतीय टीम की रन गति इतनी धीमी थी कि लगा टीम फिर से वही गलती तो नहीं दोहरा रही जिसकी वजह से वह पिछले दो मैच हारी थी. इन दोनों के खेलने दौरान भारतीय टीम 37 ओवर में महज 155 रन ही बना सकी थी. लेकिन, इसके बाद बल्लेबाजी करने आई वेदा कृष्णामूर्ति ने मैच का रुख ही बदल दिया. उन्होंने 45 गेंदों पर 70 रन की तेजतर्रार पारी खेल कर टीम के स्कोर को 265 तक पहुंचा दिया.

इसके बाद बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड टीम की शुरुआत काफी खराब रही. टीम की सबसे बेहतर बल्लेबाज कप्तान सूजी बेट्स मात्र पांच रन बनाकर तेज गेंदबाज शिखा पांडे का शिकार बनीं. अगले ही ओवर में झूलन गोस्वामी ने आक्रामक विकेटकीपर बल्लेबाज रिचेल प्रीस्ट को चलता कर दिया. पांडे और गोस्वामी द्वारा शुरुआत में विकेट लेकर बनाए गए दवाब का भारतीय स्पिनरों को बड़ा लाभ मिला. भारतीय स्पिन तिकड़ी पूनम यादव, दीप्ति शर्मा और राजेश्वरी गायकवाड़ की फिरकी के सामने कोई भी किवी बल्लेबाज नहीं टिक सका.

हालांकि, वनडाउन में बल्लेबाजी करने आई एमी सैटरथवेट ने जरूर कुछ देर संघर्ष किया और अपनी टीम की ओर से सर्वाधिक 26 रन बनाए. लेकिन, उनके आउट होने के बाद पूरी कीवी टीम मात्र 79 रन ही बना सकी. भारत की ओर से स्पिन गेंदबाजों ने आठ विकेट झटके जिसमें राजेश्वरी गायकवाड़ ने 15 रन देकर सबसे ज्यादा पांच विकेट लिए. इस मैच में शानदार शतकीय पारी खेलने वाले भारतीय कप्तान मिताली राज को मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया.

न्यूजीलैंड पर मिली इस जीत के साथ ही भारतीय टीम विश्वकप के सेमी फाइनल में पहुंच गई है जहां 20 जुलाई को उसका मुकाबला दुनिया की सबसे मजबूत और विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया से होगा. भारत ने अभी तक ऑस्ट्रेलिया के साथ 42 वनडे मैच खेले हैं जिसमें से उसे केवल 8 में ही जीत मिली है. इन आंकड़ों को देखने के बाद भारतीय टीम की आगे की राह काफी कांटों भरी नजर आ रही है. यही कारण है कि क्रिकेट विश्लेषक भारतीय टीम को न्यूजीलैंड पर मिली बड़ी जीत का जश्न मनाने के बजाय आगे की रणनीति पर गंभीरता से विचार करने की सलाह दे रहे हैं.


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