मस्जिद में महिलाओं को नमाज पढ़ने की इजाज़त की मांग पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

Awais Ahmad

मस्जिद में महिलाओं को दाखिल होने की इजाज़त दिए जाने की मांग पर सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। कोर्ट ने आज इस मसले पर केंद्र सरकार, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और सेंट्रल वक्फ काउंसिल से जवाब मांगा। कोर्ट ने नोटिस पुणे के रहने वाले दंपति यास्मीन जुबेर पीरज़ादे और जुबेर अहमद पीरज़ादे की याचिका पर जारी किया है।

याचिका में कहा गया है कि जमात ए इस्लामी और मुजाहिद को छोड़कर ज़्यादातर सुन्नी फिरकों में महिलाओं को मस्ज़िद में दाखिल होने और नमाज पढ़ने की इजाज़त नहीं है।

उन्होंने मस्जिदों का प्रबंधन देखने वाले कई मजहबी नेताओं से इजाज़त की दरख्वास्त की। लेकिन उन्होंने मना कर दिया. सरकार भी मुस्लिम महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाने में नाकाम रही है। इसलिए कोर्ट मामले में दखल दे।

नोटिस जारी करने से पहले जस्टिस एस ए बोबडे और एस अब्दुल नज़ीर की बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील से कई सवाल किए।

बेंच ने पूछा, “आप समानता के मौलिक अधिकार की बात कर रहे हैं। लेकिन ये अधिकार सरकार के किसी फैसले या कार्रवाई में मांगा जा सकता है। कोई व्यक्ति ये नहीं कह सकता कि दूसरा व्यक्ति उसे समानता का अधिकार दे। अगर आप अपने घर में किसी को नहीं आने देना चाहते तो क्या वो जबरन आपके घर में घुसने का हक मांग सकता है।”

वकील इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए. सिर्फ इतना कहा कि मस्जिदों को सरकार की योजनाओं में अनुदान मिलता है। इसलिए वहां समानता के अधिकार की मांग की जा सकती है।

हालांकि, अनुदान के बारे में जानकारी मांगने पर वकील जवाब नहीं दे सके। उन्होंने बहस दूसरी दिशा में ले जाते हए कहा कि इस्लाम में सबसे पवित्र जगह का दर्जा रखने वाले मक्का की मस्जिद में महिलाओं को नमाज की इजाज़त है। जस्टिस नज़ीर ने उन्हें टोकते हुए कहा, “मेरी जानकारी में वहां की मस्ज़िद में महिलाओं के लिए रास्ता और नमाज की जगह पुरुषों से अलग है।”

थोड़ी देर की जिरह के बाद जस्टिस बोबडे ने बेंच की तरफ से आदेश लिखवाया। उन्होंने कहा, “याचिकाकर्ता से हमने जो सवाल पूछे, उन पर वो हमें पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाए। लेकिन ये कोर्ट पहले सबरीमला मंदिर पर फैसला दे चुकी है। उसके आधार पर इस मामले को भी देखने की ज़रूरत है. इसलिए हम याचिका पर नोटिस जारी कर रहे हैं।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *